वाराणसी में भारत जापान संबंधों को नई दिशा देने पर जोर
वाराणसी, 23 अगस्त। यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, यामानाशी प्रांत और जापान के बीच संबंधों को आने वाले समय में और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की इच्छा है। इनमें ग्रीन हाइड्रोजन सिस्टम के माध्यम से उत्तर प्रदेश और यामानाशी प्रांत के विकास को बढ़ावा देना प्रमुख पहल है। इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा के माध्यम से विश्व शांति की स्थापना में योगदान देने की भी इच्छा है। यामानाशी के गवर्नर रविवार को जापानी प्रतिनिधिमंडल के साथ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन करने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
कोटारो नागासाकी ने काशी के आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि यहां आकर लोगों की ईश्वर के प्रति श्रद्धा और सम्मान की भावना को स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने भी बाबा विश्वनाथ के दरबार में विश्व शांति के लिए प्रार्थना की है। उनके नेतृत्व में जापानी प्रतिनिधिमंडल के करीब 15 प्रमुख सदस्यों ने श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचकर बाबा विश्वनाथ का दर्शन पूजन किया और आशीर्वाद लिया। मंदिर न्यास के एसडीएम शंभू शरण ने बताया कि जापानी मेहमानों का मंदिर पहुंचने पर रुद्राक्ष की माला और अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने जापानी मेहमानों का हर हर महादेव के उद्घोष के साथ स्वागत किया। जापानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भी श्रद्धालुओं के साथ हर हर महादेव का जयघोष किया। इस दौरान मंदिर परिसर में भारत और जापान के सांस्कृतिक संबंधों में आत्मीयता की झलक देखने को मिली।
काशी की व्यवस्थाओं से प्रभावित हुए जापानी मेहमान
सावन के पवित्र महीने में बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचे जापानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य काशी में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखकर प्रभावित नजर आए। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। विशेष रूप से भीड़ प्रबंधन को लेकर किए गए इंतजामों को जापानी मेहमानों ने सराहा। प्रतिनिधिमंडल ने भव्य और दिव्य बाबा विश्वनाथ धाम की आध्यात्मिक आभा को भी करीब से देखा। इस दौरान जापानी दल ने काशी की आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच दिखाई दे रहे समन्वय को समझने का प्रयास किया। श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं और मंदिर परिसर के व्यापक प्रबंधन की भी उन्होंने प्रशंसा की।
सारनाथ और नमो घाट भी पहुंचा जापानी प्रतिनिधिमंडल
जापानी प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को भगवान बुद्ध की उपदेशस्थली सारनाथ का भ्रमण किया। सारनाथ की ऐतिहासिक और बौद्ध विरासत से परिचित होने के बाद प्रतिनिधिमंडल के सदस्य शाम को नमो घाट पहुंचे। यहां उन्होंने गंगा आरती में हिस्सा लिया और काशी की आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से अनुभव किया। रविवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन के बाद जापानी दल वाराणसी से रवाना हो गया। काशी प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने धार्मिक पर्यटन के साथ शहर की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास को भी करीब से देखा।
यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 के तहत हुआ दौरा
गौरतलब है कि 200 से अधिक सदस्यों वाला जापानी प्रतिनिधिमंडल यूपी जापान इन्वेस्टमेंट मीट 2026 के तहत भारत आया है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार और जापानी प्रतिनिधिमंडल के बीच निवेश तथा द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी हुए हैं। इस दौरे का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और जापान के बीच निवेश तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है। ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित सहयोग को भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत जापान सांस्कृतिक संबंधों में काशी की भूमिका
जापानी प्रतिनिधिमंडल का काशी दौरा केवल धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं रहा बल्कि इस दौरान भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक संबंधों की भी झलक दिखाई दी। एक ओर प्रतिनिधिमंडल ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में दर्शन पूजन किया तो दूसरी ओर सारनाथ में भगवान बुद्ध की उपदेशस्थली और नमो घाट पर गंगा आरती का अनुभव किया। काशी और सारनाथ की यह यात्रा भारत जापान के आध्यात्मिक सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों को समझने का अवसर बनी। उत्तर प्रदेश और यामानाशी के बीच प्रस्तावित सहयोग के साथ काशी का यह प्रवास दोनों देशों के बीच संपर्क और आपसी समझ को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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