कानपुर: आईपीएल सट्टेबाजी का बड़ा खुलासा मोबाइल ऐप के जरिए करोड़ों का खेल 5 आरोपी गिरफ्तार 3.91 करोड़ नकद बरामद
कानपुर: इंडियन प्रीमियर लीग मैचों के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी के एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है जबकि गिरोह का सरगना अभी फरार बताया जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 3 करोड़ 91 लाख 50 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं जिसे गिनने में पुलिसकर्मियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। यह मामला शहर में तेजी से फैल रहे डिजिटल सट्टेबाजी नेटवर्क की गंभीरता को उजागर करता है।
महंगी मशीनों से गिनी जा रही थी रकम
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने सट्टे के इस अवैध कारोबार को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए दिल्ली से महंगी करेंसी काउंटिंग मशीनें मंगवाई थीं। प्रत्येक मशीन की कीमत करीब 35 हजार रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा एक करेंसी चेकिंग मशीन भी बरामद हुई है। पुलिस ने बताया कि जब्त की गई रकम में 500 रुपये की 146 गड्डियां 200 रुपये की 21 गड्डियां और 100 रुपये की 11 गड्डियां शामिल हैं। करीब दो घंटे तक छह पुलिसकर्मियों ने तीन मशीनों की मदद से इस नकदी की गिनती की।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
मामले का खुलासा मंगलवार देर रात फजलगंज थाना क्षेत्र में हुई कार्रवाई के दौरान हुआ। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गोविंदपुरी पुल के नीचे एक सफेद रंग की कार में बैठे दो युवक मोबाइल फोन के जरिए आईपीएल मैचों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस और स्वाट टीम ने घेराबंदी कर कार में मौजूद दोनों आरोपियों कार्तिक लखवानी और राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया। इनके मोबाइल फोन की जांच में अवैध बेटिंग ऐप वेबसाइट लिंक व्हाट्सएप चैट और लेनदेन से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मिले।
किराए के मकान से चल रहा था नेटवर्क
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि सट्टेबाजी का मुख्य संचालन किदवई नगर स्थित एक किराए के मकान से किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने मौके पर छापा मारकर तीन अन्य आरोपियों कल्पेश रवि नाई और विष्णु को गिरफ्तार किया। ये तीनों कैश के लेनदेन और रकम को सुरक्षित रखने का काम करते थे। छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी मोबाइल फोन कैलकुलेटर काउंटिंग मशीनें और एक कार भी बरामद की गई।
ऐप और सोशल मीडिया के जरिए जुड़ते थे लोग
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी एक अवैध ऑनलाइन बेटिंग ऐप और वेबसाइट के जरिए लोगों को जोड़ते थे। सोशल मीडिया पर लिंक शेयर कर यूजर्स को ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता था। इसके बाद उन्हें एक आईडी दी जाती थी जिसके जरिए वे सट्टा लगाते थे। छोटे अमाउंट की जीत पर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन किया जाता था जबकि बड़ी रकम का भुगतान ऑफलाइन किया जाता था। आरोपियों ने यह भी कबूल किया कि जब कोई व्यक्ति बड़ी रकम लगाता था तो उसे जानबूझकर हारने के लिए मजबूर किया जाता था।
सरगना फरार पुलिस की तलाश जारी
पुलिस के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड मनीष उर्फ प्रोफेसर है जो फिलहाल फरार है। उसकी आखिरी लोकेशन पुणे में ट्रेस की गई है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। बताया गया है कि इसी सरगना ने कार्तिक और राजकुमार को बेटिंग ऐप की मास्टर आईडी उपलब्ध कराई थी। वहीं अन्य आरोपियों को हर महीने 13 से 20 हजार रुपये तक की सैलरी दी जाती थी।
आयकर विभाग को दी गई जानकारी
पुलिस ने इस मामले में बरामद नकदी की जानकारी आयकर विभाग को भी दे दी है और जल्द ही रकम को उनके सुपुर्द किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाइयां जारी रहेंगी। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है बल्कि युवाओं को तेजी से जकड़ रही ऑनलाइन सट्टेबाजी की लत पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
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