वाराणसी से ‘स्कूल चलो अभियान’ की शुरुआत, बच्चों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री, शिक्षा सुधारों पर दिया जोर
शिवपुर विद्यालय में बच्चों संग संवाद, बैग और किताबें बांटकर बढ़ाया उत्साह
वाराणसी: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘स्कूल चलो अभियान’ का विधिवत शुभारंभ किया। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवपुर स्थित परिषदीय विद्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने बच्चों के बीच समय बिताते हुए आत्मीय संवाद स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को अपने हाथों से स्कूल बैग पहनाया, किताबें और उपहार वितरित किए तथा उनके हालचाल भी पूछे। कार्यक्रम में एक भावनात्मक क्षण तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री ने बच्चों को स्वयं भोजन परोसकर उनके प्रति संवेदनशीलता और स्नेह का संदेश दिया।
धार्मिक परंपरा निभाते हुए बाबा के दरबार में किया पूजन
इससे पहले मुख्यमंत्री ने काशी की परंपरा के अनुरूप बाबा कालभैरव मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मंदिर की चौखट को स्पर्श कर प्रणाम करने के बाद उन्होंने विधिवत पूजा अर्चना की। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर षोडशोपचार पूजन और आरती में सहभागिता की। दर्शन पूजन के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक रहा।
पूर्व सरकारों पर साधा निशाना, शिक्षा व्यवस्था को बताया प्राथमिकता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर पूर्व सरकारों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले शिक्षा सरकारों की प्राथमिकता में शामिल नहीं थी और उस समय नकल जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा दिया जाता था, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था समाज के विकास में बाधा बनती है।
बुनियादी सुविधाओं में सुधार से बढ़ी विद्यालयों में उपस्थिति
मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले बड़ी संख्या में बच्चे प्राथमिक शिक्षा के बाद स्कूल छोड़ देते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों का सड़कों और तालाबों के किनारे खेलते रहना आम बात थी। जब कारण पूछा जाता तो दूरी और संसाधनों की कमी प्रमुख वजह बनकर सामने आती थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए विद्यालयों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बेहतर बनाया है।
80 हजार करोड़ से अधिक निवेश, बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर
उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्कूली शिक्षा पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक का व्यय किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में कस्तूरबा गांधी विद्यालय नहीं थे, वहां नए विद्यालय खोले गए हैं और उन्हें 12वीं तक विस्तारित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि बालिकाओं की शिक्षा निरंतर जारी रह सके।
ड्रॉपआउट दर में कमी, शिक्षा को बताया समानता का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के आसपास कई विद्यालय जर्जर स्थिति में थे और बंद होने की कगार पर पहुंच गए थे। लेकिन शिक्षकों के प्रयास और सरकारी योजनाओं के प्रभाव से स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि जहां पहले ड्रॉपआउट दर 19 प्रतिशत से अधिक थी, वह अब घटकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई है और लक्ष्य इसे शून्य तक लाना है। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक समानता का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण अभियान से आया बदलाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत प्रदेश के 1.36 लाख से अधिक विद्यालयों को मूलभूत सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इस पहल को नीति आयोग द्वारा भी सराहा गया है। वहीं ‘ऑपरेशन निपुण’ के माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता और गुणवत्ता में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्रों को मिल रही यूनिफॉर्म, बैग और अन्य सुविधाएं
उन्होंने कहा कि अब सभी बच्चों को दो जोड़ी यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, किताबें, जूते और मोजे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नए सत्र में दो चरणों में अभिभावकों के खातों में धनराशि भी भेजी जाएगी, जिससे बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
शिक्षकों की भूमिका को बताया निर्णायक
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश का भविष्य उनके कंधों पर टिका है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे आज भी अपने शिक्षकों का सम्मान करते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करें, जिससे समाज और राष्ट्र सशक्त बन सके।
हर जिले में बनेंगे आधुनिक कंपोजिट विद्यालय
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में चरणबद्ध तरीके से आधुनिक कंपोजिट विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में प्री प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक की शिक्षा एक ही परिसर में आधुनिक सुविधाओं के साथ उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी।
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