प्रतिबिम्ब सेल की बड़ी कार्रवाई, संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश, तीन अभियुक्त गिरफ्तार
फर्जी क्रेडिट कार्ड ऐप बनाकर देशभर में कर रहे थे साइबर ठगी
कार्यालय पुलिस उपायुक्त अपराध कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी के मार्गदर्शन में हाल ही में गठित प्रतिबिम्ब सेल साइबर क्राइम सेल ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का सफल अनावरण किया है। यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त अपराध के निर्देशन तथा अपर पुलिस आयुक्त साइबर अपराध और सहायक पुलिस आयुक्त साइबर अपराध के नेतृत्व में की गई। प्रतिबिम्ब सेल टीम ने थाना सारनाथ और थाना साइबर क्राइम के सहयोग से तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तारी का विवरण
दिनांक 24 फरवरी 2026 को विधिवत पूछताछ के बाद साइबर सेल कार्यालय से प्रातः 05 बजे अभियुक्त अनीश वर्मा पुत्र सुभाष वर्मा निवासी जनपद बलिया, पुरुषोत्तम कुमार पुत्र सुनील दास निवासी जनपद देवघर झारखंड तथा टुकटुक कुमार पंडित पुत्र बलदेव पंडित निवासी जनपद देवघर झारखंड को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार यह गिरोह सुनियोजित तरीके से विभिन्न राज्यों के लोगों को निशाना बना रहा था।
साइबर ठगी का तरीका
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अभियुक्त फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाकर क्रेडिट कार्ड बनाने या लिमिट बढ़ाने के नाम पर विज्ञापन जारी करते थे। इच्छुक व्यक्तियों से मोबाइल नंबर, पैन कार्ड और बैंक संबंधी विवरण प्राप्त किए जाते थे। इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक क्रेडिट कार्ड के नाम से हूबहू दिखने वाली कूटरचित एपीके फाइल पीड़ित को भेजकर उसे इंस्टॉल कराया जाता था।
पीड़ित को वीडियो कॉल कर उसके वर्तमान क्रेडिट कार्ड की जानकारी ली जाती थी। एपीके इंस्टॉल होने के बाद पीड़ित के मोबाइल का ओटीपी और एसएमएस डेटा तथाकथित आईसीआईसीआई एडमिन ऐप पर प्राप्त किया जाता था। ओटीपी का उपयोग कर क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन लेनदेन, वॉलेट ट्रांसफर और वर्चुअल कार्ड जनरेट कर धनराशि आहरित की जाती थी। अभियुक्त फर्जी सिम कार्ड और बार बार बदले गए मोबाइल उपकरणों का प्रयोग करते थे। ठगी से प्राप्त धन को विभिन्न वॉलेट और रेंट पे सुविधा के माध्यम से बैंक खातों में स्थानांतरित किया जाता था या ऑनलाइन खरीदारी की जाती थी। प्रारंभिक जांच में लगभग 50 लाख रुपये की साइबर ठगी का अनुमान है।
बरामदगी और डिजिटल साक्ष्य
पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से कुल 10 मोबाइल फोन, 09 सिम कार्ड, लगभग 200 एपीके फाइलें और विभिन्न संदिग्ध ऐप जैसे आईसीआईसीआई एडमिन, यूजर एडमिन, वर्चुअल कार्ड होल्डर, जेटपार्टनर, जिल मनी, टी वॉलेट, सी वॉलेट, सुपरपे और आबा पे बरामद किए हैं। इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी सुरक्षित किए गए हैं।
तकनीकी जांच में मिले कई राज्यों से संबंध
तकनीकी जांच के दौरान प्रतिबिम्ब पोर्टल पर आईएमईआई जांच में कई एनसीआरपी शिकायतें लिंक पाई गईं। जेएमआईएस पोर्टल के माध्यम से विभिन्न राज्यों में दर्ज प्राथमिकी से भी कनेक्शन स्थापित हुआ। डिजिटल साक्ष्य की विधिवत हैश वैल्यू एमडी5 जनरेट कर संरक्षित की गई है।
अपराधिक इतिहास और पंजीकृत अपराध
पुरुषोत्तम कुमार के विरुद्ध पूर्व में मु0अ0सं0 08 वर्ष 20 थाना लखनऊ पूर्वी साइबर थाना कमिश्नरेट वाराणसी में दर्ज है। टुकटुक कुमार पंडित के विरुद्ध मु0अ0सं0 12 वर्ष 25 तथा 62 वर्ष 25 थाना साइबर क्राइम देवघर झारखंड में पंजीकृत है। अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 111, 318, 318 4, 319, 336, 338, 340 भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 66डी, 43, 66 आईटी एक्ट के अंतर्गत थाना साइबर क्राइम पर मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना प्रभारी निरीक्षक उदय वीर सिंह को सौंपी गई है।
गिरफ्तारी करने वाली टीम
प्रतिबिम्ब सेल और साइबर सेल टीम में निरीक्षक मनोज तिवारी प्रभारी साइबर सेल, उप निरीक्षक हिमांशु त्रिपाठी प्रभारी प्रतिबिम्ब सेल, आरक्षी अंकित कुमार गुप्ता, आरक्षी आदर्श आनंद सिंह तथा आरक्षी जावेद अख्तर शामिल रहे। थाना सारनाथ टीम से उप निरीक्षक बुधराज और आरक्षी देवेंद्र प्रताप सिंह ने सहयोग किया।
जनसामान्य से अपील
पुलिस ने जनसामान्य से अपील की है कि किसी भी अज्ञात लिंक या एपीके फाइल को इंस्टॉल न करें और ओटीपी या कार्ड विवरण किसी से साझा न करें। साइबर अपराध की सूचना तत्काल 1930 हेल्पलाइन या अधिकृत पोर्टल पर दें। साइबर ठगी से बचाव के लिए सतर्कता ही सबसे प्रभावी उपाय है।
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