प्रयागराज-कौशांबी में यमुना किनारे अवैध खनन का साम्राज्य, 11 वैध घाटों के मुकाबले 40 स्थानों पर माफिया सक्रिय
प्रयागराज से कौशांबी तक यमुना नदी का किनारा इन दिनों अवैध खनन के बड़े केंद्र के रूप में उभर कर सामने आया है। खनन विभाग द्वारा जहां केवल 11 घाटों को वैध पट्टा देकर बालू खनन की अनुमति दी गई है, वहीं वास्तविकता यह है कि करीब 40 स्थानों पर खुलेआम अवैध खनन का कार्य जारी है। यानी नियमों से लगभग तीन गुना अधिक स्थानों पर बिना किसी रोक-टोक के बालू निकाली जा रही है, जिससे सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हर दिन 55 लाख घन फीट बालू की निकासी, राजस्व को भारी नुकसान
जानकारी के अनुसार, यमुना नदी से प्रतिदिन लगभग 55 लाख घन फीट बालू अवैध रूप से निकाली जा रही है। इस अवैध खनन में करीब 600 से अधिक नावें और 300 ट्रैक्टर-ट्रक लगे हुए हैं, जो दिन-रात इस काम में जुटे हैं। इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है, क्योंकि वैध खनन से मिलने वाली रॉयल्टी अब माफियाओं के सिंडिकेट के जरिए उनकी जेब में जा रही है।
अवैध खनन के इस नेटवर्क में कथित तौर पर पर्ची सिस्टम भी लागू है, लेकिन यह पर्ची सरकारी नहीं बल्कि माफिया द्वारा जारी की जाती है। इस सिस्टम के जरिए बालू के परिवहन और बिक्री को नियंत्रित किया जाता है, जिससे पूरे नेटवर्क का संचालन व्यवस्थित ढंग से होता है।
गंगा, टोंस और बेलन नदियां भी हो रहीं प्रभावित
खनन माफिया केवल यमुना नदी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि गंगा, टोंस और बेलन नदियों में भी बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। छोटी नदियों में भी मशीनों और नावों के जरिए बालू निकाली जा रही है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अनियंत्रित खनन से नदियों की प्राकृतिक धारा प्रभावित होती है और भूजल स्तर पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
रात में तेज होता है अवैध परिवहन, वसूली के आरोप
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शाम ढलते ही अवैध खनन से निकाले गए बालू का परिवहन तेज हो जाता है। ट्रकों, डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रालियों के जरिए बड़े पैमाने पर बालू की ढुलाई की जाती है। आरोप है कि विभिन्न थाना क्षेत्रों में इस अवैध परिवहन से वसूली के लिए कथित तौर पर लोग तैनात किए गए हैं, जो वाहनों से अवैध रूप से पैसा वसूलते हैं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा तंत्र संगठित तरीके से काम कर रहा है और प्रशासन की भूमिका संदिग्ध नजर आती है।
प्रमुख क्षेत्रों में धड़ल्ले से जारी खनन
यमुना नदी में नैनी, घूरपुर और लालापुर थाना क्षेत्रों के कई गांवों में बालू का अवैध खनन किया जा रहा है। मड़ौका, बसवार, मोहब्बतगंज, कंजासा, बिरवल, मझियारी और अमिलिया जैसे क्षेत्रों में नदी के भीतर से लगातार बालू निकाली जा रही है।
इसी तरह गंगा नदी में भी करछना, मेजा, हंडिया और फूलपुर क्षेत्रों के कई गांवों में खनन जारी है। इसके अलावा कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर बालू का अवैध भंडारण भी किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कार्य संगठित गिरोह के तहत संचालित हो रहा है।
कार्रवाई में भी सामने आई अनियमितताएं
खनन विभाग द्वारा कुछ स्थानों पर कार्रवाई की गई है, लेकिन इसमें भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। घूरपुर थाने में दर्ज दो मामलों में वादी के नाम और जन्म वर्ष में अंतर पाया गया, जिसे बाद में विभाग ने लिपिकीय त्रुटि बताया।
पहले मामले में वादी के रूप में खान निरीक्षक वैभव कुमार सोनी का नाम दर्ज किया गया, जबकि दूसरे मामले में भिन्न नाम और जन्म वर्ष दर्शाया गया। इस तरह की त्रुटियां जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाती हैं।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
अवैध खनन के इतने बड़े पैमाने पर चलने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई का अभाव प्रशासन की निष्क्रियता को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो नदियों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित खनन से नदी की संरचना, जल प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। इससे भविष्य में बाढ़, भूमि कटाव और जल संकट जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध खनन के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाए और इसमें शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही, खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने की भी आवश्यकता बताई जा रही है।
यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में इसका असर न केवल पर्यावरण बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर भी गंभीर रूप से पड़ेगा।
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