नई दिल्ली: भारत इस वर्ष अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गौरव और गरिमा के साथ मना रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर को और अधिक विशेष बनाने के लिए सरकार की ओर से एक अभूतपूर्व और दूरगामी पहल की गई है। 26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली भव्य परेड के लिए देशभर से लगभग 10,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। यह निर्णय केवल एक औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि उन असंख्य नागरिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से देश की सेवा की है।
इन विशेष अतिथियों के चयन में समाज के उन वर्गों को प्राथमिकता दी गई है, जो सामान्यतः सुर्खियों में नहीं रहते, लेकिन जिनका योगदान देश की प्रगति की नींव को मजबूत करता है। इसमें किसान, श्रमिक, स्वच्छता कर्मी, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, स्टार्टअप से जुड़े नवोन्मेषी युवा, कारीगर, सामाजिक कार्यकर्ता और जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाले लोग शामिल हैं। इन सभी ने अपनी मेहनत, लगन और नवाचार के बल पर न केवल अपने जीवन को संवारा, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी नई दिशा दी है।
सरकार का यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राष्ट्र निर्माण केवल नीतियों और योजनाओं से नहीं होता, बल्कि आम नागरिकों की भागीदारी से ही सशक्त भारत का सपना साकार होता है। कर्तव्य पथ पर इन विशेष अतिथियों की उपस्थिति गणतंत्र दिवस समारोह को केवल भव्य ही नहीं, बल्कि अधिक मानवीय और प्रेरणादायी भी बनाएगी। यह दृश्य उन लाखों लोगों के लिए संदेश होगा कि ईमानदार प्रयास और कर्तव्यनिष्ठा को देश कभी अनदेखा नहीं करता।
गणतंत्र दिवस भारत के इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। 26 जनवरी 1950 को देश में संविधान लागू हुआ और भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना। यह दिन हमें हमारे संवैधानिक मूल्यों, अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाता है। हर वर्ष कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता, राज्यों की झांकियां और विकास की झलक देखने को मिलती है, जो भारत की एकता और विविधता को सजीव रूप में प्रस्तुत करती है।
इस वर्ष 10,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित करने का निर्णय समावेशी भारत की सोच को मजबूती देता है। यह उन लोगों को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने बिना किसी प्रचार के, चुपचाप लेकिन प्रभावशाली ढंग से देश की सेवा की है। यह पहल न केवल गणतंत्र दिवस समारोहों की परंपरा को नई दिशा देती है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक ऐसा मानक स्थापित करती है, जिसमें राष्ट्र अपने नायकों को पहचानता है और उन्हें सम्मान के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
