पुलिस के अनुसार, 13 जनवरी की रात 45 वर्षीय किसान राम सुमेर सिंह का शव नलकूप के पास अरहर के खेत में मिला था। प्रारंभिक जांच में मामला अज्ञात लोगों द्वारा की गई हत्या का प्रतीत हुआ, लेकिन आगे की जांच में पुलिस ने चौंकाने वाला सच उजागर किया। एसपी अनूप सिंह के नेतृत्व में चल रही जांच के दौरान यह बात सामने आई कि सुमेर की पत्नी रेनू देवी और उनकी सहेली मालती देवी के बीच करीब डेढ़ साल से गहरा समलैंगिक संबंध था। जब सुमेर को इस संबंध का पता चला तो उसने मालती को घर आने और पत्नी से मिलने से सख्ती से रोक लगा दी, जिससे दोनों महिलाओं के बीच रिश्ता तनावपूर्ण हो गया। эс रिपोर्ट के मुताबिक, सुमेर ने इस बीच अपनी पत्नी के साथ विवाद भी किया था।
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आरोप है कि इस प्रतिबंध और बढ़ते तनाव के चलते रेनू और मालती ने मिलकर हत्या की योजना बनाई। पुलिस पूछताछ में मालती ने बताया कि उसने अपने पुराने परिचित जितेंद्र गुप्ता उर्फ जिद्दी से संपर्क कर सुमेर सिंह की हत्या करवाने के लिए करीब 60,000 रुपये की सुपारी दी थी, जिसमें से रेनू ने 8,000 रुपये एडवांस के तौर पर दिए। शेष भुगतान हत्या को अंजाम दिए जाने के बाद किया जाना तय हुआ था। असल हत्याकांड 13 जनवरी की रात तब अंजाम दिया गया जब जितेंद्र अपने साथियों राजू सोनकर और रामप्रकाश उर्फ महू के साथ मौके पर पहुंचा और उन्होंने पहले रस्सी से गले को दबाकर, फिर चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी।
पुलिस ने रेनू देवी, मालती देवी और इस कथित साथी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं, मुख्य आरोपी जितेंद्र गुप्ता और रामप्रकाश अभी भी फरार हैं, और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस विशेष टीमें सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। पुलिस ने मोबाइल फोन, योजना के साक्ष्य और हत्या में प्रयुक्त सामग्री बरामद की है, जो मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं।
यह मामला न केवल फतेहपुर बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है क्योंकि इसमें रिश्तों, सामाजिक मान्यताओं और न्याय की सीमा से जुड़े कई संवेदनशील पहलू उभर कर आए हैं। कुछ सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने पुलिस जांच की पूरी पारदर्शिता और जल्द से जल्द सभी आरोपियों को कानून के अनुसार दंडित करने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी जारी है और जल्द ही उन्हें भी सलाखों के पीछे लाया जाएगा।
