वाराणसी/चंदौली: में वेतन संकट से जूझते वन विभाग के दैनिक कर्मचारी सड़क पर रामनगर कार्यालय पर धरना जारी
वाराणसी/चंदौली: वन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का लंबे समय से लंबित वेतन का मुद्दा अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। प्रशासनिक उदासीनता और वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी से परेशान कर्मचारियों ने सोमवार को रामनगर स्थित वन विभाग के प्रभागीय कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। सुबह से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन देर शाम तक जारी रहा और इसमें बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। कर्मचारियों के नारों और उनकी मांगों से स्पष्ट था कि वे अब किसी ठोस समाधान के बिना पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत शुरू हुआ आंदोलन
दिनांक 20 अप्रैल 2026 को आयोजित इस धरने का नेतृत्व जिला अध्यक्ष महेंद्र यादव ने किया। कार्यक्रम पहले से तय था और इसमें काशी वन्यजीव प्रभाग से जुड़े पदाधिकारी और दैनिक कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपने बकाया वेतन के भुगतान और नियमितीकरण की मांग को प्रमुखता से उठाया।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कई महीनों से नियमित वेतन नहीं मिल रहा है जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों ने बताया कि बार बार मांग उठाने के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
धरने के दौरान कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं किया जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मंच से वक्ताओं ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा दैनिक कर्मचारियों का शोषण और उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब यह स्थिति असहनीय हो चुकी है और कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
वक्ताओं ने यह भी चेतावनी दी कि यदि जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं लेकिन अगर अनदेखी जारी रही तो विरोध और तेज किया जाएगा।
धरने में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल
धरने में शामिल कर्मचारियों में रामनिहोर बशीर रामजनम राजेश कुमार रघु शम्भू लालसाहब बाबूनदर बाबूलाल कमलेश रजिन्दर सुरेश गुलाब सुदामा उषा सरस्वती सीमा और कलावती सहित कई अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। महिला और पुरुष दोनों वर्ग के कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी समस्याएं रखीं और सरकार से न्याय की मांग की।
नेतृत्व ने कहा यह सम्मान और अधिकार की लड़ाई
जिला अध्यक्ष महेंद्र यादव ने बताया कि यह धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और कर्मचारी कार्यालय के बाहर बैठकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल वेतन की नहीं बल्कि सम्मान और अधिकारों की भी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं होगा तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।
पृष्ठभूमि और प्रशासनिक चुनौती
वन विभाग में कार्यरत दैनिक कर्मचारियों की स्थिति लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। नियमित वेतन और सेवा शर्तों को लेकर बार बार सवाल उठते रहे हैं लेकिन स्थायी समाधान अब तक सामने नहीं आ सका है। रामनगर का यह धरना उसी लंबे संघर्ष का एक हिस्सा बनकर सामने आया है।
यह आंदोलन अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह उस व्यापक समस्या को उजागर कर रहा है जिसमें मेहनतकश कर्मचारी अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है यह महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इस धरने की गूंज अब अन्य क्षेत्रों तक भी पहुंच रही है।
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