बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन लंबे समय से ब्रेन कैंसर से थे पीड़ित
उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बुधवार का दिन बेहद दुखद रहा जब बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक और बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार निर्वाचित जनप्रतिनिधि उमाशंकर सिंह का दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया। वह लगभग पचपन वर्ष के थे और लंबे समय से ब्रेन कैंसर से जूझ रहे थे। उनका उपचार देश के साथ साथ विदेश में भी कराया गया लेकिन बीमारी चौथे चरण तक पहुंच जाने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर मिलते ही प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों और शुभचिंतकों ने इसे पूर्वांचल की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया।
लंबे समय से चल रहा था इलाज
उमाशंकर सिंह पिछले काफी समय से गंभीर रूप से अस्वस्थ थे। बेहतर उपचार के लिए उन्हें अमेरिका तक ले जाया गया था लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। बाद में उनका इलाज दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में जारी रहा जहां बुधवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली। बीमारी के कारण वह सार्वजनिक कार्यक्रमों से भी दूर हो गए थे। इसके बावजूद क्षेत्र की गतिविधियों पर उनकी लगातार नजर बनी रही।
विधानसभा से अंतिम बार आनलाइन जुड़े थे
स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उन्होंने चौबीस फरवरी को विधानसभा की कार्यवाही में आनलाइन भाग लिया था। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उन्हें वर्चुअल रूप से बोलने की अनुमति देते हुए पूरे सदन की ओर से शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। उस समय उमाशंकर सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया था। यह उनकी सार्वजनिक राजनीतिक उपस्थिति का अंतिम महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
बसपा के सबसे भरोसेमंद नेताओं में थी पहचान
उमाशंकर सिंह ने छात्र राजनीति से अपना सार्वजनिक जीवन शुरू किया और वर्ष दो हजार ग्यारह में बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा। वर्ष दो हजार बारह के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार रसड़ा सीट से जीत दर्ज की। उस चुनाव में बसपा को प्रदेश स्तर पर भारी नुकसान हुआ था लेकिन उमाशंकर सिंह ने बड़ी जीत हासिल कर अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने वर्ष दो हजार सत्रह और वर्ष दो हजार बाईस में लगातार जीत दर्ज की। वर्ष दो हजार बाईस के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का विधानसभा में केवल एक ही विधायक चुना गया और वह उमाशंकर सिंह थे। इसी कारण पार्टी में उनका महत्व और बढ़ गया था।
बसपा प्रमुख मायावती उन्हें अपने छोटे भाई की तरह मानती थीं। पिछले वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर उन्होंने स्वयं उमाशंकर सिंह को राखी बांधी थी। जब उनकी तबीयत अधिक खराब हुई तब मायावती उनके आवास पर पहुंचकर उनका हालचाल भी लिया था। वर्ष दो हजार चौबीस में उनके पुत्र के विवाह समारोह में भी मायावती शामिल हुई थीं।
परिवार और राजनीतिक विरासत
उमाशंकर सिंह अपने पीछे पत्नी पुष्पा सिंह पुत्र प्रिंस युकेश और पुत्री यामिनी को छोड़ गए हैं। पुष्पा सिंह सीएस इंफ्रा कंस्ट्रक्शन लिमिटेड की प्रबंध निदेशक हैं जबकि प्रिंस युकेश कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज है कि भविष्य में प्रिंस युकेश उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी बन सकते हैं हालांकि अब तक उन्होंने सक्रिय राजनीति में कोई प्रमुख भूमिका नहीं निभाई है।
सामाजिक कार्यों से भी बनाई अलग पहचान
उमाशंकर सिंह केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। वर्ष दो हजार बारह में बड़ी संख्या में बेटियों का सामूहिक विवाह कराया। इसके बाद वर्ष दो हजार सोलह में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों जोड़ों का सामूहिक विवाह कराकर सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। इन आयोजनों ने उन्हें पूरे प्रदेश में अलग पहचान दिलाई। रसड़ा क्षेत्र में लोग उन्हें जनसेवा के कारण अपने बीच का नेता मानते थे और कई लोग उन्हें रसड़ा का रॉबिनहुड भी कहते थे।
विवाद और न्यायालय से मिली राहत
वर्ष दो हजार सत्रह में सरकारी ठेकों से जुड़े मामले में रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के उल्लंघन के आरोप के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी। यह उत्तर प्रदेश का चर्चित मामला बना। बाद में उन्होंने इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जहां उन्हें राहत मिली और उनके पक्ष में फैसला आया। इसके बाद उन्होंने अपना राजनीतिक सफर फिर मजबूती के साथ जारी रखा।
राजनीति के साथ कारोबार में भी मजबूत पहचान
उमाशंकर सिंह निर्माण कार्य खनन शिक्षा और होटल व्यवसाय से भी जुड़े रहे। उनकी निर्माण कंपनी ने कई सड़क परियोजनाओं पर काम किया। वर्ष दो हजार बाईस के चुनावी शपथ पत्र के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग चौवन करोड़ रुपये थी जबकि उन पर लगभग तेरह करोड़ रुपये का ऋण भी दर्ज था।
प्रदेश भर से शोक संवेदनाओं का सिलसिला
उनके निधन के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं सामाजिक संगठनों और समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। बलिया सहित पूर्वांचल के अनेक क्षेत्रों में उनके समर्थक उन्हें जनसरोकारों से जुड़ा नेता बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके निधन से बसपा को संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी क्षति हुई है क्योंकि वह विधानसभा में पार्टी की एकमात्र आवाज थे।
न्यूज़ रिपोर्ट परिवार की ओर से श्रद्धांजलि
न्यूज़ रिपोर्ट परिवार दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिवार और उनके समर्थकों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति दें। ॐ शांति।
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