AAP में बड़ा सियासी भूचाल 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा राघव चड्ढा समेत कई नेता BJP में शामिल
नई दिल्ली/ चंडीगढ़: आज एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने देश की सियासत में हलचल मचा दी है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों में बड़ा विभाजन सामने आया है जहां 10 में से 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शाम करीब चार बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस सामूहिक निर्णय की जानकारी दी। इसके तुरंत बाद वह अपने सहयोगी सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय पहुंचे जहां उन्हें औपचारिक रूप से सदस्यता दिलाई गई।
सामूहिक इस्तीफे से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा के साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक कुमार मित्तल भी मौजूद रहे। राघव ने बताया कि उनके साथ हरभजन सिंह विक्रमजीत सिंह साहनी स्वाति मालीवाल और राजेंदर गुप्ता ने भी पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है। हालांकि इनमें से कुछ सांसदों की ओर से अभी सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। स्वाति मालीवाल ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि वह फिलहाल इटानगर में हैं और दिल्ली लौटने के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगी।
पंजाब की राजनीति पर संभावित असर
इस घटनाक्रम ने खासतौर पर पंजाब की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है जहां वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में आम आदमी पार्टी के भीतर यह विभाजन पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका सीधा असर पार्टी की संगठनात्मक स्थिति और चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
संवैधानिक प्रक्रिया का हवाला
राघव चड्ढा ने अपने फैसले को लेकर कहा कि यह कदम पूरी तरह संवैधानिक प्रावधानों के तहत उठाया गया है। उन्होंने कहा कि दो तिहाई सांसद इस निर्णय में शामिल हैं इसलिए दलबदल कानून लागू नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों से उन्हें यह महसूस हो रहा था कि वह गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं और इसी कारण उन्होंने यह निर्णय लिया।
ईडी कार्रवाई के बाद चर्चा में आए मित्तल
इस पूरे घटनाक्रम में अशोक कुमार मित्तल का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है जो लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन हैं। उनके जालंधर स्थित आवास पर 15 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई कार्रवाई के बाद वह पहले से ही चर्चा में थे। अब उनके इस फैसले ने राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है।
पिछले घटनाक्रमों से मिल रहे थे संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ बल्कि इसके संकेत पहले से ही मिल रहे थे। मार्च 2024 में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय राघव चड्ढा की चुप्पी चर्चा का विषय बनी थी। इसके बाद फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनावों में पार्टी को मिली हार के दौरान भी उनका रुख स्पष्ट नहीं था।
संगठन से दूरी और बदला रुख
बीते समय में उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल से पार्टी से जुड़े प्रतीकों का हटना और संगठनात्मक गतिविधियों में कम भागीदारी भी सवालों के घेरे में रही। संसद के भीतर भी उनके रुख में बदलाव देखा गया जहां उन्होंने कई मौकों पर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया। हाल ही में वॉकआउट के दौरान उनका सदन में मौजूद रहना भी चर्चा का कारण बना।
आगे की राजनीति पर टिकी नजरें
इस पूरे घटनाक्रम का असर आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और खासतौर पर पंजाब की सियासत पर पड़ना तय माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी के लिए यह एक बड़ा संगठनात्मक संकट बन सकता है जबकि भारतीय जनता पार्टी के लिए इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल सभी की नजरें उन बाकी सांसदों पर टिकी हैं जिन्होंने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। साथ ही आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है जिससे आगे की स्थिति स्पष्ट हो सके।
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