सुभासपा कार्यालय में कथित मारपीट और धमकी को लेकर ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर हमला
लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला है। राजभर ने 13 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि 12 अगस्त को सुभासपा के लखनऊ स्थित कार्यालय में घुसकर गाली गलौज और हाथापाई की गई तथा पिस्तौल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। राजभर ने इस घटना को राजनीतिक मतभेदों की सीमा से बाहर बताते हुए कहा कि हिंसा और गाली गलौज की लोकतांत्रिक राजनीति में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। राजभर की ओर से लगाए गए आरोपों की रिपोर्ट एनडीटीवी सहित कई समाचार माध्यमों ने प्रकाशित की है।
सुभासपा कार्यालय में क्या हुआ
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक घटना 12 अगस्त को सुभासपा के लखनऊ स्थित कार्यालय में हुई। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार पार्टी कार्यालय प्रभारी धर्म प्रकाश चौधरी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक राशिद अली नाम का व्यक्ति कार्यालय में पहुंचा और वहां मौजूद लोगों के साथ विवाद हुआ। आरोप है कि उसने ओम प्रकाश राजभर और उनके बेटे डॉ अरविंद राजभर के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया और धमकी दी। विरोध किए जाने पर हथियार निकालने का भी आरोप लगाया गया। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि कार्यालय में मौजूद लोगों के इकट्ठा होने के बाद संबंधित व्यक्ति वहां से चला गया।
राजभर ने सपा कार्यकर्ताओं पर लगाया आरोप
ओम प्रकाश राजभर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में इस घटना के लिए समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं लेकिन हिंसा और गाली गलौज को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। राजभर ने आरोप लगाया कि सुभासपा कार्यालय पर उनके लोगों ने कार्यालय प्रभारी धर्म प्रकाश के साथ गाली गलौज और हाथापाई की तथा पिस्तौल तानकर जान से मारने की धमकी दी। राजभर की ओर से की गई यह पोस्ट उनके आधिकारिक एक्स अकाउंट पर भी उपलब्ध है।
अखिलेश यादव से पूछा क्या यह आपके कहने पर हो रहा है
राजभर ने अखिलेश यादव से सवाल किया कि क्या यह सब उनके कहने पर हो रहा है या फिर पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की ओर से कार्यकर्ताओं को ऐसा करने का संकेत दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक लड़ाई लड़नी है तो जनता के बीच आकर मुद्दों पर बहस होनी चाहिए। राजभर ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की गुंडई से सपा चल सकती है लेकिन लोकतंत्र नहीं चलता। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और सुभासपा के बीच आरोप प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो गया है।
लड़ाई लड़नी है तो जनता के बीच आइए
ओम प्रकाश राजभर ने अपने संदेश में राजनीतिक संघर्ष का तरीका भी बताया। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और चुनावी मुकाबला लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं लेकिन इसका आधार जनता के मुद्दे होने चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि राजनीतिक मुकाबला करना है तो जनता के बीच आकर मुद्दों की बात की जाए। राजभर ने हिंसा और धमकी के आरोपों को लोकतांत्रिक राजनीति के लिए अनुचित बताया।
अरविंद राजभर को धमकी का भी आरोप
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि घटना को लेकर केवल कार्यालय प्रभारी से कथित मारपीट का आरोप ही नहीं है बल्कि ओम प्रकाश राजभर के बेटे डॉ अरविंद राजभर को भी कथित तौर पर धमकी दिए जाने की बात सामने आई है। एनडीटीवी के अनुसार पार्टी का आरोप है कि राशिद अली ने कार्यालय में पहुंचकर अरविंद राजभर को गाली दी और विरोध किए जाने पर हथियार निकाल लिया। घटना के समय ओम प्रकाश राजभर और डॉ अरविंद राजभर कार्यालय में मौजूद नहीं थे। पुलिस को दी गई शिकायत में घटना से संबंधित आरोपों का उल्लेख किया गया है।
सुहेलदेव का वंशज हूं डरता नहीं हूं
ओम प्रकाश राजभर ने अपने सोशल मीडिया संदेश में खुद को महाराजा सुहेलदेव का वंशज बताते हुए कहा कि वह ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर धमकी देने वालों का हिसाब कानून करेगा। राजभर ने अपने बयान के अंत में जय भारत जय श्रीराम जय श्रीकृष्ण और जय महाराजा सुहेलदेव का उल्लेख किया। उनका यह बयान राजनीतिक तेवर के साथ साथ अपने समर्थकों को भी स्पष्ट संदेश देने वाला माना जा रहा है।
सपा और सुभासपा के बीच पहले भी रहा है राजनीतिक टकराव
ओम प्रकाश राजभर और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक संबंधों में पहले भी उतार चढ़ाव रहा है। वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव के दौरान सुभासपा ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था। बाद में दोनों दलों के राजनीतिक रास्ते अलग हो गए। इसके बाद राजभर ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर कई बार राजनीतिक हमले किए। 2022 में सपा से अलग होने के बाद सुभासपा ने अपने संगठन को मजबूत करने और आगे की राजनीतिक रणनीति तय करने पर जोर दिया था। उस समय भी राजभर और सपा के बीच राजनीतिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए थे।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच महत्वपूर्ण
सुभासपा कार्यालय में हुई कथित घटना को लेकर राजभर ने गंभीर आरोप लगाए हैं और कार्यालय प्रभारी की ओर से पुलिस में शिकायत दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सत्य मानने से पहले पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का सामने आना जरूरी है। घटना के सीसीटीवी फुटेज प्रत्यक्षदर्शियों के बयान शिकायत में दर्ज आरोप और पुलिस की कार्रवाई से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में सुभासपा और राजभर की ओर से लगाए गए आरोपों का विवरण सामने आया है जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से इस घटना पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
राजनीतिक विवाद के बीच कानून व्यवस्था पर नजर
सुभासपा कार्यालय की घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते टकराव और आरोप प्रत्यारोप को चर्चा में ला दिया है। राजभर ने जहां इस घटना को अपराध की श्रेणी में आने वाला कृत्य बताया है वहीं उन्होंने राजनीतिक विरोधियों को जनता के बीच मुद्दों के आधार पर मुकाबला करने की चुनौती दी है। अब इस मामले में पुलिस की जांच और समाजवादी पार्टी की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में किसी तरह की आपराधिक घटना की पुष्टि होती है तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।
सोशल मीडिया पोस्ट में राजभर का आरोप
ओम प्रकाश राजभर ने 13 अगस्त 2026 को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए सुभासपा कार्यालय में कथित घटना का उल्लेख किया। उनकी पोस्ट में राजनीतिक मतभेदों के बीच हिंसा और गाली गलौज को गलत बताते हुए घटना की आलोचना की गई। राजभर ने सपा कार्यकर्ताओं पर कार्यालय में पहुंचकर कथित तौर पर गाली गलौज हाथापाई और पिस्तौल दिखाकर धमकी देने का आरोप लगाया है।
पुलिस शिकायत की जानकारी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुभासपा कार्यालय प्रभारी धर्म प्रकाश चौधरी ने इस मामले में पुलिस को शिकायत दी है। शिकायत में राशिद अली नाम के व्यक्ति पर कार्यालय में पहुंचने और कथित तौर पर धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में पुलिस की ओर से जांच और आगे की कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद घटना की पूरी तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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