लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास न होने पर सियासत तेज, भाजपा ने विपक्ष को घेरा, विपक्ष ने बताया चुनावी रणनीति
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास न हो पाने के बाद देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वाराणसी समेत पूर्वांचल के राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को लोकतंत्र का काला दिन बताते हुए विपक्ष को महिला विरोधी करार दिया है, वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इसे चुनावी लाभ के लिए उठाया गया कदम बताया है।
भाजपा का आरोप: विपक्ष ने साजिश कर बिल रोका
भाजपा नेताओं का कहना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा में जानबूझकर पास नहीं होने दिया गया। पार्टी से जुड़े नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं ने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन बताया। उनका आरोप है कि विपक्ष महिलाओं को उनका अधिकार देने के पक्ष में नहीं है और उसने राजनीतिक कारणों से इस महत्वपूर्ण विधेयक को रोक दिया।
एमएलसी धर्मेंद्र राय ने कहा कि विरोधी दलों ने साजिश के तहत बिल को पारित नहीं होने दिया, जो लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है। उन्होंने कहा कि इससे विपक्ष की नीयत देश की जनता के सामने आ गई है और यह स्पष्ट हो गया है कि वे महिलाओं के सशक्तीकरण के खिलाफ हैं।
महिला सशक्तीकरण के लिए अहम कदम: अनुप्रिया पटेल
केंद्रीय परिवार कल्याण राज्य मंत्री और सांसद अनुप्रिया पटेल ने बिल पास न होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता था। यदि इसे पारित कर दिया जाता, तो देश की महिलाओं को उनका वास्तविक हक मिलता और राजनीति में उनकी भागीदारी और मजबूत होती।
विपक्ष का पलटवार: चुनावी चाल बताया
वहीं, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि भाजपा का यह बिल केवल दिखावटी है और इसका उद्देश्य महिलाओं को भ्रमित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग वास्तव में महिलाओं का सम्मान नहीं करते, वे नारी वंदन की बात कर रहे हैं, जो पूरी तरह से विरोधाभासी है।
सपा सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि वर्ष 2023 में ही सभी दलों की सहमति से यह बिल पास हो चुका था, लेकिन भाजपा ने इसे लागू नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भाजपा वास्तव में महिला सशक्तीकरण के प्रति गंभीर है, तो उस समय इसे लागू क्यों नहीं किया गया।
चुनावी राजनीति से जोड़कर देख रहा विपक्ष
चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने जल्दबाजी में इस मुद्दे को उठाया है। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि केवल राजनीतिक लाभ के लिए बिल लाया जाएगा, तो उसे सदन में समर्थन नहीं मिलेगा।
भाजपा की महिला नेताओं ने बताया काला दिन
भाजपा से जुड़ी महिला नेताओं ने महिला आरक्षण बिल पास न होने को महिलाओं के अधिकारों के लिए एक बड़ा झटका बताया है। भाजपा नेता शालिनी यादव ने कहा कि पिछले तीन दशकों से महिलाएं इस आरक्षण का इंतजार कर रही थीं, लेकिन विपक्ष ने इसे फिर से टाल दिया। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं के लिए काला दिन करार दिया।
जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई और कहा कि यह महिलाओं को आगे बढ़ाने का एक बड़ा अवसर था, जिसे गंवा दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले चुनावों में महिलाएं इस मुद्दे को ध्यान में रखकर मतदान करेंगी।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच मूल मुद्दा पीछे
महिला आरक्षण बिल को लेकर चल रही इस राजनीतिक खींचतान में अब मूल मुद्दा पीछे छूटता नजर आ रहा है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर देख रहा है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति बता रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अब केवल सामाजिक या संवैधानिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन चुका है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मुद्दे पर सभी दल सहमति बनाकर महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में कदम उठाते हैं या यह विषय इसी तरह सियासी आरोप-प्रत्यारोप में उलझा रहेगा।
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