बाराबंकी जनसुनवाई में दिखी सादगी और जनसंपर्क की अलग तस्वीर
बाराबंकी: जनपद में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उत्तर प्रदेश शासन के राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य सत्येंद्र कुमार बारी उर्फ बीनू जी ने कार्यक्रम में पहुंचे लोगों की समस्याएं सुनने के लिए अलग अंदाज अपनाया। आमतौर पर जनसुनवाई कार्यक्रमों में मंच और औपचारिक व्यवस्था के बीच अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति दिखाई देती है, लेकिन इस कार्यक्रम में उन्होंने जमीन पर बैठकर लोगों से सीधे संवाद किया। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार यह दृश्य चर्चा का विषय बन गया और बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने इसे आत्मीयता से जोड़ा।
जनसुनवाई कार्यक्रम में उमड़ी बड़ी संख्या में भीड़
कार्यक्रम में जिले के अलग अलग क्षेत्रों से ग्रामीण महिलाएं बुजुर्ग और युवा अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। कई लोग राजस्व विवाद पेंशन आवास सामाजिक योजनाओं और अन्य प्रशासनिक मामलों से जुड़ी शिकायतें लेकर पहुंचे। लोगों की संख्या अधिक होने के कारण कार्यक्रम स्थल पर लगातार भीड़ बनी रही। उपस्थित लोगों ने बताया कि वे अपनी समस्या सीधे संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना चाहते थे। कार्यक्रम के दौरान एक एक व्यक्ति की बात सुनने की कोशिश की गई और शिकायतों को गंभीरता से दर्ज कराया गया।
लोगों के बीच बैठकर जनसुनवाई करने की शैली ने कार्यक्रम का माहौल बदल दिया। बताया गया कि जब बीनू जी जमीन पर बैठ गए तो कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कई अधिकारी भी वहीं आकर बैठ गए। इसके बाद वहां औपचारिक दूरी कम होती दिखाई दी और लोग अपेक्षाकृत सहज होकर अपनी समस्याएं रखने लगे। स्थानीय लोगों का कहना था कि इस तरह की स्थिति सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रमों में कम देखने को मिलती है।
मौके पर कई शिकायतों के समाधान का दावा
कार्यक्रम में मौजूद लोगों के अनुसार कई शिकायतों पर तत्काल संबंधित अधिकारियों से बातचीत की गई। कुछ मामलों में विभागीय अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। जनसुनवाई में पहुंचे कई लोगों ने कहा कि वे लंबे समय से विभिन्न दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे और उन्हें उम्मीद थी कि यहां आने से उनकी समस्या संबंधित अधिकारियों तक पहुंचेगी।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी भी प्रमुख रही। प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इसमें उप जिलाधिकारी समाज कल्याण विभाग पेंशन विभाग पुलिस विभाग और विद्युत विभाग से जुड़े अधिकारी भी शामिल रहे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों की उपस्थिति भी कार्यक्रम में देखने को मिली।
सरकारी योजनाओं को लेकर दिए गए निर्देश
कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि सरकार की प्राथमिकता अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। लोगों की शिकायतों के समाधान में देरी और लापरवाही को गंभीर विषय बताया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जन समस्याओं के निस्तारण में तेजी लाई जाए और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। कार्यक्रम के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचे।
ग्रामीणों और महिलाओं ने रखी अपनी बात
कार्यक्रम में पहुंची कई महिलाओं और ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं साझा कीं। कुछ लोगों ने पेंशन और जमीन से जुड़े मामलों की बात कही तो कुछ ने प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई की आवश्यकता बताई। स्थानीय स्तर पर मौजूद लोगों ने कहा कि सीधे संवाद होने से उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिला। कई लोगों ने उम्मीद जताई कि उनकी शिकायतों पर आगे कार्रवाई होगी और संबंधित विभाग उनकी समस्याओं पर ध्यान देगा।
कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने भी रोजगार शिक्षा और क्षेत्रीय समस्याओं से जुड़े मुद्दे उठाए। युवाओं का कहना था कि यदि इस प्रकार सीधे संवाद की व्यवस्था समय समय पर हो तो आम लोगों को अपनी समस्याएं रखने का बेहतर अवसर मिल सकता है। जनसुनवाई में मौजूद लोगों ने इसे सामान्य सरकारी कार्यक्रम से अलग अनुभव बताया और कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से प्रशासन और जनता के बीच संवाद मजबूत हो सकता है।
बाराबंकी में चर्चा का विषय बना कार्यक्रम
जनसुनवाई कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी इसकी चर्चा क्षेत्र में जारी रही। स्थानीय लोगों के बीच कार्यक्रम का स्वरूप और वहां दिखाई गई सादगी चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि कार्यक्रम से जुड़ी कई बातें लोगों के अनुभव और स्थानीय प्रतिक्रिया पर आधारित रहीं लेकिन इतना जरूर रहा कि इस आयोजन ने प्रशासनिक संवाद और जनसंपर्क को लेकर एक अलग तस्वीर प्रस्तुत की। आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रमों का प्रभाव लोगों की समस्याओं के समाधान और प्रशासनिक व्यवस्था पर किस रूप में दिखाई देगा यह आगे की प्रक्रिया से स्पष्ट होगा।
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