वाराणसी में आतंकी हमलों का इतिहास: दशाश्वमेध से शीतला घाट तक दहशत की घटनाएं
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में पहचान रखने वाली वाराणसी नगरी बीते दो दशकों में कई आतंकी हमलों का सामना कर चुकी है। गंगा किनारे बसी इस प्राचीन नगरी को कई बार आतंकियों ने निशाना बनाया, जिससे न केवल जनहानि हुई बल्कि शहर की शांति व्यवस्था भी प्रभावित हुई। वर्ष 2005 से 2010 के बीच हुए प्रमुख धमाकों ने सुरक्षा एजेंसियों को नई चुनौतियों के सामने खड़ा किया। इन घटनाओं में कई निर्दोष लोगों की जान गई और दर्जनों लोग घायल हुए।
23 फरवरी 2005: दशाश्वमेध घाट पर पहला बड़ा हमला
वाराणसी में दर्ज प्रमुख आतंकी घटनाओं में पहला बड़ा हमला 23 फरवरी 2005 को दशाश्वमेध घाट पर हुआ। चाय की दुकान के पास हुए विस्फोट में नौ लोगों की मौत हुई और 24 से अधिक लोग घायल हुए थे। प्रारंभिक जांच में इसे सिलेंडर विस्फोट माना गया, लेकिन बाद में उच्च स्तरीय जांच में इसे आरडीएक्स से किया गया धमाका बताया गया। इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की गई।
5 मार्च 2006: संकटमोचन मंदिर और कैंट स्टेशन पर सीरियल ब्लास्ट
पहले हमले के लगभग एक वर्ष बाद 5 मार्च 2006 को वाराणसी में सीरियल ब्लास्ट की घटना हुई। संकटमोचन मंदिर और कैंट रेलवे स्टेशन पर एक के बाद एक बम धमाके किए गए। इस दौरान दशाश्वमेध घाट क्षेत्र में एक कूकर बम भी बरामद किया गया था, जो यदि फट जाता तो जनहानि और अधिक हो सकती थी। इस मामले में प्रयागराज के फूलपुर स्थित नलकूप कॉलोनी निवासी वलीउल्लाह को गिरफ्तार किया गया। गाजियाबाद की अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई।
इस साजिश में शामिल उसके साथी मोहम्मद जुबैर को 9 मई 2006 को जम्मू कश्मीर में एलओसी पर पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया था। वह बागपत के टाडा गांव का निवासी बताया गया। वहीं बशीर, जकारिया और मुस्तफीज नामक तीन बांग्लादेशी नागरिकों को भी इस साजिश से जोड़ा गया, लेकिन वे अब तक फरार बताए जाते हैं।
23 नवंबर 2007: कचहरी और कलेक्ट्रेट परिसर में धमाके
23 नवंबर 2007 को वाराणसी कचहरी के सिविल कोर्ट और कलेक्ट्रेट परिसर में दोपहर के समय लगातार दो बम धमाके हुए। इस घटना में तीन अधिवक्ताओं सहित नौ लोगों की मौत हुई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हमला न्यायिक व्यवस्था को सीधे निशाना बनाकर किया गया था। घटना के वर्षों बाद भी धमाके को अंजाम देने वाले सभी आरोपियों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी।
7 दिसंबर 2010: शीतला घाट पर गंगा आरती के दौरान विस्फोट
7 दिसंबर 2010 को शीतला घाट पर गंगा आरती के दौरान विस्फोट हुआ। इस घटना में दो वर्ष की बच्ची स्वास्तिका और एक महिला की मौत हो गई थी। धार्मिक अनुष्ठान के समय हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। घाट क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई और जांच एजेंसियों ने कई स्तरों पर पड़ताल की।
सुरक्षा और सतर्कता की निरंतर चुनौती
वाराणसी में हुए इन आतंकी हमलों ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक और भीड़भाड़ वाले स्थलों की सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। इन घटनाओं के बाद शहर में सुरक्षा इंतजामों को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया गया। रेलवे स्टेशन, मंदिर परिसर और घाट क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई तथा सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार किया गया।
हालांकि समय बीतने के साथ हालात सामान्य हुए, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क रहती हैं। पूर्व की घटनाओं के अनुभवों के आधार पर अब किसी भी संदिग्ध गतिविधि या धमकी को गंभीरता से लिया जाता है। वाराणसी की पहचान शांति, शिक्षा और आध्यात्मिकता से जुड़ी रही है, और प्रशासन की प्राथमिकता इस विरासत को सुरक्षित बनाए रखना है।
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