उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की ऐतिहासिक तैयारी स्व गणना प्रक्रिया से बदलेगी आंकड़ों की तस्वीर सात मई से इक्कीस मई तक चलेगा विशेष अभियान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जनगणना 2027 के पहले चरण को लेकर तैयारियों ने अब तेज रफ्तार पकड़ ली है और इस बार प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के लिए स्व गणना व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार सात मई दो हजार छब्बीस से इक्कीस मई दो हजार छब्बीस तक चलने वाली यह प्रक्रिया नागरिकों को पहली बार डिजिटल माध्यम से स्वयं अपने घर और परिवार से जुड़ी जानकारी दर्ज करने का अवसर प्रदान करेगी। प्रशासनिक स्तर पर इसे पारदर्शिता और सटीकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जिससे न केवल आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ेगी बल्कि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी।
स्व गणना की इस व्यवस्था के तहत नागरिकों को निर्धारित पोर्टल पर जाकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी जहां उन्हें सरल प्रक्रिया के माध्यम से पंजीकरण करना होगा। सबसे पहले राज्य के रूप में उत्तर प्रदेश का चयन करने के बाद कैप्चा कोड भरना होगा और फिर परिवार के मुखिया के नाम तथा मोबाइल नंबर के आधार पर पंजीकरण पूरा किया जाएगा। इस दौरान मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी के माध्यम से सत्यापन अनिवार्य किया गया है जिससे डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। प्रशासन का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया गया है कि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहे और किसी भी प्रकार की गोपनीयता भंग न हो।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी नई सुविधा
रजिस्ट्रेशन के बाद उपयोगकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार हिंदी और अंग्रेजी सहित सोलह भाषाओं में से किसी एक भाषा का चयन कर सकते हैं जिससे विभिन्न वर्गों के लोगों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके। इसके बाद नागरिकों को अपने पते से संबंधित विस्तृत जानकारी भरनी होगी जिसमें राज्य जिला तहसील शहर या गांव का नाम शामिल होगा। विशेष रूप से डिजिटल मैप पर अपने घर का सटीक स्थान अंकित करना अनिवार्य किया गया है जिससे भौगोलिक पहचान अधिक सटीक हो सके और भविष्य में डेटा विश्लेषण में किसी प्रकार की समस्या न आए।
तैंतीस प्रश्नों के जरिए व्यापक आंकड़ा संग्रह
इस स्व गणना फॉर्म में कुल तैंतीस प्रश्न शामिल किए गए हैं जो केवल मकान की स्थिति तक सीमित नहीं हैं बल्कि सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को भी व्यापक रूप से कवर करते हैं। नागरिकों को अपने मकान के प्रकार के साथ साथ बिजली पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की जानकारी देनी होगी। इसके अतिरिक्त परिवार के सभी सदस्यों का विवरण उनकी आयु लिंग और अन्य आवश्यक जानकारी भी दर्ज करनी होगी। घर में उपलब्ध संसाधनों जैसे टेलीविजन मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी से जुड़ी जानकारी भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है जिससे समाज के विभिन्न स्तरों का वास्तविक चित्र सामने आ सके।
सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी बनेगी पहचान का आधार
सभी जानकारी भरने के बाद फॉर्म को सावधानीपूर्वक जांचना आवश्यक होगा ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए। इसके पश्चात फॉर्म सबमिट करने पर एक यूनिक सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी प्राप्त होगी जो आगे की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब जनगणना अधिकारी या प्रगणक घर पर पहुंचेगा तब नागरिकों को केवल यही आईडी दिखानी होगी जिससे सत्यापन प्रक्रिया सरल और तेज हो सकेगी और दोबारा जानकारी देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
जनभागीदारी से ही संभव होगी सफलता
राज्य सरकार और प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे इस डिजिटल सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएं और जनगणना कार्य में सक्रिय रूप से भाग लें। अधिकारियों का कहना है कि सटीक और विश्वसनीय आंकड़े किसी भी नीति निर्माण की मजबूत नींव होते हैं और इसके लिए हर नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि जनगणना से जुड़े कार्मिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए ताकि पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
भविष्य की योजनाओं के लिए मजबूत आधार
डिजिटल स्व गणना की यह पहल पारंपरिक जनगणना प्रणाली में एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। इससे समय और संसाधनों की बचत के साथ साथ डेटा संग्रहण की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के इस उपयोग से भविष्य में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और सामाजिक आर्थिक विश्लेषण में अधिक सटीकता आएगी। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में भाग लें और सही जानकारी दर्ज करें ताकि राज्य और देश के विकास के लिए ठोस और विश्वसनीय आधार तैयार किया जा सके।
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