वाराणसी में गंगा जी का जलस्तर स्थिर नौका संचालन फिर शुरू नाविकों और सैलानियों को राहत
वाराणसी: गंगा जी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के बाद अब राहत के संकेत दिखाई देने लगे हैं। एक दिन जलस्तर में कमी आने के बाद गुरुवार को गंगा का पानी स्थिर दर्ज किया गया। वाराणसी में गुरुवार को गंगा का जलस्तर 63.57 मीटर रिकार्ड किया गया। जलस्तर में स्थिरता आने और परिस्थितियां सामान्य होने के बाद गंगा में नौका संचालन फिर शुरू कर दिया गया है। इससे लंबे समय से नौका संचालन प्रभावित होने के कारण परेशान नाविकों के साथ ही काशी आने वाले सैलानियों और श्रद्धालुओं को भी राहत मिली है। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है और नदी की स्थिति के अनुसार आगे के निर्णय लिए जा रहे हैं।
जलस्तर में स्थिरता से घाटों पर लौटने लगी सामान्य गतिविधियां
पिछले दिनों गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की गई थी। पानी बढ़ने के कारण वाराणसी के कई घाटों की निचली सीढ़ियां और प्लेटफार्म जलमग्न हो गए थे। घाटों के बीच सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ था और कई स्थानों पर एक घाट से दूसरे घाट तक पहुंचना मुश्किल हो गया था। गंगा के बढ़ते पानी का असर घाट किनारे होने वाली धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा था। जलस्तर बढ़ने के कारण महाश्मशान पर शवदाह के स्थान में बदलाव करना पड़ा था। वहीं गंगा आरती के लिए निर्धारित स्थान में भी परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तन किया गया था। घाटों के किनारे स्थित कई छोटे बड़े मंदिरों में भी पानी पहुंच गया था।
गंगा का पानी बढ़ने से घाटों पर निर्भर रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हुई थीं। नाविकों के लिए नौका संचालन आय का प्रमुख साधन है। जलस्तर बढ़ने और सुरक्षा कारणों से नावों के संचालन पर रोक या प्रतिबंध का सीधा असर उनकी रोजी रोटी पर पड़ता है। ऐसे में नौका संचालन दोबारा शुरू होने से नाविक समाज को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर वाराणसी आने वाले पर्यटकों के लिए भी गंगा में नौका विहार काशी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। नौका संचालन शुरू होने से घाटों और गंगा के बीच पर्यटकों की आवाजाही फिर बढ़ने की संभावना है।
चेतावनी बिंदु से अभी काफी नीचे है गंगा का जलस्तर
गुरुवार को 63.57 मीटर दर्ज किया गया गंगा का जलस्तर वाराणसी के आधिकारिक चेतावनी बिंदु से काफी नीचे है। वाराणसी में गंगा का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर निर्धारित है जबकि खतरे का बिंदु 71.262 मीटर है। इस हिसाब से वर्तमान जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 6.69 मीटर नीचे है। इसलिए मौजूदा आंकड़े के आधार पर वाराणसी शहर में गंगा का जलस्तर फिलहाल चेतावनी स्तर के आसपास नहीं है। हालांकि मानसून के दौरान नदी के जलस्तर में बदलाव तेजी से हो सकता है इसलिए प्रशासन और तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए निगरानी और सतर्कता जरूरी बनी हुई है।
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की वाराणसी क्रूज टर्मिनल संबंधी रिपोर्ट में भी वाराणसी के लिए खतरे का जलस्तर 71.262 मीटर और चेतावनी स्तर करीब 70.262 मीटर दर्ज किया गया है। इसी रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में गंगा का जलस्तर मानसून के दौरान बढ़ सकता है और क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति का इतिहास भी रहा है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान स्थिति अपेक्षाकृत सामान्य होने के बावजूद नदी के जलस्तर में आगे होने वाले बदलाव पर नजर रखना जरूरी है।
बढ़े जलस्तर का घाटों पर दिखा था व्यापक असर
