सैयदराजा के भीम बाबा मंदिर में विवाद, नाम ढकने पर सभासद शिवा साव का विरोध
चंदौली, सैयदराजा
अरविन्द कुमार की रिपोर्ट : सैयदराजा स्थित भीम बाबा मंदिर में हाल ही में हुए घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर विवाद का रूप ले लिया है। मंदिर परिसर में लगे शिलालेखों, फोटो बैनरों या नाम पट्टिकाओं को ढकने या हटाने की कार्रवाई को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब वार्ड सभासद शिवा साव ने मंदिर परिसर का दौरा कर बात चित मे बताया मंदिर समिति के लोगों की कड़ी आलोचना की।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, भीम बाबा मंदिर समिति द्वारा परिसर में लगे कुछ नामों और फोटो बैनरों को ढकने या मिटाने का कार्य किया गया है। ये नाम उन व्यक्तियों या जनप्रतिनिधियों से जुड़े बताए जा रहे हैं जिन्होंने मंदिर के विकास कार्यों में योगदान दिया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस तरह नामों को हटाना या ढकना न केवल परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि यह उन लोगों के सम्मान को भी ठेस पहुंचाता है जिनका मंदिर से जुड़ा योगदान रहा है।
सभासद शिवा साव ने जताया कड़ा विरोध
वार्ड सभासद शिवा साव ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और एक वीडियो संदेश जारी किया। अपने बयान में उन्होंने कहा कि “नाम को ढक देने से चरित्र को नहीं ढका जा सकता।” उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर समिति ने द्वेषपूर्ण भावना या किसी विशेष मंशा के तहत यह कार्रवाई की है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने मंदिर के विकास में योगदान दिया, उनके नामों को इस तरह छिपाना न केवल गलत है बल्कि यह आस्था के साथ खिलवाड़ भी है। शिवा साव ने इसे सरकारी कार्यों और सार्वजनिक योगदान का अपमान बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। कई स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग का प्रतीक भी है। ऐसे में वहां लगे नामों को हटाना या ढकना समाज में गलत संदेश देता है।
मंदिर समिति की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं
इस पूरे विवाद पर अभी तक मंदिर समिति की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि समिति ने किसी प्रशासनिक या आंतरिक कारण से यह कदम उठाया हो सकता है।
मामले में आगे क्या
विवाद के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि मामला और तूल पकड़ता है तो स्थानीय प्रशासन या संबंधित विभाग हस्तक्षेप कर सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि मंदिर समिति इस पर क्या स्पष्टीकरण देती है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
भीम बाबा मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है, ऐसे में इससे जुड़े किसी भी विवाद का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है।
LATEST NEWS