Fri, 02 Jan 2026 11:22:15 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ यौन शोषण, जबरन गर्भपात और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के मामले ने अब बेहद गंभीर रूप ले लिया है। आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज मलिक के खिलाफ पुलिस और कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस द्वारा जिला न्यायालय में दिए गए आवेदन पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब आरोपी घटना के बाद से लगातार फरार चल रहा है और पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक गिरफ्त से बाहर है।
डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव ने मामले की प्रगति साझा करते हुए बताया कि पुलिस की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है। बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच पीड़ित महिला डॉक्टर का मजिस्ट्रेट के समक्ष कलमबंद बयान (धारा 164) दर्ज कराया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने अपनी आपबीती सुनाते हुए एफआईआर में लगाए गए सभी गंभीर आरोपों को दोहराया है। उसने विस्तार से बताया कि कैसे शादी का झांसा देकर उसका शारीरिक शोषण किया गया और बाद में धर्म परिवर्तन के लिए ब्लैकमेल किया जाने लगा। मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान के बाद अब आरोपी डॉक्टर की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
आरोपी डॉ. रमीज मलिक की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। पुलिस की तीन विशेष टीमें आरोपी की तलाश में दिन-रात एक किए हुए हैं। रमीज की लोकेशन ट्रेस करने के लिए पुलिस ने न केवल उत्तर प्रदेश के बरेली बल्कि उत्तराखंड के खटीमा समेत कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी है, लेकिन अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं। जांच अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि आरोपी का मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहा है, जिससे उसकी सटीक इलेक्ट्रॉनिक लोकेशन नहीं मिल पा रही है। ऐसे में पुलिस ने अब पारंपरिक मुखबिर तंत्र और रमीज के करीबियों व रिश्तेदारों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लेकर अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
चौक कोतवाली के इंस्पेक्टर नागेश उपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि पुलिस प्रशासन इस मामले में अब सख्त कार्रवाई के मूड में है। उन्होंने बताया कि गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद आरोपी को सरेंडर करने के लिए बाध्य किया जाएगा। यदि इसके बावजूद डॉ. रमीज पुलिस की गिरफ्त में नहीं आता है, तो कोर्ट के आदेशानुसार उसके खिलाफ कुर्की की विधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। प्रशासन का यह कड़ा रुख संदेश देता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध और धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
आपको बताते चले, कि यह पूरा प्रकरण विश्वासघात और साजिश की एक दर्दनाक दास्तान है। केजीएमयू की ही एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने डॉ. रमीज मलिक पर आरोप लगाया था कि दोनों के बीच पहले दोस्ती थी, जिसका फायदा उठाते हुए अगस्त माह में रमीज उसके किराये के कमरे पर पहुंचा और शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता के अनुसार, सितंबर में जब उसे अपने गर्भवती होने का पता चला, तो रमीज ने धोखे से दवा खिलाकर उसका गर्भपात करा दिया।
मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब पीड़िता को पता चला कि रमीज पहले से शादीशुदा है और उसने एक हिंदू लड़की का धर्म परिवर्तन करवाकर उससे निकाह किया था। जब पीड़िता ने इस झूठ पर विरोध जताया, तो रमीज ने उस पर भी धर्म बदलने का दबाव बनाना शुरू कर दिया और ब्लैकमेल करने लगा। इस मानसिक प्रताड़ना और धोखे से टूटकर पीड़िता ने 17 दिसंबर की सुबह दवाओं की ओवरडोज लेकर आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसके बाद यह पूरा मामला प्रकाश में आया।