वाराणसी में आधी रात चला बुलडोजर, 200 साल पुरानी बताई जा रही अजगैब शहीद मस्जिद 22 मिनट में ध्वस्त, रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण होने का प्रशासन का दावा
वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भदऊ चुंगी स्थित किला कोहना क्षेत्र में मौजूद अजगैब शहीद मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई रेलवे की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए की गई। आधी रात शुरू हुए इस अभियान में पांच बुलडोजरों की मदद से करीब 42 फीट ऊंची मस्जिद को महज 22 मिनट में गिरा दिया गया। कार्रवाई के तुरंत बाद मलबे को भी ट्रकों में भरकर मौके से हटा दिया गया, जिससे सुबह तक पूरा क्षेत्र लगभग खाली दिखाई देने लगा।
कार्रवाई को लेकर पूरे शहर में चर्चा का माहौल है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया था। अधिकारियों के अनुसार करीब एक हजार से अधिक पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई थी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
रात 12 बजे शुरू हुआ अभियान, चारों ओर की गई बैरिकेडिंग
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मंगलवार रात लगभग 12 बजे पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम किला कोहना क्षेत्र में पहुंची। डीसीपी काशी गौरव बंसवाल और एडीसीपी वैभव बांगर के नेतृत्व में पूरे इलाके की बैरिकेडिंग कराई गई। मस्जिद के आसपास के मार्गों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया तथा केवल सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई। इसके बाद बुलडोजरों और अन्य मशीनों को मौके पर लाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार पूरी कार्रवाई बेहद तेज गति से की गई। लगभग 22 मिनट के भीतर मस्जिद का मुख्य ढांचा जमींदोज हो गया। इसके बाद मलबा हटाने के लिए ट्रकों और अन्य मशीनों को लगाया गया। प्रशासन का प्रयास था कि सुबह होने से पहले कार्रवाई पूरी कर ली जाए और यातायात या कानून व्यवस्था पर कोई प्रभाव न पड़े।
क्या है अजगैब शहीद मस्जिद और कब्रिस्तान का इतिहास
भदऊ चुंगी स्थित किला कोहना क्षेत्र में अजगैब शहीद मस्जिद और उससे जुड़ा कब्रिस्तान लंबे समय से मौजूद था। स्थानीय मुस्लिम समुदाय का दावा है कि यह मस्जिद लगभग 200 वर्ष पुरानी थी और क्षेत्र के धार्मिक एवं सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती थी। मस्जिद की देखरेख मुतवल्ली शमीम उस्ताद करते थे, जिनका करीब दो महीने पहले निधन हो गया था।
स्थानीय लोगों के अनुसार यहां नियमित रूप से नमाज अदा की जाती थी और कब्रिस्तान में आसपास के लोगों के परिजनों को दफनाया जाता रहा है। इसी कारण यह स्थल क्षेत्र की धार्मिक पहचान से भी जुड़ा हुआ माना जाता था।
रेलवे और प्रशासन का दावा, जमीन पर था अवैध कब्जा
प्रशासन और रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जिस भूमि पर मस्जिद और कब्रिस्तान स्थित थे वह रेलवे की पुरानी संपत्ति है। अधिकारियों के अनुसार वर्षों पहले इस भूमि पर कुछ लोगों ने कब्जा कर पहले मजार बनाई और बाद में मस्जिद तथा कब्रिस्तान का विस्तार हुआ। रेलवे का दावा है कि भूमि उसके स्वामित्व में दर्ज है और विकास परियोजना के दौरान कराई गई पैमाइश में अतिक्रमण की पुष्टि हुई थी।
प्रशासन के अनुसार वर्ष 2024 में काशी मॉडल रेलवे स्टेशन परियोजना को अंतिम रूप दिए जाने के बाद संबंधित क्षेत्र का सर्वे कराया गया। इसी दौरान रेलवे की भूमि पर बने ढांचों की पहचान की गई। इसके बाद रेलवे ने संबंधित पक्ष को जमीन खाली करने के लिए कहा और कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
कोर्ट में पहुंचा मामला, रेलवे के पक्ष में आया फैसला
मामले को लेकर मस्जिद पक्ष और रेलवे के बीच कानूनी विवाद भी चला। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मस्जिद के मुतवल्ली द्वारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया था। न्यायिक प्रक्रिया के बाद फैसला रेलवे के पक्ष में आया। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने जमीन खाली कराने के लिए तीन अलग अलग नोटिस जारी किए।
अधिकारियों का कहना है कि नोटिस जारी होने के बावजूद भूमि खाली नहीं कराई गई, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का निर्णय लिया गया। प्रशासन का दावा है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई है।
रात में कार्रवाई करने की यह रही वजह
पुलिस अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई रात में इसलिए की गई ताकि दिन के समय होने वाले भारी यातायात और भीड़भाड़ से बचा जा सके। भदऊ चुंगी और किला कोहना क्षेत्र शहर के व्यस्त इलाकों में गिने जाते हैं, जहां दिनभर वाहनों और लोगों की आवाजाही बनी रहती है। प्रशासन का मानना था कि रात में कार्रवाई करने से कानून व्यवस्था बनाए रखने और यातायात प्रभावित होने की संभावना कम रहेगी।
काशी मॉडल रेलवे स्टेशन परियोजना से जुड़ा है पूरा मामला
अधिकारियों के अनुसार जिस भूमि को खाली कराया गया है वह काशी मॉडल रेलवे स्टेशन परियोजना का हिस्सा है। यह परियोजना वाराणसी की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा योजनाओं में से एक मानी जा रही है। प्रस्तावित मॉडल स्टेशन लगभग 47 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा और इसके निर्माण पर करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है।
परियोजना के तहत स्टेशन को आधुनिक परिवहन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां रेल, बस और जल परिवहन की सुविधाओं को एकीकृत किया जाएगा ताकि यात्रियों को एक ही स्थान पर विभिन्न परिवहन साधनों का लाभ मिल सके।
स्टेशन परिसर में होंगी आधुनिक सुविधाएं
परियोजना के अनुसार स्टेशन परिसर में यात्रियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां फाइव स्टार होटल के साथ सामान्य श्रेणी का होटल भी प्रस्तावित है। इसके अलावा अर्बन हाट, व्यावसायिक परिसर, आधुनिक प्रतीक्षालय, पार्किंग और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
योजना में स्टेशन को राष्ट्रीय राजमार्ग 44 से जोड़ने का भी प्रस्ताव है, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद वाराणसी का यह स्टेशन देश के आधुनिकतम रेलवे स्टेशनों में शामिल हो सकता है।
कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल
अजगैब शहीद मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। एक ओर प्रशासन और रेलवे इसे न्यायालय के आदेश और विकास परियोजना से जुड़ी आवश्यक कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
वाराणसी में आधी रात हुई यह कार्रवाई शहर के हालिया वर्षों के सबसे बड़े ध्वस्तीकरण अभियानों में से एक मानी जा रही है। कानूनी प्रक्रिया, रेलवे की महत्वाकांक्षी विकास योजना और धार्मिक स्थल से जुड़े होने के कारण यह मामला प्रशासनिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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