वाराणसी पुलिस में बड़ी कार्रवाई: 60 दिन से अधिक विवेचना लटकाने पर 1 इंस्पेक्टर समेत 12 दरोगा निलंबित
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में कार्य में लापरवाही और विवेचनाओं को अनावश्यक रूप से लंबित रखने के मामले में पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। 60 दिन से अधिक समय तक मामलों की जांच लंबित रखने पर एक निरीक्षक सहित कुल 13 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
तीन थानों में समीक्षा के बाद हुआ खुलासा
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने गुरुवार को कैंट, शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर थानों के अर्दली रूम की समीक्षा की। इस दौरान लंबित विवेचनाओं, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य संकलन, गैर-जमानती वारंट के तामिले, वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी और बिना नंबर के वाहनों पर की गई कार्रवाई की गहन जांच की गई।
समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई मामलों की विवेचना 60 दिन से अधिक समय से लंबित पड़ी हुई थी और संबंधित विवेचकों द्वारा कोई ठोस प्रगति नहीं की गई थी। इसे गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल कार्रवाई की गई।
कैंट, शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर थानों के पुलिसकर्मी निलंबित
लापरवाही पाए जाने पर कैंट थाने पर तैनात निरीक्षक संतोष पासवान समेत पांच सब इंस्पेक्टरों को निलंबित किया गया। इनमें आशीष श्रीवास्तव, भैरव श्रीवास्तव, मुन्ना यादव, जमुना प्रसाद तिवारी और प्रवेश कुंतल शामिल हैं।
इसी प्रकार शिवपुर थाने पर तैनात सब इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह, कोमल यादव और आशीष कुमार सिंह को भी निलंबित किया गया है। वहीं लालपुर-पांडेयपुर थाने पर तैनात सब इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार गुप्ता, कोमल कुमार गुप्ता और विजेंद्र सिंह के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।
विभागीय जांच के आदेश
पुलिस कमिश्नर ने सभी निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आखिर किन कारणों से विवेचनाओं को 60 दिन से अधिक समय तक लंबित रखा गया और इसमें किस स्तर पर लापरवाही बरती गई।
इसके साथ ही सभी संबंधित पुलिसकर्मियों के पूर्व रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह लापरवाही पहली बार हुई है या पहले भी इस प्रकार की शिकायतें सामने आई हैं।
अर्दली रूम क्या होता है
अर्दली रूम (Orderly Room) पुलिस और अर्धसैनिक बलों में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया होती है। इसमें वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की समस्याओं, शिकायतों, अनुशासनहीनता और अवकाश से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हैं।
यह एक प्रकार की विभागीय बैठक होती है, जहां अनुशासन बनाए रखने और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए निर्णय लिए जाते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से पुलिस विभाग में जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।
सख्ती का संदेश
इस कार्रवाई से स्पष्ट संकेत गया है कि वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट अब कार्य में लापरवाही और ढिलाई को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। अधिकारियों का कहना है कि लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस कमिश्नर की इस कार्रवाई को विभाग में अनुशासन मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे अन्य पुलिसकर्मियों को भी अपने कार्य के प्रति अधिक जिम्मेदार और सतर्क रहने का संदेश मिला है।
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