1 मार्च से डिजिटल नियम सख्त, बिना सक्रिय सिम नहीं चलेगा मैसेजिंग ऐप
सरकार का दावा साइबर अपराध और फर्जी खातों पर लगेगी रोक
नई दिल्ली। डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मैसेजिंग ऐप के उपयोग को लेकर नया नियम लागू करने का निर्णय लिया है। एक मार्च से सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को सक्रिय और वैध मोबाइल सिम से लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया है। नए प्रावधान के तहत अब कोई भी उपयोगकर्ता बिना चालू सिम कार्ड के मैसेजिंग सेवाओं का उपयोग नहीं कर सकेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के बाद नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह फैसला तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध, फर्जी अकाउंट और डिजिटल धोखाधड़ी की घटनाओं को रोकने के लिए लिया गया है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें निष्क्रिय या फर्जी सिम के आधार पर अकाउंट बनाकर आपराधिक गतिविधियां संचालित की गईं। सरकार का मानना है कि सक्रिय सिम अनिवार्य करने से हर अकाउंट का सत्यापन मजबूत होगा और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करना आसान होगा।
वेब लॉगिन पर हर छह घंटे में अनिवार्य सत्यापन
नए नियम के तहत यदि किसी उपयोगकर्ता का मोबाइल सिम बंद हो जाता है या निष्क्रिय पाया जाता है तो संबंधित मैसेजिंग अकाउंट की सेवाएं सीमित की जा सकती हैं। ऐसी स्थिति में अकाउंट अस्थायी रूप से निलंबित भी किया जा सकता है जब तक दोबारा सक्रिय सिम से सत्यापन न हो जाए। इसके अतिरिक्त जो उपयोगकर्ता कंप्यूटर या वेब वर्जन के माध्यम से लॉगिन करते हैं उन्हें हर छह घंटे में पुन सत्यापन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। वेब सत्र स्वतः समाप्त हो जाएगा और दोबारा प्रवेश के लिए मोबाइल आधारित पुष्टि आवश्यक होगी।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था सुरक्षा की अतिरिक्त परत के रूप में काम करेगी। अब केवल एक बार क्यूआर कोड स्कैन कर लंबे समय तक वेब लॉगिन बनाए रखना संभव नहीं होगा। हर छह घंटे में मोबाइल की सक्रियता और सिम की वैधता की पुष्टि की जाएगी जिससे अनधिकृत पहुंच की संभावना कम होगी।
टेलीकॉम कंपनियों और प्लेटफॉर्म को निर्देश
दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली संस्थाओं को आवश्यक तकनीकी बदलाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सभी सेवा प्रदाताओं को अपने सिस्टम में ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिससे निष्क्रिय या बंद सिम से जुड़े खातों की पहचान स्वतः हो सके। साथ ही उपयोगकर्ताओं को समय रहते सूचना देने के लिए नोटिफिकेशन प्रणाली भी लागू करनी होगी।
अधिकारियों का कहना है कि सिम सत्यापन प्रक्रिया मजबूत होने से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लिए गए मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। जिन नंबरों का केवाईसी अधूरा है या जो लंबे समय से निष्क्रिय हैं उन्हें नियमित रूप से सक्रिय रखना उपयोगकर्ताओं की जिम्मेदारी होगी।
आम उपयोगकर्ताओं के लिए क्या जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य उपयोगकर्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है। यदि किसी ने हाल ही में मोबाइल नंबर बदला है या सिम लंबे समय से उपयोग में नहीं है तो उसे तुरंत अपडेट कराना चाहिए। जिन लोगों के पास दो सिम वाला फोन है उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस नंबर से मैसेजिंग अकाउंट पंजीकृत है वह सिम सक्रिय रहे।
साइबर सुरक्षा जानकारों का मानना है कि यह कदम डिजिटल पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में सहायक हो सकता है। शुरुआती चरण में उपयोगकर्ताओं को वेब लॉगिन दोबारा करने जैसी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में इससे अकाउंट हैकिंग और फर्जी प्रोफाइल के मामलों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार ने संकेत दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहचान की पुष्टि अब प्राथमिक शर्त होगी। एक मार्च से लागू हो रही व्यवस्था के बाद बिना सक्रिय सिम के मैसेजिंग सेवाओं का उपयोग संभव नहीं रहेगा। ऐसे में उपयोगकर्ताओं को समय रहते अपने मोबाइल नंबर और सिम की स्थिति की जांच कर लेनी चाहिए ताकि नई प्रणाली के लागू होने पर किसी प्रकार की बाधा न आए।
LATEST NEWS