सिगरा के हबीबपुर प्रकरण में अदालत का हस्तक्षेप, मुकदमा दर्ज करने के आदेश
वाराणसी: सिगरा थाना क्षेत्र के हबीबपुर इलाके से जुड़ा एक गंभीर मामला अदालत पहुंचने के बाद नया मोड़ ले चुका है। लंबे समय से कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रही पीड़िता को तब राहत मिली जब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वाराणसी की अदालत ने प्रस्तुत तथ्यों का संज्ञान लेते हुए संबंधित प्रकरण में मुकदमा दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए। पीड़िता की ओर से अधिवक्ता श्रीकांत प्रजापति और अधिवक्ता धनंजय साहनी ने अदालत में पैरवी करते हुए उपलब्ध साक्ष्य और चिकित्सकीय दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर न्यायालय ने प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए थाना प्रभारी सिगरा को विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
घटना और लगाए गए आरोप
प्रार्थना पत्र के अनुसार रानी देवी निवासी हबीबपुर थाना सिगरा ने आरोप लगाया है कि 12 जून 2025 की शाम पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों ने उनके घर में घुसकर गाली गलौज और मारपीट की। आरोप है कि जब उनकी गर्भवती बहू बीच बचाव के लिए आगे आई तो उसे जमीन पर गिराकर पेट पर प्रहार किया गया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उपचार के दौरान 13 अगस्त 2025 को गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो गई। पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद थाने में शिकायत देने के बावजूद प्रभावशाली आरोपियों के कारण कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें बार बार थाने बुलाकर प्रतीक्षा कराई जाती रही।
अदालत का आदेश और कानूनी प्रक्रिया
अदालत ने उपलब्ध चिकित्सकीय रिपोर्ट और घटनाक्रम का परीक्षण करने के बाद दंड प्रक्रिया संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्रार्थना पत्र स्वीकार किया और थाना सिगरा को निर्देशित किया कि मामले में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना की जाए। न्यायालय का यह आदेश इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसमें पुलिस की निष्क्रियता पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठे हैं और जांच को विधिसम्मत ढंग से आगे बढ़ाने की बात कही गई है।
अधिवक्ताओं का पक्ष
वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीकांत प्रजापति ने हमारे संवाददाता से बातचीत में कहा कि यह मामला केवल एक परिवार से जुड़ा विवाद नहीं बल्कि उस स्थिति का उदाहरण है जब शिकायत के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि अदालत के हस्तक्षेप से यह स्पष्ट है कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से पीड़ित को राहत मिल सकती है। अधिवक्ता धनंजय साहनी ने कहा कि गर्भवती महिला के साथ कथित मारपीट और उसके बाद गर्भस्थ शिशु की मृत्यु अत्यंत गंभीर आरोप हैं और ऐसे मामलों में त्वरित जांच आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब निष्पक्ष विवेचना होगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया और आगे की निगाहें
स्थानीय लोगों का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि थाना सिगरा जांच को किस गति और पारदर्शिता से आगे बढ़ाता है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि विधिक प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें न्याय मिलेगा। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी यह प्रकरण संवेदनशील माना जा रहा है।
फिलहाल पुलिस को अदालत के निर्देशों के अनुरूप मुकदमा दर्ज कर विवेचना आगे बढ़ानी है। जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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