मध्य प्रदेश में फर्जी सिमकार्ड रैकेट का खुलासा, 135 चेहरों के नाम पर 36,668 सिम सक्रिय
मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिमकार्ड जारी करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। साइबर पुलिस ने इस मामले में विशेष अभियान ‘ऑपरेशन फेस’ शुरू किया है। जांच में सामने आया है कि प्रदेश के 33 जिलों में 135 लोगों की फोटो और पहचान का इस्तेमाल कर कुल 36,668 सिमकार्ड सक्रिय किए गए। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और इसमें शामिल पॉइंट ऑफ सेल एजेंटों तथा अन्य लोगों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
दूरसंचार विभाग से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के बाद यह बड़ा खुलासा हुआ है। साइबर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में एक ही व्यक्ति की फोटो का इस्तेमाल कर अलग-अलग पहचान पत्रों के आधार पर हजारों सिमकार्ड सक्रिय कर दिए गए। यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से प्रदेश के कई जिलों में संचालित किया जा रहा था।
33 जिलों में फैला था फर्जी सिम का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह फर्जीवाड़ा केवल राजधानी भोपाल तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर किया जा रहा था। साइबर पुलिस के अनुसार प्रदेश के 33 जिलों में कुल 135 ऐसे चेहरे चिन्हित किए गए हैं, जिनकी फोटो का इस्तेमाल कर हजारों सिमकार्ड जारी किए गए। कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर 50 से अधिक सिमकार्ड सक्रिय पाए गए हैं।
दूरसंचार विभाग के आंकड़ों के मुताबिक गुना जिले में सबसे बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक ही फोटो के आधार पर 3,760 सिमकार्ड सक्रिय पाए गए। इसके बाद सतना जिले में 2,870 और मुरैना में 2,714 सिमकार्ड एक ही तस्वीर के आधार पर जारी किए गए। इसके अलावा बैतूल, भोपाल और इंदौर जैसे बड़े जिलों में भी बड़ी संख्या में फर्जी सिमकार्ड जारी होने के मामले सामने आए हैं।
नियमों की अनदेखी कर जारी किए गए सिम
दूरसंचार नियमों के अनुसार किसी भी व्यक्ति के नाम पर अधिकतम नौ सिमकार्ड ही जारी किए जा सकते हैं। लेकिन जांच में पाया गया कि कई पीओएस एजेंटों ने नियमों की अनदेखी करते हुए फर्जी दस्तावेजों और बदली हुई पहचान के जरिए बड़ी संख्या में सिमकार्ड सक्रिय कर दिए। इसके लिए फोटो और पहचान पत्रों में हेरफेर कर अलग-अलग पहचान बनाई गई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस तरह के फर्जी सिमकार्ड अक्सर साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाते हैं। इसलिए इस नेटवर्क को खत्म करना बेहद जरूरी है।
पांच सप्ताह तक चलेगा ‘ऑपरेशन फेस’
साइबर पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क की जांच के लिए ‘ऑपरेशन फेस’ नाम से विशेष अभियान शुरू किया है। यह अभियान अगले पांच सप्ताह तक चलाया जाएगा। इस दौरान संदिग्ध सिमकार्ड, उनसे जुड़े लोगों और सिम जारी करने वाले एजेंटों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
साइबर पुलिस मुख्यालय के आईजी शियास मजीद ने बताया कि जांच को तेज किया गया है और उन पीओएस एजेंटों को चिन्हित किया जा रहा है जिन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए बड़ी संख्या में सिमकार्ड जारी किए। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि फर्जी सिमकार्ड के जरिए साइबर अपराधों को अंजाम देना आसान हो जाता है। ऐसे में इस तरह के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई कर साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
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