वाराणसी में ईद-उल-फितर का त्योहार उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया गया
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : वाराणसी में ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह, श्रद्धा और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। पाक रमजान के मुकम्मल होने के बाद शहर के हजारों रोजेदारों ने ईदगाहों और मस्जिदों में एक साथ नमाज अदा कर अल्लाह की बारगाह में सिर झुकाया और अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली की दुआएं मांगीं। सुबह से ही शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों में विशेष चहल-पहल देखने को मिली। हर तरफ ईद की खुशियां और रौनक बिखरी नजर आई।
ईदगाहों और मस्जिदों में उमड़ी भारी भीड़
सुबह की पहली किरण के साथ ही लोग गुस्लो-फरागत कर नए और साफ कपड़े पहनकर ईदगाहों और मस्जिदों की ओर निकल पड़े। सफेद कपड़ों में सजे रोजेदारों के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी बड़े उत्साह के साथ नमाज के लिए पहुंचे। शहर की प्रमुख ईदगाहों और मस्जिदों में नमाजियों की लंबी कतारें लग गईं। हर तरफ अल्लाहु अकबर की सदाएं गूंजती रहीं।
नमाज के दौरान सभी लोग एक साथ कतार में खड़े होकर बिना किसी भेदभाव के इबादत करते नजर आए। यह दृश्य सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक बना। नमाज के बाद लोगों ने गले मिलकर एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी।
ज्ञानवापी और जामा मस्जिद में विशेष व्यवस्था
ज्ञानवापी मस्जिद में भी हजारों नमाजियों ने पारंपरिक तरीके से ईद की नमाज अदा की। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। नमाजियों को एक कतार में गेट नंबर चार से प्रवेश दिया गया, जिससे व्यवस्था सुचारू बनी रही।
वहीं नदेसर स्थित जामा मस्जिद में नमाजियों की संख्या अधिक होने के कारण मस्जिद परिसर पूरी तरह भर गया। इसके बाद पहुंचे लोगों ने मस्जिद की सीढ़ियों पर नमाज अदा की। प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए कहीं भी सड़क पर नमाज नहीं पढ़ी गई, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित नहीं हुई।
खुत्बे में दी गई इस्लाम के पांच स्तंभों की सीख
नमाज के बाद पेश इमामों ने खुत्बा दिया, जिसमें रमजान के रोजों, नमाज, जकात, हज और कलमा जैसे इस्लाम के पांच मूल स्तंभों की अहमियत पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने रोजेदारों को नेक रास्ते पर चलने, गरीबों की मदद करने और समाज में भाईचारा बनाए रखने की सीख दी।
फितरा और सदका बांटकर निभाई सामाजिक जिम्मेदारी
ईद की नमाज के बाद लोगों ने गरीबों, यतीमों और जरूरतमंदों के बीच फितरा और सदका बांटा। यह परंपरा समाज में समानता और सहानुभूति को बढ़ावा देती है। रोजेदारों ने अपनी नेकियों के बदले अल्लाह का शुक्र अदा किया और जरूरतमंदों के साथ खुशियां साझा कीं।
घर-घर में सजी मिठास, रिश्तों में बढ़ी गर्मजोशी
नमाज के बाद घरों में मीठी सेवइयां, शाही टुकड़ा और अन्य पारंपरिक व्यंजन तैयार किए गए। दिन भर मेहमानों के आने-जाने का सिलसिला चलता रहा। लोग एक-दूसरे के घर जाकर ईद की बधाई देते रहे, जिससे आपसी रिश्तों में और मजबूती आई।
खासकर बच्चों में ईद का उत्साह देखते ही बन रहा था। नए कपड़े पहनकर और ईदी पाकर उनकी खुशी दोगुनी हो गई। बाजारों और गलियों में भी त्योहार की रौनक पूरे दिन बनी रही।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। शहर के प्रमुख चौराहों, मस्जिदों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा। वरिष्ठ अधिकारी लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लेते रहे।
कुल मिलाकर वाराणसी में ईद-उल-फितर का त्योहार पारंपरिक उल्लास, धार्मिक आस्था और सामाजिक सौहार्द के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते हुए भाईचारे और एकता का संदेश दिया।
LATEST NEWS