प्रतापगढ़ सर्किट हाउस की जनसुनवाई में दिखा पिछड़ा आयोग सदस्य सत्येंद्र बारी ‘बीनू’ का सख्त और संवेदनशील चेहरा
प्रतापगढ़: जिले के सर्किट हाउस में आयोजित जनसुनवाई उस समय विशेष चर्चा का विषय बन गई, जब उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य सत्येंद्र बारी ‘बीनू’ ने प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए पीड़ित को तत्काल राहत दिलाने के निर्देश दिए। जनसुनवाई के दौरान एक ओर उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदारी का एहसास कराया, वहीं दूसरी ओर बुजुर्गों के प्रति सम्मान दिखाकर मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल भी पेश की। कार्यक्रम के दौरान सामने आए कई घटनाक्रमों ने वहां मौजूद लोगों को प्रभावित किया और बैठक लंबे समय तक चर्चा में बनी रही।
जनसुनवाई के दौरान बिजली के हाईटेंशन तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलसे कृष्णकांत त्रिपाठी का मामला सामने आया। घटना की जानकारी मिलते ही पिछड़ा वर्ग आयोग सदस्य सत्येंद्र बारी ‘बीनू’ ने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण किसी नागरिक की जान खतरे में पड़ना अत्यंत चिंताजनक है और ऐसे मामलों को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि पीड़ित कृष्णकांत त्रिपाठी को तत्काल आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनके इस रुख से जनसुनवाई में मौजूद लोगों के बीच प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीरता का संदेश गया।
बुजुर्गों के सम्मान में कुर्सी छोड़कर पेश की संवेदनशीलता की मिसाल
जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा भावुक क्षण भी देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जब कुछ बुजुर्ग अपनी समस्याएं लेकर भीड़ में खड़े दिखाई दिए, तो सत्येंद्र बारी ‘बीनू’ ने तुरंत अपनी कुर्सी छोड़ दी और उन्हें सम्मानपूर्वक बैठने के लिए कहा। उन्होंने स्वयं खड़े होकर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों ने इसे जनसेवा की सच्ची भावना का उदाहरण बताया।
जनसुनवाई में शामिल कई बुजुर्गों और युवाओं ने कहा कि अक्सर शिकायतें सुनने के लिए औपचारिक बैठकें तो होती हैं, लेकिन जब कोई जनप्रतिनिधि आम लोगों के बीच खड़े होकर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनता है, तो लोगों का भरोसा और बढ़ जाता है। उनका कहना था कि इस तरह की पहल से प्रशासन और जनता के बीच संवाद भी मजबूत होता है।
जनसुनवाई बनी चर्चा का विषय
सर्किट हाउस में आयोजित यह जनसुनवाई केवल शिकायतों के निस्तारण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने प्रशासनिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनशीलता दोनों की जरूरत को भी उजागर किया। अधिकारियों के प्रति सख्त रुख और आम लोगों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार ने इस कार्यक्रम को खास बना दिया।
कार्यक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में इस जनसुनवाई की चर्चा रही। स्थानीय लोगों का कहना था कि यदि इसी तरह जनप्रतिनिधि और प्रशासन जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बने रहें, तो आम नागरिकों का भरोसा व्यवस्था पर और मजबूत होगा।
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