1930 पर एक कॉल ने बदल दी कहानी, रामनगर पुलिस की पैरवी से वापस मिले 97250 रुपये
वाराणसी। साइबर ठगी की घटना के बाद समय रहते की गई शिकायत किस तरह बड़ी आर्थिक क्षति को बचा सकती है, इसका मामला वाराणसी कमिश्नरेट के थाना रामनगर क्षेत्र में सामने आया है। रामनगर थाना क्षेत्र निवासी विकास यादव साइबर ठगी का शिकार हुए थे और उनके बैंक खाते से 97250 रुपये निकाल लिए गए थे। घटना के बाद उन्होंने बिना समय गंवाए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद रामनगर पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क की ओर से की गई कार्रवाई तथा प्रभावी पैरवी के बाद ठगी की पूरी रकम पीड़ित के बैंक खाते में वापस करा दी गई। रकम वापस मिलने के बाद विकास यादव ने पुलिस टीम के प्रति आभार जताया।
एक जुलाई को हुई थी साइबर ठगी
प्राप्त जानकारी के अनुसार विकास यादव के साथ एक जुलाई 2026 को साइबर ठगी की घटना हुई थी। साइबर जालसाजों ने उनके बैंक खाते से 97250 रुपये निकाल लिए। बैंक खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने मामले को लेकर तत्काल कदम उठाया और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती समय में शिकायत दर्ज कराना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि समय रहते सूचना मिलने पर संबंधित लेनदेन को रोकने और रकम को आगे ट्रांसफर होने से बचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
1930 पर शिकायत के बाद बैंकिंग स्तर पर रकम होल्ड कराने की कार्रवाई
विकास यादव की ओर से 1930 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद ठगी की रकम को बैंकिंग स्तर पर होल्ड कराने की दिशा में कार्रवाई हुई। रकम होल्ड होने की जानकारी के बाद पीड़ित रामनगर थाने पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी निरीक्षक ने तत्काल संज्ञान लिया और थाना रामनगर की साइबर हेल्प डेस्क टीम को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस टीम ने पीड़ित को आवश्यक प्रक्रिया की जानकारी देते हुए रकम की वापसी के लिए संबंधित स्तर पर पैरवी शुरू की।
रामनगर पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क की प्रभावी पैरवी
पुलिस की ओर से मामले को केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं रखा गया। ठगी गई रकम की वापसी के लिए आवश्यक बैंकिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए संबंधित स्तर पर लगातार पैरवी की गई। पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क की सक्रियता के बाद आखिरकार विकास यादव के बैंक खाते से निकाली गई पूरी 97250 रुपये की रकम वापस उनके खाते में पहुंच गई। पूरी रकम वापस मिलने के बाद पीड़ित और उनके परिवार ने राहत की सांस ली। साइबर ठगी के बाद आर्थिक नुकसान की चिंता से परेशान विकास यादव के लिए रकम की वापसी बड़ी राहत साबित हुई।
समय पर शिकायत करना साबित हुआ अहम
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू घटना के तुरंत बाद 1930 पर शिकायत दर्ज कराना रहा। साइबर अपराध में ठगी की रकम कई बार अलग अलग खातों या माध्यमों में भेज दी जाती है। ऐसे में शिकायत में देरी होने पर रकम की वापसी की प्रक्रिया अधिक कठिन हो सकती है। विकास यादव ने घटना के बाद तत्काल साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दी जिसके बाद संबंधित स्तर पर रकम को रोकने की कार्रवाई की गई। इसके बाद रामनगर पुलिस ने मामले में आवश्यक पैरवी करते हुए रकम वापस कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा ने लिया तत्काल संज्ञान
मामले में रामनगर थाना प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा ने पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए साइबर हेल्प डेस्क को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। साइबर अपराध के मामलों में पीड़ित को समय पर उचित प्रक्रिया की जानकारी देना और संबंधित बैंकिंग तथा कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होता है। रामनगर पुलिस की ओर से इसी दिशा में कार्रवाई करते हुए पीड़ित की रकम वापस कराने के लिए प्रभावी पैरवी की गई। परिणामस्वरूप साइबर ठगी में गई पूरी रकम पीड़ित के खाते में वापस आ गई।
रकम वापस मिलने पर विकास यादव ने जताया आभार
97250 रुपये वापस मिलने के बाद विकास यादव ने रामनगर पुलिस और साइबर हेल्प डेस्क टीम के प्रति आभार जताया। साइबर ठगी के बाद उन्हें अपनी मेहनत की कमाई के वापस मिलने की चिंता थी। पुलिस की कार्रवाई और संबंधित स्तर पर की गई पैरवी के बाद पूरी रकम वापस मिलने से उन्हें राहत मिली। पीड़ित ने मामले में सहयोग और त्वरित कार्रवाई के लिए प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा सहित पुलिस टीम के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया।
साइबर ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत
रामनगर पुलिस की ओर से लोगों से अपील की गई है कि साइबर ठगी की घटना होने पर घबराएं नहीं और तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके साथ ही अपने बैंक को भी घटना की जानकारी दें। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर संबंधित लेनदेन को रोकने और रकम को होल्ड कराने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए साइबर ठगी के मामले में पीड़ित को बिना देरी किए कार्रवाई करनी चाहिए।
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