योगी सरकार की नई पहल मितव्ययिता और पर्यावरण संरक्षण के लिए मंत्रियों को मिला सादगी का मंत्र
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन की कार्यशैली और मंत्रियों के आचरण को लेकर एक नई और अनुकरणीय लकीर खींच दी है। बुधवार को अपने सरकारी आवास पर आयोजित मंत्रिपरिषद की पहली औपचारिक बैठक में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को सख्त हिदायत दी कि वे जनता के बीच शासक नहीं बल्कि एक आदर्श जनसेवक के रूप में अपनी पहचान बनाएं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन की बचत और संसाधनों का संयमित उपयोग केवल एक आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि एक बड़ा राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को धरातल पर उतारने का आह्वान करते हुए कहा कि बदलाव की शुरुआत शासन के शीर्ष स्तर से होनी चाहिए ताकि समाज में एक सकारात्मक और प्रेरक संदेश जाए।
साप्ताहिक सार्वजनिक परिवहन और सादा जीवन
बैठक के दौरान सीएम योगी ने मंत्रियों के लिए एक नया प्रोटोकॉल निर्धारित किया जिसमें लग्जरी और दिखावे के स्थान पर सादगी को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने मंत्रियों से अपील की कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन अपनी सरकारी गाड़ियों को छोड़कर मेट्रो बस ई रिक्शा या साइकिल जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। यदि संभव हो तो वे कारपूलिंग की व्यवस्था भी अपना सकते हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब सत्ता में बैठे लोग जमीन से जुड़कर चलेंगे तभी आम जनता भी संरक्षण की दिशा में प्रेरित होगी।
इसके अलावा उन्होंने मंत्रियों की विदेश यात्राओं पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बेहद जरूरी इमरजेंसी को छोड़कर मंत्रियों को विदेशी दौरों से परहेज करना चाहिए और अपना पूरा ध्यान प्रदेश की विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर केंद्रित करना चाहिए।
ऊर्जा संरक्षण के लिए विशेष निर्देश
पर्यावरण और बिजली की बचत को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने सचिवालय और निदेशालय स्तर के सरकारी कार्यालयों के लिए कड़े दिशा निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि सरकारी दफ्तरों में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रखा जाए ताकि ऊर्जा की अनावश्यक खपत को रोका जा सके।
साथ ही उन्होंने शारीरिक फिटनेस और बिजली बचत दोनों को साधते हुए लिफ्ट के न्यूनतम उपयोग की सलाह दी। कार्यसंस्कृति में आधुनिकता का समावेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन कार्यालयों या संस्थानों में 50 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं वहां सप्ताह में कम से कम दो दिन वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू की जाए। इसके अतिरिक्त अंतर जनपदीय बैठकों और विधानसभा समितियों की चर्चाओं के लिए वर्चुअल मोड को प्राथमिकता देने की बात कही गई ताकि यात्रा व्यय और समय की बचत हो सके।
स्वदेशी को बढ़ावा और सामाजिक आयोजनों में सादगी
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए मंत्रियों से वोकल फॉर लोकल का ब्रांड एंबेसडर बनने की अपेक्षा की है। उन्होंने कहा कि मंत्रीगण जब भी किसी को उपहार भेंट करें तो सुनिश्चित करें कि वह वस्तु उत्तर प्रदेश में ही निर्मित हो।
सामाजिक उत्तरदायित्व की चर्चा करते हुए उन्होंने शादी विवाह जैसे कार्यक्रमों के लिए घरेलू पर्यटन स्थलों और स्थानीय होटलों को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने के लिए एलपीजी सिलेंडर के स्थान पर पीएनजी कनेक्शन को बढ़ावा देने हेतु तत्काल नीतिगत बदलाव करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी तेजी से पीएनजी नेटवर्क से जोड़ा जाना चाहिए ताकि ईंधन की लागत में कमी आए और पर्यावरण को लाभ मिले।
खाद्य तेल और सोने के आयात पर चिंता
आर्थिक मोर्चे पर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सीएम योगी ने आयातित वस्तुओं के न्यूनतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि खाद्य तेलों की अत्यधिक खपत और सोने के अनावश्यक आयात को हतोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने बड़े पैमाने पर जनजागरूकता अभियान चलाने और प्राकृतिक खेती व तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने नए और पुराने मंत्रियों के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कैबिनेट मंत्रियों को सुझाव दिया कि वे नीतिगत निर्णयों में अपने सहयोगी राज्य मंत्रियों के सुझावों को भी महत्व दें ताकि सामूहिक नेतृत्व के साथ शासन की जवाबदेही को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
LATEST NEWS