बिहार में ‘नीतीश मॉडल’ पर सियासी विवाद, भाजपा प्रवक्ता के पोस्ट से मचा घमासान
बिहार की राजनीति में ‘नीतीश मॉडल’ को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया, जब भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी हलचल बढ़ा दी। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने अपना पोस्ट हटाकर स्पष्ट किया कि राज्य में आगे भी नीतीश मॉडल के तहत ही शासन चलता रहेगा।
सम्राट चौधरी की प्रशंसा से शुरू हुआ विवाद
नीरज कुमार ने अपने पोस्ट में बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी की कानून व्यवस्था सुधारने और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रशंसा की थी। उन्होंने इसे ‘सम्राट और योगी मॉडल’ से जोड़कर पेश किया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई।
पोस्ट सामने आते ही इसे बिहार में नए शासन मॉडल के संकेत के रूप में देखा जाने लगा, जिससे सहयोगी दलों और विपक्ष के बीच प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।
विवाद बढ़ने पर पोस्ट हटाया, दी सफाई
विवाद बढ़ता देख नीरज कुमार ने अपना पोस्ट हटा लिया और एक वीडियो जारी कर सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में शासन नीतीश कुमार के स्थापित मॉडल के अनुसार ही चलता रहेगा और उसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा।
सहयोगी दलों ने भी ‘नीतीश मॉडल’ का किया समर्थन
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार के बाद जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उसे उनके पदचिह्नों पर चलना होगा, अन्यथा वह टिक नहीं पाएगा।
वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा ने भी कहा कि बिहार में किसी अन्य राज्य का मॉडल लागू नहीं हो सकता। उन्होंने नीतीश मॉडल को सर्वस्वीकार्य और प्रभावी बताया।
जदयू नेताओं ने मॉडल की सराहना की
जदयू कोटे के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि वर्ष 2005 के बाद से बिहार का शासन नीतीश मॉडल पर ही आधारित है और इसकी देश-विदेश में सराहना हो रही है।
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार (एमएलसी) ने भी स्पष्ट किया कि राज्य में किसी मंत्री का अलग मॉडल नहीं है। सभी मंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और उनके सुशासन मॉडल के तहत ही कार्य कर रहे हैं।
नीतीश मॉडल को बताया अनुकरणीय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार ने बिहार में सुशासन का एक ऐसा मॉडल स्थापित किया है, जिसे अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण के रूप में देखा जाता है। कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधारों के चलते इस मॉडल को व्यापक पहचान मिली है।
फिलहाल इस पूरे विवाद के बाद एनडीए के भीतर यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई है कि बिहार में शासन व्यवस्था आगे भी नीतीश मॉडल के अनुरूप ही संचालित होगी।
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