चंदौली में पानी-पानी हुआ जनजीवन साहूपुरी में 20 दिनों से सूखा 50 परिवार बूंद बूंद को मोहताज
चंदौली: ग्राम सभा फतेहपुर स्थित साहू पुरी में इन दिनों जल संकट ने ऐसा रूप ले लिया है जिसने पूरे गांव की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। भीषण गर्मी के बीच जहां एक एक बूंद पानी का महत्व और बढ़ जाता है वहीं यहां के लोग पिछले करीब 20 दिनों से पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांव में बनी पानी की टंकी जो कभी जीवनरेखा मानी जाती थी अब केवल एक निष्क्रिय ढांचा बनकर रह गई है। जलापूर्ति ठप होने से करीब 50 परिवारों के सामने रोजमर्रा के जीवन को चलाना भी चुनौती बन गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि लोगों की दिनचर्या पूरी तरह पानी की तलाश के इर्द गिर्द सिमट कर रह गई है।
कटी पाइपलाइन बनी संकट की जड़
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम सभा खुटहा के बाहर से गुजरने वाली मुख्य पाइपलाइन जो साहू पुरी तक पानी पहुंचाती थी वह करीब 20 दिन पहले क्षतिग्रस्त हो गई। इसी के साथ गांव की जलापूर्ति पूरी तरह बंद हो गई। यह समस्या धीरे धीरे गंभीर होती चली गई लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कई बार शिकायत करने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिला जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
पानी के लिए रोज का संघर्ष
साहू पुरी में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग रोज कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाने को मजबूर हैं। सुबह से लेकर दोपहर तक लोग पानी की तलाश में भटकते रहते हैं और दिन का बड़ा हिस्सा इसी काम में निकल जाता है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है और कामकाजी लोगों की रोजी रोटी भी प्रभावित हो रही है। पानी की कमी ने गांव के सामाजिक और आर्थिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया है।
स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
पानी की कमी के चलते स्वच्छता बनाए रखना भी मुश्किल हो गया है जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। पर्याप्त पानी न मिलने के कारण लोग कई बार असुरक्षित स्रोतों का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं जो स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। गर्मी के मौसम में यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है क्योंकि शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है।
शिकायतों के बावजूद नहीं मिला समाधान
स्थानीय निवासियों फतेह बहादुर लाल अशोक शिवशरण यादव पिंटू भारती सहित कई लोगों ने बार बार प्रशासन के सामने अपनी समस्या रखी लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की टंकी पर शिकायत दर्ज कराने के लिए शिकायत पुस्तिका तक उपलब्ध नहीं कराई गई है जिससे उनकी आवाज दबकर रह जाती है। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है।
अधिकारियों के आश्वासन पर टिकी उम्मीद
टंकी के ऑपरेटर पवन गुप्ता और सिविल इंजीनियर सुग्रीव ने ग्रामीणों को जल्द मरम्मत का भरोसा जरूर दिया है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्य शुरू नहीं हुआ है। लगातार मिल रहे आश्वासनों के बावजूद जब जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिखता तो लोगों में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।
व्यवस्था पर उठते सवाल
साहू पुरी की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि क्या बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है या नहीं। जब विकास की बड़ी बड़ी बातें की जाती हैं तब ऐसे गांवों की स्थिति उस दावे को कमजोर करती है जहां लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। यह केवल एक गांव का मुद्दा नहीं बल्कि उस व्यवस्था की परीक्षा है जो आम नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार है।
तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और पाइपलाइन की मरम्मत कर जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल की जाए। उनका कहना है कि इस मुद्दे को शासन के उच्च स्तर तक पहुंचाकर स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
जल संकट बना जीवन का सवाल
भीषण गर्मी के इस दौर में पानी की कमी केवल एक असुविधा नहीं बल्कि जीवन से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुकी है। साहू पुरी के लोग अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन उनकी परेशानी को समझेगा और जल्द राहत पहुंचाएगा। यदि समय रहते इस संकट का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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