मंगेश यादव एनकाउंटर मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का प्रार्थना पत्र खारिज
सुलतानपुर के बहुचर्चित मंगेश यादव एनकाउंटर मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सहित पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज कराने की मांग को निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता यादव की अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि मजिस्ट्रियल जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि मंगेश यादव की मृत्यु पुलिस मुठभेड़ में हुई थी।
मां ने लगाया था फर्जी मुठभेड़ का आरोप
मामले में जौनपुर जिले के बक्शा थाना क्षेत्र के अगरौला गांव निवासी शीला देवी ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनके बेटे मंगेश यादव को घर से उठाकर फर्जी मुठभेड़ में मार दिया। शिकायत में कहा गया कि दो सितंबर 2024 को चार से पांच पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और मंगेश यादव को पूछताछ के नाम पर अपने साथ ले गए।
शीला देवी के अनुसार तीन और चार सितंबर की रात बक्शा पुलिस उनके घर पहुंची और उनसे जबरन यह बयान दिलवाया गया कि मंगेश पिछले दो से तीन महीनों से घर पर नहीं था। इस दौरान पुलिस ने वीडियो बनाकर यह दिखाने की कोशिश की कि मंगेश का परिवार उसके ठिकाने के बारे में अनभिज्ञ है।
पांच सितंबर को मिला मौत का समाचार
परिजनों का आरोप था कि पांच सितंबर को पुलिस की ओर से सूचना दी गई कि सुलतानपुर के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर मंगेश का शव ले जाएं। परिवार का कहना था कि पुलिस ने उसे डकैती के एक मामले में आरोपी बनाकर घर से उठाया और बाद में फर्जी मुठभेड़ दिखाकर उसकी हत्या कर दी।
शीला देवी ने अदालत से मांग की थी कि तत्कालीन सुलतानपुर एसपी सोमेन वर्मा सहित पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि मुठभेड़ की मजिस्ट्रियल जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती, इसलिए न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप करे।
कोर्ट ने मांगी थी विस्तृत जांच रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की थी। इसके बाद विशेष कार्यबल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से अदालत में जांच आख्या प्रस्तुत की गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार जिलाधिकारी सुलतानपुर के आदेश पर उप जिलाधिकारी विदुषी सिंह द्वारा मजिस्ट्रियल जांच कराई गई थी। इस जांच के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई।
मजिस्ट्रियल जांच में मुठभेड़ की पुष्टि
जांच रिपोर्ट में बताया गया कि गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि मंगेश यादव की मृत्यु पुलिस मुठभेड़ के दौरान हुई थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि मृतक की मां शीला देवी और बहन प्रिंसी की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे पुलिस पर लगाए गए फर्जी मुठभेड़ के आरोपों की पुष्टि हो सके।
अदालत ने प्रार्थना पत्र किया निरस्त
सभी तथ्यों और जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता यादव की अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही मजिस्ट्रियल जांच में भी पुलिस मुठभेड़ की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और षड्यंत्र का मामला दर्ज कराने का आधार नहीं बनता।
इसी आधार पर अदालत ने शीला देवी द्वारा दायर प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया। इस फैसले के साथ फिलहाल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग खारिज हो गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
मंगेश यादव एनकाउंटर का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में काफी चर्चा में रहा था। मृतक के परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे, जबकि पुलिस का कहना था कि वह एक आपराधिक मामले में वांछित था और मुठभेड़ के दौरान उसकी मृत्यु हुई। अदालत के ताजा फैसले के बाद इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को न्यायिक स्तर पर राहत मिलती हुई दिखाई दे रही है।
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