गंगा में छलांग लगाने वाले अधेड़ को नाविकों ने बचाया समय रहते हुई बड़ी अनहोनी टली
रामनगर(वाराणसी)। रामनगर थाना क्षेत्र में शनिवार को एक ऐसी घटना सामने आई जिसने कुछ देर के लिए घाट पर मौजूद लोगों की सांसें थाम दीं। पारिवारिक तनाव से आहत होकर एक अधेड़ ने पूर्वी छोर स्थित सामने घाट पुल से गंगा नदी में छलांग लगा दी। जैसे ही लोगों की नजर नदी में बहते व्यक्ति पर पड़ी वैसे ही घाट पर मौजूद नाविकों ने बिना एक पल गंवाए अपनी छोटी स्टीमर लेकर उसका पीछा शुरू कर दिया। तेज बहाव के बीच नाविकों ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए रविदास घाट से पहले ही अधेड़ को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। नाविकों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया और घाट पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।
पारिवारिक विवाद के बाद उठाया आत्मघाती कदम
मिली जानकारी के अनुसार रामनगर निवासी शंभू कन्नौजिया उम्र लगभग साठ वर्ष अपने परिवार में हुए घटनाक्रम के बाद मानसिक रूप से काफी परेशान थे। बताया गया कि दो दिन पहले पुलिस ने उनके पुत्र को बटाऊबीर क्षेत्र में नशा करते हुए पकड़ा था। इसके बाद थाने में परिवार को बुलाकर समझाइश और चेतावनी दी गई थी। इस घटना के बाद शंभू कन्नौजिया गहरे तनाव में आ गए। शनिवार को इसी मानसिक स्थिति में उन्होंने सामने घाट पुल से गंगा नदी में छलांग लगा दी।
पत्नी की गुहार सुनकर नाविकों ने दिखाई मानवता
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही शंभू कन्नौजिया ने नदी में छलांग लगाई उनकी पत्नी रोते बिलखते घाट पर पहुंचीं और वहां मौजूद नाविकों से अपने पति को बचाने की गुहार लगाने लगीं। महिला की पुकार सुनते ही घाट पर मौजूद नाविकों ने किसी आदेश या इंतजार के बिना तुरंत अपनी छोटी स्टीमर नदी में उतार दी। तेज बहाव और समय की चुनौती के बीच नाविक लगातार अधेड़ का पीछा करते रहे और आखिरकार रविदास घाट से पहले उन्हें सुरक्षित पकड़कर नाव पर चढ़ा लिया। इसके बाद उन्हें सकुशल किनारे लाया गया।
इन नाविकों की बहादुरी बनी मिसाल
इस पूरी घटना में नाविक विनोद साहनी विष्णु साहनी सूरज साहनी सचिन साहनी और किशन साहनी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। सभी नाविकों ने सामूहिक प्रयास और साहस का परिचय देते हुए बिना अपनी जान की परवाह किए नदी में उतरकर अधेड़ की जान बचाई। स्थानीय लोगों ने नाविकों की इस बहादुरी और मानवता की भावना की सराहना करते हुए कहा कि यदि समय रहते यह प्रयास नहीं किया जाता तो परिणाम बेहद दुखद हो सकता था।
घाट पर जुटी भीड़ और लोगों ने ली राहत की सांस
घटना की जानकारी मिलते ही घाट पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। हर किसी की नजर गंगा की ओर थी और लोग अधेड़ के सुरक्षित बाहर आने की प्रार्थना कर रहे थे। जैसे ही नाविक उन्हें सुरक्षित किनारे लेकर पहुंचे वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। कई लोगों ने नाविकों के साहस की खुले दिल से प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने मानवता का सच्चा परिचय दिया है।
पृष्ठभूमि
बताया गया कि इस घटना की पृष्ठभूमि दो दिन पहले हुई उस कार्रवाई से जुड़ी है जिसमें पुलिस ने शंभू कन्नौजिया के पुत्र को बटाऊबीर क्षेत्र में नशा करते हुए पकड़ा था। इसके बाद परिवार को थाने बुलाकर चेतावनी दी गई थी। इसी घटनाक्रम के बाद शंभू कन्नौजिया मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। शनिवार को उन्होंने गंगा में छलांग लगाकर आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया लेकिन नाविकों की त्वरित सूझबूझ और साहस के चलते उनकी जान बच गई।
मानवता और साहस की मिसाल बनी घटना
रामनगर की यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि संकट की घड़ी में समय पर उठाया गया एक कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है। नाविकों ने जिस साहस और संवेदनशीलता का परिचय दिया वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा किनारे सेवा करने वाले नाविक केवल यात्रियों को एक घाट से दूसरे घाट तक पहुंचाने का ही कार्य नहीं करते बल्कि जरूरत पड़ने पर जीवन रक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। शनिवार की यह घटना उनकी बहादुरी और मानवता की ऐसी मिसाल बन गई जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में होती रही।
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