डिजिटल भारत की नई इबारत देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना का आगाज वाराणसी से नगर आयुक्त ने की स्व गणना की अपील
वाराणसी: भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। साल 2011 के लंबे अंतराल के बाद भारत एक बार फिर अपनी आबादी और संसाधनों का लेखा-जोखा तैयार करने के लिए तैयार है लेकिन इस बार इसका स्वरूप पूरी तरह आधुनिक और तकनीक आधारित होगा। केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया के विजन को आगे बढ़ाते हुए देश की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना की शुरुआत कर दी है। इस महा अभियान की सबसे बड़ी विशेषता स्व गणना की सुविधा है जिसने आम नागरिकों को अपने घर बैठे देश निर्माण की प्रक्रिया में भागीदारी करने का अवसर दिया है।
स्वयं बनें अपनी जानकारी के सारथी शुरू हुई स्व गणना की प्रक्रिया
जनगणना के पहले चरण के अंतर्गत केंद्र सरकार ने स्व गणना की सुविधा शुरू कर दी है जो आगामी 21 मई तक जारी रहेगी। पहली बार भारत का कोई भी नागरिक आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर स्वयं अपना और अपने परिवार का विवरण डिजिटल रूप से दर्ज कर सकता है। पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और नागरिक केवल अपने मोबाइल नंबर और नाम के माध्यम से पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं।
ओटीपी सत्यापन के बाद नागरिकों को कुल 33 सवालों वाली एक विस्तृत प्रश्नावली भरनी होगी जिसमें जनसांख्यिकीय जानकारी और घरेलू सुविधाओं से जुड़े सवाल शामिल हैं। विवरण सफलतापूर्वक जमा होने के बाद सिस्टम द्वारा 11 अंकों की एक विशिष्ट एसई आईडी जारी की जाएगी। वाराणसी के नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि यह आईडी न केवल भागीदारी का प्रमाण होगी बल्कि आगे की प्रक्रिया में समय बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बनेगी।
22 मई से फील्ड में उतरेंगे प्रगणक एसई आईडी से मिलेगी राहत
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि स्व गणना करने वाले परिवारों को भविष्य की जटिलताओं से राहत मिलेगी। 22 मई से जब प्रगणक घर घर पहुंचेंगे तब जिन नागरिकों ने पहले ही पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर दी होगी उन्हें केवल अपनी 11 अंकों की एसई आईडी दिखानी होगी। यदि पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी और मौके पर दी गई जानकारी का मिलान हो जाता है तो प्रगणक उसे तुरंत स्वीकार कर लेंगे। इससे नागरिकों का समय बचेगा और सरकारी तंत्र पर भी कार्य का दबाव कम होगा। नगर निगम प्रशासन ने इस अभियान के लिए प्रगणकों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया है।
सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष जोर अफवाहों से बचने की सलाह
जनगणना को लेकर अक्सर नागरिकों के मन में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इन आशंकाओं को दूर करते हुए नगर आयुक्त ने कहा कि पूरी प्रक्रिया एंड टू एंड एन्क्रिप्शन तकनीक के माध्यम से सुरक्षित बनाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान किसी भी नागरिक से बैंक संबंधी जानकारी या आधार संख्या जैसी संवेदनशील जानकारी नहीं मांगी जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि जब प्रगणक घर आएं तो उनका आधिकारिक पहचान पत्र अवश्य जांचें। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि जनगणना केवल विकास योजनाओं और नीतियों के लिए सांख्यिकीय आधार तैयार करने की प्रक्रिया है न कि नागरिकता का कोई प्रमाण।
दो चरणों में होगा वाराणसी का सर्वे 2027 तक चलेगा अभियान
वाराणसी में इस जनगणना अभियान को दो प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में मई और जून 2026 के दौरान हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी जिसमें मकानों की सूची और उनकी स्थिति का डेटा शामिल होगा। दूसरे चरण में फरवरी 2027 के दौरान जनसंख्या साक्षरता दर रोजगार की स्थिति और जातिगत आंकड़ों जैसी विस्तृत जानकारियां जुटाई जाएंगी।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इस पूरी प्रक्रिया को जन अभियान बताते हुए काशीवासियों से बढ़ चढ़कर भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नागरिकों द्वारा दी गई सटीक जानकारी ही भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की दिशा तय करेगी। प्रशासन ने इस डिजिटल अभियान को सफल बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और अब जनता की सक्रिय भागीदारी का इंतजार है।
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