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर केवल नदी के किनारे तक सीमित नहीं रहा था। पानी बढ़ने के साथ घाटों की सीढ़ियां डूबती चली गई थीं और कई स्थानों पर घाटों का आपसी संपर्क प्रभावित हुआ था। घाटों पर होने वाली धार्मिक गतिविधियों के लिए भी अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी थी। आरती स्थल बदलने से लेकर शवदाह के स्थान में परिवर्तन तक कई व्यवस्थाएं पानी की स्थिति को देखते हुए की गई थीं। घाटों के आसपास मौजूद मंदिरों और धार्मिक स्थलों तक भी पानी पहुंचा था। इन परिस्थितियों ने तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी थी।
हाल की रिपोर्टों में भी यह सामने आया था कि गंगा के बढ़ते पानी के कारण वाराणसी के घाटों की ऊपरी सतह और निचली सीढ़ियों पर पानी पहुंच गया था तथा कई घाटों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ था। उस दौरान गंगा खतरे के निशान से लगभग सात मीटर नीचे होने के बावजूद बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन की निगरानी जारी थी। अब जलस्तर 63.57 मीटर पर स्थिर होने से तत्काल स्थिति में सुधार दिखाई दे रहा है।
नाविकों और पर्यटकों के लिए राहत
नौका संचालन दोबारा शुरू होने से सबसे अधिक राहत उन नाविक परिवारों को मिली है जिनकी आय गंगा में नाव चलाने पर निर्भर रहती है। गंगा में नौका संचालन बंद रहने पर नाविकों के सामने रोजमर्रा के खर्च को चलाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। जलस्तर में स्थिरता के बाद संचालन शुरू होने से अब नाविक फिर से अपने पारंपरिक काम पर लौट सकेंगे। सैलानियों और श्रद्धालुओं के लिए भी यह राहत की खबर है क्योंकि नौका विहार के जरिए काशी के घाटों का अलग दृश्य देखने का अवसर मिलता है।
हालांकि नौका संचालन शुरू होने के बावजूद नदी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। गंगा के जलस्तर में अचानक बदलाव होने की स्थिति में संचालन को लेकर प्रशासन फिर से निर्णय ले सकता है। नाविकों को सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा और यात्रियों को भी नदी में अनावश्यक जोखिम लेने से बचना चाहिए।
प्रशासन की निगरानी जारी
गंगा के जलस्तर में स्थिरता आने के बावजूद प्रशासन की निगरानी जारी है। तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी की स्थिति पर नजर रखने और किसी भी तरह की असामान्य वृद्धि होने पर सतर्क रहने की जरूरत है। मानसून के दौरान ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश और विभिन्न स्थानों से आने वाले पानी का असर गंगा के जलस्तर पर पड़ सकता है। इसलिए वर्तमान राहत की स्थिति को स्थायी मानने के बजाय लगातार निगरानी जरूरी है।
फिलहाल 63.57 मीटर के जलस्तर पर गंगा चेतावनी बिंदु से करीब सात मीटर नीचे बह रही है। ऐसे में तत्काल घबराने जैसी स्थिति नहीं है। इसके बावजूद वाराणसी के घाटों और तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतनी होगी। जलस्तर में दोबारा वृद्धि होने पर घाटों की स्थिति और नौका संचालन पर असर पड़ सकता है। प्रशासन की निगरानी और जलस्तर के ताजा आंकड़ों के आधार पर ही आगे की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
पृष्ठभूमि
वाराणसी में गंगा का जलस्तर मानसून के दौरान लगातार बदलता रहता है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के आधार पर वाराणसी में चेतावनी स्तर 70.26 मीटर और खतरे का स्तर 71.262 मीटर है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की रिपोर्ट में वाराणसी में गंगा के ऐतिहासिक उच्च बाढ़ स्तर का भी उल्लेख है। सितंबर 1978 में गंगा का जलस्तर 73.90 मीटर और अगस्त 2013 में 72.94 मीटर तक पहुंचा था। ऐसे पुराने आंकड़े बताते हैं कि मानसून में गंगा के जलस्तर की नियमित निगरानी क्यों जरूरी है। मौजूदा समय में 63.57 मीटर का जलस्तर चेतावनी बिंदु से काफी नीचे है और नौका संचालन फिर शुरू होना सामान्य गतिविधियों की वापसी का संकेत है।
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