लखनऊ में आयोग की सुनवाई में सतेन्द्र बारी का कड़ा तेवर जनसमस्याओं पर तुरंत समाधान की मिसाल बनी कार्यशैली
लखनऊ: प्रदेश की राजधानी में आयोजित आयोग की सुनवाई इस बार एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर जनसेवा के प्रति समर्पण और जवाबदेही का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आई। पिछड़ा आयोग के सदस्य सतेन्द्र बारी उर्फ बीनू जी ने सुनवाई के दौरान जिस सख्त लेकिन संतुलित रुख के साथ अधिकारियों से जवाब तलब किया उसने न केवल व्यवस्था की कमियों को उजागर किया बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार की स्पष्ट आवश्यकता को भी सामने रखा।
सुनवाई के दौरान सतेन्द्र बारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आम जनता की छोटी समस्याओं का समाधान यदि विभागीय स्तर पर ही नहीं हो पा रहा है तो यह प्रशासनिक तंत्र की गंभीर कमी को दर्शाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जनता को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगवाना उचित नहीं है और इससे शासन की मंशा पर भी सवाल उठते हैं। उनके वक्तव्य में सख्ती के साथ साथ संवेदनशीलता भी साफ दिखाई दी जिससे उपस्थित अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हुआ।
समयबद्ध निस्तारण पर जोर
सतेन्द्र बारी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि हर शिकायत का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासन की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को उसके निकट ही न्याय और समाधान मिले। इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा और शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मौके पर ही कई समस्याओं का समाधान
इस सुनवाई की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि कई मामलों का समाधान मौके पर ही कर दिया गया। फरियादियों के चेहरों पर दिखी संतुष्टि इस बात का प्रमाण थी कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत होती है तो समस्याओं का समाधान तेजी से संभव हो जाता है। उपस्थित लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय बाद उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना गया और तत्काल कार्रवाई की गई।
व्यवस्था सुधार की दिशा में निर्देश
सतेन्द्र बारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे समस्याएं उत्पन्न ही न हों और यदि हों तो उनका त्वरित समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि जनहित सर्वोपरि है और इसके लिए हर स्तर पर जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। उन्होंने विभागीय समन्वय को मजबूत करने और शिकायत निवारण प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी जोर दिया।
जनता के बीच मजबूत छवि
जनता के बीच सतेन्द्र बारी की छवि एक सक्रिय और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में उभर रही है जो न केवल समस्याओं को सुनते हैं बल्कि उनके समाधान के लिए ठोस कदम भी उठाते हैं। उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता और निष्पक्षता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है जो उन्हें अलग पहचान देती है।
सुनवाई ने दिया स्पष्ट संदेश
यह सुनवाई केवल एक दिन की प्रक्रिया नहीं बल्कि प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। जिस तरह से सतेन्द्र बारी ने अधिकारियों को जवाबदेही का एहसास कराया उससे यह स्पष्ट हो गया कि अब जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्यशैली आने वाले समय में प्रशासनिक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की दिशा तय करती नजर आ रही है।
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