नई दिल्ली: देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद घटनापूर्ण रहा। संसद के भीतर तीखे टकराव और अनुशासनात्मक कार्रवाई से लेकर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चाओं और शेयर बाजार की ऐतिहासिक तेजी तक, हर मोर्चे पर हलचल साफ दिखाई दी।
संसद की कार्यवाही मंगलवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। कार्यवाही के दौरान विपक्ष के तीव्र विरोध के बीच कुछ सांसदों द्वारा स्पीकर के आसन की ओर कागज फेंकने की घटना ने सदन की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए। दोपहर में चौथी बार कार्यवाही शुरू होने पर पीठासीन अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी थी कि अनुशासन भंग करने वालों के नाम दर्ज किए जाएंगे। इसके बावजूद शोर-शराबा थमने के बजाय और तेज हो गया।
हालात को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ा रुख अपनाते हुए आठ सांसदों के निलंबन का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। निलंबन की कार्रवाई मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए की गई है। निलंबित सांसदों में डीन कुरियाकोस, किरण रेड्डी, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, मणिकम टैगौर, गुरजीत औजला, हिबी इडेन, वेंकेट रमन और प्रशांत पडोले शामिल हैं। लगातार व्यवधान के चलते लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई और अब इसे बुधवार तक के लिए टाल दिया गया है। कार्रवाई के बाद विपक्ष ने संसद भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए इसे लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास बताया।
इसी बीच भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर संसद में बयान की संभावना भी चर्चा में रही। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस अहम विषय पर सदन को जानकारी देने की उम्मीद जताई गई है। सूत्रों के मुताबिक, मुंबई से दिल्ली लौटने के बाद गोयल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ में कटौती की घोषणा और उसके निहितार्थों पर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद ऐलान किया था कि दोनों देश व्यापार समझौते पर सहमत हो गए हैं। इसके तहत भारतीय उत्पादों पर लगने वाला अमेरिकी टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर कम शुल्क लगना देश के लिए गर्व और खुशी की बात है, और इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को 140 करोड़ भारतीयों की ओर से धन्यवाद दिया।
न्यायिक मोर्चे पर भी मंगलवार को सख्त संदेश देखने को मिला। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट्स में फैसले सुनाने और उन्हें समय पर सार्वजनिक न किए जाने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि समय पर न्याय न मिलना, न्याय से वंचित किए जाने के समान है और यह समस्या अब न्याय व्यवस्था की एक पहचान योग्य बीमारी बन चुकी है। झारखंड हाईकोर्ट से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्देश दिया कि लंबित लिखित फैसला शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। सीजेआई ने साफ शब्दों में कहा कि बहस पूरी होने के बाद फैसलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे को हाईकोर्ट्स के मुख्य न्यायाधीशों की बैठक में उठाया जाएगा, ताकि ऐसी टाली जा सकने वाली देरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के आर्थिक असर पर नजर डालें तो यह डील कई मायनों में अहम मानी जा रही है। एक साल तक चली बातचीत के बाद बनी सहमति के तहत कुल अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत रह गया है। रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ पूरी तरह हटा लिया गया है, जबकि व्यापार घाटा कम करने के उद्देश्य से लगाया गया शुल्क अब 18 प्रतिशत कर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, कृषि, चमड़ा, केमिकल और मशीनरी जैसे सेक्टर्स को इससे सीधा लाभ मिलने की संभावना है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा सेक्टर पहले से ही अमेरिकी टैरिफ के दायरे से बाहर रहे हैं, इसलिए इन पर इस फैसले का सीमित असर पड़ेगा। कुल मिलाकर यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में एक और अहम घटनाक्रम सामने आया, जब कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बोलने से रोके जाने को लेकर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को पत्र लिखा। राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से विपक्ष को वंचित करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि परंपरा के अनुसार दस्तावेज की सभी औपचारिकताओं के बावजूद उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता सहित हर सांसद को सदन में अपनी बात रखने का अधिकार है और इस अधिकार को सीमित करना लोकतंत्र की आत्मा पर आघात है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का सीधा असर मंगलवार को शेयर बाजार में भी देखने को मिला। निवेशकों के बढ़ते भरोसे के बीच बाजार में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 2.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 83,739.13 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 2.55 प्रतिशत चढ़कर 25,727.55 अंक पर पहुंच गया। दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स 5 प्रतिशत से अधिक उछलकर 85,871 के स्तर तक पहुंच गया और निफ्टी ने भी 26,341 का उच्च स्तर छुआ। अमेरिकी टैरिफ में कटौती की घोषणा के बाद विदेशी और घरेलू निवेशकों की सक्रियता बढ़ी, जिसका असर बाजार पर साफ नजर आया। डॉलर के मुकाबले रुपया भी 122 पैसे मजबूत होकर 90.27 पर बंद हुआ और एशियाई मुद्राओं में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बना। अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, रिलायंस और पावर ग्रिड जैसी दिग्गज कंपनियां सेंसेक्स के प्रमुख लाभार्थियों में रहीं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ में कमी से भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी और आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की वापसी की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं।
कुल मिलाकर मंगलवार का दिन संसद की तल्ख राजनीति, न्यायिक चेतावनी और आर्थिक उम्मीदों—तीनों का साक्षी बना, जिसने देश के मौजूदा राजनीतिक-आर्थिक परिदृश्य को एक साथ कई दिशाओं में प्रभावित किया।
