मेरठ में सीओ सौम्या अस्थाना का ऑडियो वायरल, थाने में वीडियोग्राफी पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश का मामला गरमाया
मेरठ में ब्रह्मपुरी क्षेत्र की सीओ सौम्या अस्थाना से जुड़ा एक 29 सेकंड का ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल ऑडियो में कथित रूप से सीओ थाने के अंदर पत्रकारों द्वारा की जा रही वीडियोग्राफी पर तत्काल मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देती सुनाई दे रही हैं। ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे और मीडिया जगत में चर्चा तेज हो गई है।
ऑडियो में क्या है कथित निर्देश
वायरल ऑडियो क्लिप में सीओ यह कहते हुए सुनाई दे रही हैं कि यदि किसी भी थाने के अंदर किसी पत्रकार द्वारा वीडियोग्राफी की जाती है तो तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाए। यह ऑडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा, तो कुछ ने इसे पुलिस व्यवस्था बनाए रखने के संदर्भ में आवश्यक कदम बताया।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ऑडियो किस संदर्भ में और किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड किया गया। पुलिस अधिकारियों की ओर से भी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।
अदालत का पूर्व निर्णय और कानूनी पक्ष
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि पुलिस थाने में वीडियोग्राफी करना आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 का उल्लंघन नहीं माना जाएगा, जब तक कि उससे पुलिस अधिकारियों के कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा उत्पन्न न हो। ऐसे में वायरल ऑडियो के संदर्भ में कानूनी व्याख्या को लेकर भी चर्चा हो रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक संस्थान में मीडिया की उपस्थिति और रिपोर्टिंग का अधिकार संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा है, लेकिन साथ ही यह भी आवश्यक है कि कानून व्यवस्था और जांच प्रक्रिया में बाधा न पहुंचे।
एडीजी और एसएसपी ने दी सफाई
मामले में एडीजी भानु भास्कर ने स्पष्ट किया कि प्रिंट मीडिया के लिए किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी को इस संबंध में समझा दिया गया है और स्थिति स्पष्ट कर दी गई है।
वहीं एसएसपी अविनाश पांडेय ने भी कहा कि सीओ का बयान विशेष रूप से कुछ पोर्टल संचालकों के संदर्भ में था, जो थाने के अंदर अनर्गल और बिना अनुमति के वीडियोग्राफी कर रहे थे। उन्होंने दोहराया कि प्रिंट मीडिया के लिए ऐसा कोई प्रतिबंध लागू नहीं है।
एसएसपी ने यह भी संकेत दिया कि पुलिस थानों के भीतर अनुशासन और कार्यप्रणाली को बनाए रखना प्राथमिकता है, और किसी भी प्रकार की अनियंत्रित गतिविधि को रोका जाना आवश्यक है।
सीओ से संपर्क का प्रयास
वायरल ऑडियो के संबंध में सीओ सौम्या अस्थाना से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका। फिलहाल उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
घटना के बाद मीडिया संगठनों और पत्रकारों के बीच इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। कई पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि कोई स्पष्ट दिशा निर्देश हैं तो उन्हें लिखित रूप में जारी किया जाना चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति न बने।
मीडिया और पुलिस के बीच संतुलन की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस और मीडिया दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। जहां पुलिस की जिम्मेदारी कानून व्यवस्था बनाए रखना है, वहीं मीडिया की भूमिका सूचना का प्रसार और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा निर्देश और संवाद की आवश्यकता होती है, ताकि किसी प्रकार का टकराव या भ्रम उत्पन्न न हो।
फिलहाल मेरठ में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। उच्चाधिकारियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण के बाद स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई है, लेकिन वायरल ऑडियो को लेकर औपचारिक जांच या विभागीय कार्रवाई होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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