वाराणसी में देशभर के साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा
वाराणसी: पुलिस ने देशभर में फैले एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा करते हुए गिरोह के सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साइबर क्राइम सेल और चेतगंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से सात स्मार्टफोन एक लैपटॉप 19 चेकबुक 40 डेबिट कार्ड 48 क्यूआर स्कैनर और दो वाहन बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में गिरोह से जुड़े 41 बैंक खातों में 116 करोड़ 86 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। पुलिस के अनुसार इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम को अलग अलग माध्यमों से स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था।
कम समय में अधिक मुनाफे का झांसा देकर करते थे ठगी
एसीपी साइबर विनय द्विवेदी के अनुसार गिरोह के सदस्य आम लोगों को कम समय में अधिक मुनाफा और कमीशन दिलाने का झांसा देते थे। इसके बाद उनके नाम पर फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इन बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को खपाने के लिए किया जाता था। पुलिस की जांच में सामने आया है कि इन खातों में निवेश धोखाधड़ी सट्टेबाजी वाले एप और अन्य ऑनलाइन साइबर अपराधों से जुटाई गई रकम मंगाई जाती थी। इसके बाद रकम को कई खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था।
एक्सपे एप के जरिए हासिल करते थे बैंक संदेश
पुलिस के मुताबिक आरोपी एक्सपे एप नाम के मोबाइल एप का इस्तेमाल करते थे। इस एप की मदद से खाताधारकों के मोबाइल फोन में संदेश अग्रेषण की सुविधा चालू कर दी जाती थी। इसके बाद बैंक की ओर से भेजे जाने वाले एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड आरोपियों तक पहुंच जाते थे। ओटीपी हासिल होने के बाद आरोपी बैंक खातों से ठगी की रकम को दूसरे खातों में तेजी से स्थानांतरित कर देते थे। रकम को कई खातों के माध्यम से आगे भेजे जाने के कारण उसके वास्तविक स्रोत तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता था।
41 बैंक खातों के खिलाफ 143 शिकायतें दर्ज
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों से जुड़े 41 बैंक खातों के खिलाफ देशभर से 143 शिकायतें दर्ज मिली हैं। इन शिकायतों के सामने आने के बाद पुलिस ने बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की जांच तेज कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों में साइबर ठगी की रकम किन किन माध्यमों से पहुंची और इसके बाद रकम को किन खातों में भेजा गया। जांच के दौरान गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
बिहार निवासी आरोपी भी गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के रोहतास जिले के सासाराम निवासी नीतीश कुमार पांडेय भी शामिल है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गिरोह का नेटवर्क किन किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें कितने लोग सक्रिय रूप से जुड़े थे। पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन बैंक खातों की पहचान करना भी है जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए किया गया।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बरामद मोबाइल फोन लैपटॉप चेकबुक डेबिट कार्ड क्यूआर स्कैनर और वाहनों को जांच में शामिल किया है। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच के जरिए पुलिस गिरोह के नेटवर्क और उसके संचालन के तरीके से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटा रही है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। साथ ही संदिग्ध बैंक खातों में जमा रकम को फ्रीज कराने की कार्रवाई भी की जा रही है।
साइबर ठगी के खिलाफ जांच आगे बढ़ी
वाराणसी में हुई इस कार्रवाई से साइबर ठगी के ऐसे नेटवर्क की कार्यप्रणाली सामने आई है जिसमें बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को अलग अलग स्तर पर स्थानांतरित करने के लिए किया जा रहा था। पुलिस के सामने अब 143 शिकायतों से जुड़े मामलों की जांच के साथ 41 बैंक खातों में हुए 116 करोड़ 86 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन की विस्तृत पड़ताल की चुनौती है। जांच पूरी होने के बाद गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों और साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।
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