बीएचयू में कथित लापरवाही से मौत पर उठे सवाल छात्र नेता योगेश योगी ने पीड़ित परिवार के लिए मांगी न्यायपूर्ण सहायता
वाराणसी/बलिया:दोनों जनपदों से जुड़ा एक संवेदनशील मामला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बलिया जनपद की रहने वाली एक महिला मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने न केवल परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है बल्कि पूरे क्षेत्र में आक्रोश और चिंता का माहौल भी पैदा कर दिया है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।
इलाज में गंभीर त्रुटि का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार बलिया की निवासी राधिका पाल को न्यूरोलॉजिकल समस्या के इलाज के लिए बीएचयू लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि मरीज की वास्तविक बीमारी के अनुरूप उपचार नहीं किया गया और जंघा का ऑपरेशन कर दिया गया जो चिकित्सा दृष्टि से गंभीर चूक मानी जा रही है। इस कथित गलती के बाद मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मृत्यु हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने चिकित्सा व्यवस्था की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभद्र व्यवहार के आरोप से बढ़ी संवेदनशीलता
मामले को और गंभीर बनाता है वह आरोप जिसमें परिजनों ने चिकित्सा कर्मियों पर अभद्र व्यवहार करने का दावा किया है। दुख की घड़ी में सहानुभूति और संवेदनशीलता की अपेक्षा रखने वाले परिवार को कथित रूप से असहयोग और अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा जिससे उनका दर्द और बढ़ गया। यह पहलू सामाजिक दृष्टि से भी चिंता का विषय बन गया है।
छात्र नेता योगेश योगी ने उठाई आवाज
इस पूरे प्रकरण में छात्र नेता योगेश योगी ने सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के निदेशक से मुलाकात कर मामले को विस्तार से रखा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए औपचारिक पत्र भी सौंपा। योगेश योगी ने स्पष्ट कहा कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।
मरीजों की सहायता में सक्रिय भूमिका
योगेश योगी लंबे समय से बीएचयू में मरीजों और उनके परिजनों की सहायता के लिए जाने जाते हैं। विशेषकर पूर्वांचल और बलिया क्षेत्र से आने वाले जरूरतमंद मरीजों के लिए वे सहयोग और मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं। अस्पताल की जटिल प्रक्रियाओं के बीच वे प्रशासन से संवाद स्थापित कर समस्याओं के समाधान में भी भूमिका निभाते रहे हैं।
जवाबदेही तय करने की आवश्यकता
इस घटना ने एक बार फिर चिकित्सा संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं की गई तो इस तरह की घटनाएं लोगों के भरोसे को कमजोर कर सकती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी व्यवस्था बेहद जरूरी मानी जा रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में बीएचयू प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारी तय होती है या नहीं और पीड़ित परिवार को न्याय तथा सहायता मिल पाती है या नहीं। यह मामला न केवल एक परिवार की पीड़ा से जुड़ा है बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत को भी उजागर करता है।
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