हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ, गुरु बने राजा और मंगल मंत्री
विवेक तिवारी की रिपोर्ट : हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ हो गया है। इस नवसंवत्सर का नाम ‘रौद्र’ रखा गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष सौर मंडल की सत्ता में परिवर्तन हुआ है, जिसमें गुरु बृहस्पति को राजा तथा मंगल को मंत्री का पद प्राप्त हुआ है। वहीं चंद्रमा को मेघेश का दायित्व सौंपा गया है, जिसके चलते वर्षभर के फलादेश को लेकर ज्योतिषाचार्यों ने विभिन्न संभावनाएं व्यक्त की हैं।
गंगा घाटों और मंदिरों में श्रद्धा का उमड़ा सैलाब
नवसंवत्सर के अवसर पर गुरुवार की भोर में सूर्य उदय के साथ ही देशभर में उत्साह का माहौल देखने को मिला। काशी सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों, मंदिरों और घरों की छतों से भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर नववर्ष का स्वागत किया। वेदों की ऋचाओं और मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
भारत में विकास और कूटनीतिक मजबूती के संकेत
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गुरु के राजा होने से भारत में विकास कार्यों को गति मिलने की संभावना है। केंद्र और राज्य स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संकेत मिल रहे हैं। कूटनीतिक दृष्टि से भी भारत की स्थिति मजबूत रह सकती है और आतंकवाद तथा असामाजिक तत्वों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाने की संभावना है।
वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के संकेत
बीएचयू के प्रो. विनय पांडेय के अनुसार, विश्व स्तर पर कुछ देशों में प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बनी रह सकती है। रूस, जापान, चीन, फिलीपींस और ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में भूकंप, भूस्खलन या चक्रवात जैसी घटनाएं जन-धन को प्रभावित कर सकती हैं। वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव के साथ महंगाई भी आम जनता पर असर डाल सकती है।
कृषि और व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत
शुक्र के सस्येश होने से इस वर्ष अच्छी वर्षा और कृषि उत्पादन के बेहतर रहने की संभावना जताई गई है। गेहूं, धान, ईख और अन्य फसलों का उत्पादन संतोषजनक रह सकता है। साथ ही वृक्षों में फल-फूल की प्रचुरता रहेगी, जिससे किसानों और व्यापारियों को लाभ मिल सकता है।
मंगल मंत्री होने से सावधानी की जरूरत
ज्योतिषीय दृष्टि से मंगल के मंत्री होने के कारण चोरी और रोग से संबंधित समस्याओं में वृद्धि की आशंका भी व्यक्त की गई है। ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति सजग रहने की सलाह दी गई है।
अधिक वर्षा और सुख-समृद्धि के संकेत
चंद्रमा के मेघेश होने से इस वर्ष अच्छी वर्षा होने की संभावना है, जिससे जल स्रोतों में वृद्धि होगी और कृषि को लाभ मिलेगा। इससे प्रजा के सुखी रहने और शासकों के संतुष्ट रहने के संकेत मिलते हैं।
समग्र रूप से देखा जाए तो विक्रम संवत 2083 मिश्रित परिणाम देने वाला वर्ष माना जा रहा है, जिसमें जहां एक ओर विकास और समृद्धि के संकेत हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है।
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