योगी कैबिनेट विस्तार आज जातीय समीकरण और 2027 की रणनीति पर भाजपा का बड़ा दांव कई नए चेहरों को मिल सकता है मौका
उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राजभवन में रविवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। माना जा रहा है कि इस विस्तार में पांच से छह नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव भी संभव है। राजधानी लखनऊ में शनिवार देर शाम से राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और भाजपा संगठन से लेकर सहयोगी दलों तक संभावित नामों को लेकर लगातार चर्चा जारी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात करने राजभवन पहुंचे। करीब आधे घंटे चली इस बैठक में संभावित मंत्रियों की सूची पर चर्चा हुई। इसके बाद से भाजपा नेताओं और विधायकों के बीच हलचल और बढ़ गई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विस्तार केवल मंत्रियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि इसके जरिए भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा संदेश देने की तैयारी कर रही है।
सामाजिक संतुलन साधने पर जोर
सूत्रों के अनुसार भाजपा इस बार के विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दे रही है। खासकर ब्राह्मण दलित पिछड़ा वर्ग और महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की रणनीति साफ दिखाई दे रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आने वाले चुनावों में इन वर्गों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। यही वजह है कि संभावित मंत्रियों की सूची में लगभग हर प्रमुख सामाजिक वर्ग से जुड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं।
समाजवादी पार्टी से अलग होकर भाजपा के करीब आए ऊंचाहार विधायक मनोज पांडेय का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। रायबरेली और अवध क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले मनोज पांडेय पहले भी अखिलेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। पिछले लोकसभा और राज्यसभा चुनाव के दौरान उनका रुख भाजपा के समर्थन में दिखाई दिया था जिसके बाद से ही उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने की चर्चा लगातार चल रही थी।
पूजा पाल और महिला प्रतिनिधित्व पर फोकस
कौशांबी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। उनके पति राजू पाल की हत्या के बाद वह लंबे समय से राजनीतिक संघर्ष का चेहरा बनी हुई हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने अपने क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर विधानसभा में सक्रिय भूमिका निभाई है। भाजपा नेतृत्व उन्हें दलित और महिला दोनों वर्गों के प्रभावशाली चेहरे के रूप में देख रहा है। माना जा रहा है कि उन्हें मंत्री बनाकर भाजपा सामाजिक संदेश देने की कोशिश करेगी।
इसके अलावा सीतापुर की महमूदाबाद सीट से विधायक आशा मौर्य का नाम भी चर्चा में है। भाजपा संगठन से लंबे समय से जुड़ी आशा मौर्य ने पार्षद से लेकर विधायक तक का राजनीतिक सफर तय किया है। महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए भाजपा उन्हें भी मंत्रिमंडल में शामिल कर सकती है। वर्तमान में योगी सरकार में महिला मंत्रियों की संख्या सीमित है और पार्टी इस विस्तार के जरिए महिला वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
भूपेंद्र चौधरी की वापसी की संभावना
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की सरकार में वापसी की चर्चा भी तेज हो गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट चेहरे के तौर पर उनकी मजबूत पहचान मानी जाती है। संगठन और सरकार दोनों में लंबे अनुभव के कारण उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। 2017 में योगी सरकार बनने के बाद उन्हें पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी मिली थी और बाद में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।
दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं पर नजर
भाजपा इस विस्तार में दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं को भी प्रमुखता देने की तैयारी में दिखाई दे रही है। फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। संगठन और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वहीं अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर को भी भाजपा के प्रभावशाली दलित युवा नेताओं में गिना जाता है।
पिछड़े वर्ग से भाजपा एमएलसी रामचंद्र प्रधान और विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। हंसराज विश्वकर्मा को पूर्वांचल में विश्वकर्मा समाज का प्रभावशाली चेहरा माना जाता है जबकि रामचंद्र प्रधान संगठन और क्षेत्रीय राजनीति दोनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व ब्राह्मण समाज की नाराजगी को भी गंभीरता से ले रहा है। हाल के कुछ विवादों और मुद्दों के बाद पार्टी इस वर्ग को मजबूत राजनीतिक संदेश देना चाहती है। इसी कारण इस बार दो ब्राह्मण चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा है। मथुरा से विधायक और पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल है। संगठन और मीडिया प्रबंधन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। इसके अलावा भाजपा प्रदेश महामंत्री और एमएलसी गोविंद नारायण शुक्ला का नाम भी तेजी से आगे बढ़ा है।
2027 चुनाव की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा विस्तार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का अहम हिस्सा है। भाजपा एक तरफ विपक्ष से आए नेताओं को सम्मान देकर अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है तो दूसरी तरफ जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाकर बड़े सामाजिक समीकरण तैयार करने में जुटी हुई है।
फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उत्तर प्रदेश सरकार में कुल 54 मंत्री हैं। संवैधानिक प्रावधानों के तहत अभी कुछ और मंत्रियों को शामिल करने की गुंजाइश बनी हुई है। ऐसे में रविवार को होने वाला यह विस्तार योगी सरकार का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
पहला विस्तार लोकसभा चुनाव से पहले हुआ था
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला मंत्रिमंडल विस्तार पांच मार्च 2024 को हुआ था। उस समय सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर दारा सिंह चौहान अनिल कुमार और सुनील शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। अब दूसरे विस्तार में भाजपा इससे भी बड़ा सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में दिखाई दे रही है।
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