बलरामपुर में 205 ग्राम पंचायतों में बनेंगी डिजिटल लाइब्रेरी, युवाओं को गांव में ही मिलेगी पढ़ाई की सुविधा
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में ग्रामीण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। जिले की 205 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं, जिससे गांवों में रहने वाले युवाओं और छात्रों को आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। इस योजना का उद्देश्य छात्रों को शहरों की ओर पलायन से रोकना और उन्हें स्थानीय स्तर पर बेहतर अध्ययन सुविधाएं प्रदान करना है।
प्रबंध समितियों का होगा गठन
डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना से पहले प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक प्रबंध समिति का गठन किया जाएगा। जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया उपाध्याय ने बताया कि यह समिति लाइब्रेरी के संचालन, रखरखाव और उपयोग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संभालेगी।
समिति में ग्राम प्रधान को अध्यक्ष, सचिव को उपाध्यक्ष और पंचायत सहायक को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। इसके अलावा ग्राम सभा के प्रतिष्ठित पुरुष और महिला सदस्य, शिक्षित एवं अनुभवी व्यक्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं और स्नातक तथा परास्नातक युवा सदस्य के रूप में शामिल किए जाएंगे।
पारदर्शिता के लिए सार्वजनिक होगी जानकारी
समिति के सभी सदस्यों के नाम और मोबाइल नंबर पंचायत भवन की दीवार पर अंकित किए जाएंगे। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और आम लोगों को भी इसकी जानकारी मिल सकेगी। सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि एक सप्ताह के भीतर समिति का गठन कर इसकी सूचना जिला स्तर के व्हाट्सएप समूह में साझा करें।
7.63 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही परियोजना
पहले चरण में 7 करोड़ 63 लाख रुपये की लागत से 205 पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। अब तक लगभग 150 पुस्तकालयों के लिए फर्नीचर और किताबों की खरीद कर उन्हें पंचायत भवनों में उपलब्ध कराया जा चुका है।
प्रत्येक डिजिटल लाइब्रेरी पर करीब 4 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें पुस्तकें, आईटी उपकरण और फर्नीचर शामिल हैं।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी लाइब्रेरी
इन डिजिटल लाइब्रेरी में इंटरनेट सुविधा, एलईडी स्क्रीन, सीसीटीवी कैमरे, कंप्यूटर सिस्टम और आधुनिक फर्नीचर उपलब्ध होगा। साथ ही छात्रों के लिए किताबों के साथ डिजिटल कंटेंट, ई-बुक्स, वीडियो और ऑडियो लेक्चर, क्विज और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रत्येक लाइब्रेरी में 12 विषयों पर आधारित लगभग 1700 किताबें रखी जाएंगी, जिनमें 50 प्रतिशत पुस्तकें शासकीय और अन्य प्रकाशकों की होंगी।
गांव में ही मिलेगी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी
इस पहल से ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को सिविल सेवा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें गांव में ही कोचिंग और अध्ययन केंद्र जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी, जिससे शिक्षा के स्तर में सुधार होने की उम्मीद है।
ग्रामीण शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल छात्रों को बेहतर संसाधन मिलेंगे, बल्कि गांवों में डिजिटल साक्षरता भी बढ़ेगी और युवा नई तकनीकों से जुड़ सकेंगे।
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