फीस लेने के बावजूद यूपी बोर्ड में पंजीकरण नहीं, छह छात्राओं का वर्ष प्रभावित, प्रधानाचार्य गिरफ्तार
गंगापुर डबोरा गांव स्थित सहोदरा देवी मेमोरियल इंटर कालेज में कथित फर्जीवाड़े के कारण कक्षा 10 और 12 की कई छात्राओं का एक शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो गया। आरोप है कि छात्राओं से परीक्षा और पंजीकरण के नाम पर फीस वसूलने के बावजूद प्रधानाचार्य कमलेश कुमार ने उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा में उनका पंजीकरण नहीं कराया और परीक्षा फार्म भी नहीं भरा। बुधवार को जब छात्राएं परीक्षा देने पहुंचीं तो उन्हें मुख्य द्वार से ही लौटा दिया गया। इसके बाद छात्राओं ने थाने पहुंचकर प्रधानाचार्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी प्रधानाचार्य को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
फीस में पंजीकरण और फार्म शुल्क शामिल होने का दावा
कालेज की छह छात्राओं ने पुलिस को बताया कि कक्षा 10 के लिए 4500 रुपये और कक्षा 12 के लिए 7200 रुपये शुल्क लिया गया था। प्रधानाचार्य की ओर से कहा गया था कि इस राशि में यूपी बोर्ड में पंजीकरण, परीक्षा फार्म शुल्क और विद्यालय शुल्क शामिल है। इसी भरोसे के आधार पर छात्राएं नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल होती रहीं। एक सप्ताह पहले जब प्रवेश पत्र की मांग की गई तो प्रधानाचार्य टालमटोल करते रहे। मंगलवार तक यह आश्वासन दिया जाता रहा कि परीक्षा कराई जाएगी और प्रवेश पत्र आने वाला है।
परीक्षा के दिन गेट से लौटाया गया
कक्षा 12 की छात्राएं नेहा, प्रियंका और नैंसी तथा कक्षा 10 की चांदनी, कुसुम, मोहिनी और खुशी बुधवार को पहला पेपर देने विद्यालय पहुंचीं। छात्राओं का आरोप है कि प्रधानाचार्य ने उन्हें कालेज परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया। जब इस संबंध में अभिभावकों को बुलाया गया तो उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। घटना के बाद छात्राएं सीधे थाने पहुंचीं और लिखित शिकायत दी।
पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी
भुता थाना प्रभारी रविंद्र कुमार ने बताया कि छात्राओं की तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन ने फीस हड़प ली और फर्जी तरीके से प्रवेश का दावा कर छात्राओं को कक्षाओं में बैठने की अनुमति दी। पुलिस ने प्रधानाचार्य कमलेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपों की विस्तृत जांच की जा रही है और शिक्षा विभाग को भी जानकारी दी गई है।
पूर्व में भी आ चुकी हैं शिकायतें
सहोदरा देवी इंटर कालेज के संबंध में पूर्व में भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इस प्रकरण के बाद शिक्षा अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि पंजीकरण और परीक्षा फार्म से संबंधित लापरवाही या फर्जीवाड़ा साबित होता है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। छात्राओं और उनके अभिभावकों ने मांग की है कि उनके शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए विशेष व्यवस्था की जाए।
सेंट एंड्रूज स्कूल में प्रवेश पत्र विवाद पर प्रदर्शन
इसी बीच चौबारी स्थित सेंट एंड्रूज स्कूल में भी प्रवेश पत्र को लेकर विवाद सामने आया। बारहवीं के तीन छात्रों को फीस जमा न होने के आधार पर प्रवेश पत्र नहीं दिया गया, जिससे वे परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। इस घटना से नाराज होकर छात्रों के समर्थन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विद्यालय का घेराव किया।
परीक्षा का समय निकलने पर बढ़ा आक्रोश
सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के दौरान बुधवार सुबह करीब आठ बजकर तीस मिनट पर सुभाष नगर निवासी एक छात्र अपने दो सहपाठियों के साथ विद्यालय पहुंचा। छात्रों ने प्रबंधन से प्रवेश पत्र देने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। दस बजकर तीस मिनट से परीक्षा शुरू होनी थी, किंतु प्रवेश पत्र न मिलने के कारण वे परीक्षा नहीं दे सके।
विद्यालय में नारेबाजी और पुलिस हस्तक्षेप
प्रकरण की जानकारी मिलते ही विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता प्रांत मंत्री आनंद कठेरिया और विभाग संगठन मंत्री विकास गोला के नेतृत्व में दोपहर करीब बारह बजे विद्यालय पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने प्रधानाचार्य कक्ष में ताला डाल दिया और परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रबंधन और कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक भी हुई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और प्रधानाचार्य को बाहर निकाला।
प्रशासन को सौंपे गए पत्र
इसके बाद छात्र और कार्यकर्ता सुभाषनगर थाना पहुंचे और विद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। देर शाम छात्रों की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षक को शिकायती पत्र सौंपा गया। वहीं विद्यार्थी परिषद की ओर से उपजिलाधिकारी सदर को पत्र देकर तीन दिन के भीतर समाधान की मांग की गई। समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई। प्रदर्शन के दौरान कुनाल मिश्रा, विपिन शर्मा, गौरव गंगवार, सत्यम, आयुष, हर्ष राजपूत और नितिन मिश्रा सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
दोनों मामलों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। जहां एक ओर पंजीकरण न होने से छात्राओं का वर्ष प्रभावित हुआ है, वहीं दूसरी ओर प्रवेश पत्र न मिलने से छात्रों की परीक्षा छूट गई। अब संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई और जांच पर सभी की नजर बनी हुई है।
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