श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे नाव सवार, रामपुर श्यामचंद के पास हुआ हादसा, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने की आर्थिक सहायता की घोषणा
वैशाली। बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर क्षेत्र में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत हो गई। मंगलवार 13 अक्टूबर की रात रामपुर श्यामचंद पंचायत के समीप हुई इस दुर्घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई। नाव पर सवार लोग गंगा पार कर दूसरे गांव में आयोजित श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नदी की बीच धारा में नाव पलट गई और उस पर सवार लोग पानी में डूबने लगे। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों और गोताखोरों ने बचाव कार्य शुरू किया। बाद में राज्य आपदा मोचन बल की टीम और प्रशासनिक अधिकारी भी राहत एवं बचाव अभियान में जुट गए। वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने हादसे में 13 लोगों की मौत की पुष्टि की है। घटना के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा है और गांव का माहौल गमगीन हो गया है।
श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे लोग
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हादसा मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे राघोपुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव के पास हुआ। नाव में लगभग 20 से 25 लोगों के सवार होने की जानकारी सामने आई है। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में यात्रियों की संख्या इससे अधिक भी बताई गई थी। नाव पर सवार लोग गंगा पार कर दूसरे गांव में आयोजित भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नाव बीच नदी में पलट गई और यात्रियों में अफरा तफरी मच गई। पानी में गिरे लोगों को बचाने के लिए आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल नदी की ओर दौड़े। रात का अंधेरा और नदी की गहराई बचाव कार्य में चुनौती बने। स्थानीय लोगों ने उपलब्ध संसाधनों की मदद से डूब रहे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया।
मृतकों में अधिकांश बच्चे और किशोर
इस हादसे में 13 बच्चों की मौत की पुष्टि होने के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार मृतकों में छह वर्ष के बच्चों से लेकर किशोर उम्र तक के बच्चे शामिल हैं। एक ही परिवार के कई बच्चों की मौत की खबर ने घटना की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। परिवार के जिन बच्चों के लौटने का इंतजार किया जा रहा था, उनकी मौत की सूचना मिलने के बाद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। ग्रामीणों के मुताबिक कई परिवारों के बच्चे एक साथ भोज में शामिल होने के लिए निकले थे। किसी ने नहीं सोचा था कि यह यात्रा इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगी। मृतकों की पहचान और उम्र से संबंधित अंतिम विवरण के लिए प्रशासन की आधिकारिक सूची को ही आधार माना जाना चाहिए।
घटना के बाद प्रभावित परिवारों को सांत्वना देने और स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अस्पताल में मृतकों के परिजनों की भीड़ जुट गई। बच्चों की मौत से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हादसे ने पूरे राघोपुर क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।
ग्रामीणों और एसडीआरएफ ने चलाया बचाव अभियान
नाव पलटने की सूचना मिलने के बाद ग्रामीणों ने सबसे पहले बचाव का प्रयास शुरू किया। स्थानीय गोताखोरों और राज्य आपदा मोचन बल की टीम ने नदी में तलाश अभियान चलाया। पानी से निकाले गए लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। जिलाधिकारी वर्षा सिंह और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार जिलाधिकारी ने छह लोगों को बचाए जाने की जानकारी दी थी। वहीं कुछ अन्य मीडिया रिपोर्टों में सात लोगों को बचाए जाने और उपचार के लिए अस्पताल भेजे जाने का उल्लेख है। बचाए गए लोगों और अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या को लेकर अलग अलग रिपोर्ट सामने आने के कारण अंतिम आंकड़ों की पुष्टि प्रशासनिक विवरण से की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने सीमित संसाधनों के बावजूद नदी में गिरे यात्रियों को बचाने की कोशिश की। रात में तलाशी अभियान चलाना कठिन था। हादसे के बाद घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और लापता लोगों की तलाश पर ध्यान दिया गया। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
नाव की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने नाव की स्थिति और नदी पार करने की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नाव की हालत पहले से खराब थी और इस संबंध में राघोपुर के अंचलाधिकारी दीपक कुमार को जानकारी दी गई थी। कुछ लोगों ने नाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों के सवार होने की आशंका भी जताई है। हालांकि पूर्व शिकायत किए जाने, प्रशासन को जानकारी मिलने और किसी स्तर पर लापरवाही होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इन बिंदुओं पर जांच और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
इस दुर्घटना ने नदी पार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली नावों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नाव की तकनीकी स्थिति, उसमें सवार यात्रियों की संख्या, उपलब्ध जीवनरक्षक उपकरण और बचाव के इंतजामों की जांच जरूरी है। यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी सामने आती है तो उसके आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख
राघोपुर नाव हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के निकटतम परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपये की अनुग्रह सहायता दी जाएगी। वहीं दुर्घटना में घायल प्रत्येक व्यक्ति को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री ने शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषित की चार लाख रुपये की सहायता
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस दुर्घटना में हुई जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजन को चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। घोषित सहायता के अनुसार पात्र मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार से चार लाख रुपये और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपये की सहायता मिल सकती है। इस तरह दोनों घोषणाओं के तहत कुल छह लाख रुपये की सहायता निर्धारित प्रक्रिया और पात्रता के अनुसार मिल सकती है।
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