लखनऊ में संघ प्रमुख और प्रदेश नेतृत्व की मुलाकात से सियासी हलचल तेज
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने प्रदेश के दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक से भी अलग अलग मुलाकात की। इन बैठकों को औपचारिक रूप से शिष्टाचार भेंट बताया गया है। हालांकि प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच इन मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है। राजधानी में लगातार हो रही उच्च स्तरीय बैठकों को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार संघ प्रमुख ने दोनों उप मुख्यमंत्रियों से बृहस्पतिवार सुबह करीब दस दस मिनट तक बातचीत की। इससे पहले बुधवार रात करीब आठ बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संघ प्रमुख से मिलने राजधानी के निराला नगर स्थित संघ कार्यालय परिसर में पहुंचे थे। यह मुलाकात सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में एकांत में हुई और करीब पैंतीस मिनट तक चली। बैठक बंद कमरे में हुई थी और आधिकारिक तौर पर किसी तरह के एजेंडे की जानकारी साझा नहीं की गई।
पृष्ठभूमि और मौजूदा राजनीतिक संदर्भ
संघ प्रमुख दो दिवसीय प्रवास पर राजधानी लखनऊ में थे और बुधवार को उनके प्रवास का अंतिम दिन था। इस दौरान संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर आंतरिक बैठकें भी हुईं। मुख्यमंत्री के साथ एकांत में हुई बातचीत को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा समय में प्रदेश की राजनीति में संभावित बदलावों को देखते हुए इस तरह की मुलाकातें संकेत देती हैं कि सरकार और संगठन के बीच समन्वय पर चर्चा हुई होगी। हालांकि आधिकारिक स्तर पर इसे केवल शिष्टाचार भेंट बताया गया है और किसी तरह के निर्णय की पुष्टि नहीं की गई है।
प्रदेश सरकार में लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलें चल रही हैं। संगठन में भी कुछ जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की चर्चा है। ऐसे में मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्रियों से संघ प्रमुख की अलग अलग मुलाकातों को राजनीतिक संदेशों के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इन बैठकों के बाद किसी तरह का औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
संघ और सरकार के बीच समन्वय की परंपरा
प्रदेश की राजनीति में सरकार और संगठन के बीच संवाद की परंपरा नई नहीं है। संघ प्रमुख के उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान मुख्यमंत्री से मुलाकात पहले भी होती रही है। इन मुलाकातों को सामान्यतः समन्वय और संगठनात्मक विषयों से जुड़ा बताया जाता है। इस बार भी आधिकारिक तौर पर यही रुख सामने आया है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि इस तरह की भेंटों का उद्देश्य केवल सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों पर संवाद होता है।
आगामी चुनावी परिदृश्य में अहम मानी जा रही बैठकें
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार संघ प्रमुख का हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश पर विशेष ध्यान रहा है। विभिन्न कार्यक्रमों के बहाने उनका राज्य में आना बढ़ा है। इससे संकेत मिलते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारी पर विचार विमर्श चल रहा है। हालांकि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर किसी तरह की चुनावी रणनीति पर चर्चा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर रणनीतिक बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे में राजधानी लखनऊ में हुई इन उच्च स्तरीय मुलाकातों को व्यापक राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में देखा जा रहा है। फिलहाल सरकार और संगठन की ओर से इसे औपचारिक भेंट बताने के अलावा कोई बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में होने वाले घटनाक्रम इन बैठकों के मायने को और स्पष्ट कर सकते हैं।
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