कोलकाता में सत्ता परिवर्तन की औपचारिक शुरुआत, अमित शाह की मौजूदगी में आज चुना जाएगा बंगाल का नया मुख्यमंत्री
कोलकाता: आज शुक्रवार का दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार सुबह कोलकाता पहुंच रहे हैं जहां वे भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ एक अहम बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लेना है। हालांकि अब तक किसी एक चेहरे पर आधिकारिक सहमति की घोषणा नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई नामों को लेकर चर्चा तेज बनी हुई है। भाजपा की संगठनात्मक परंपरा के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक विधायक दल के नेता के नाम की घोषणा करते हैं और वही आगे चलकर मुख्यमंत्री पद संभालता है।
विधायक दल की बैठक में होगा अंतिम फैसला
अमित शाह के इस दौरे को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष तैयारियां की हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार गृह मंत्री न्यू टाउन स्थित एक होटल में ठहरेंगे और इसके बाद दोपहर में बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर पहुंचेंगे। यहां दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक भाजपा विधायक दल की बैठक आयोजित होगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी सहायक पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहेंगे।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान नवनिर्वाचित विधायकों की राय ली जाएगी और उसके बाद विधायक दल के नेता के नाम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। भाजपा इस बैठक को केवल मुख्यमंत्री चयन तक सीमित नहीं मान रही बल्कि इसे बंगाल में अपनी राजनीतिक दिशा और शासन व्यवस्था की नई शुरुआत के तौर पर देख रही है। माना जा रहा है कि बैठक में आगामी सरकार की प्राथमिकताओं और संगठनात्मक समन्वय पर भी चर्चा हो सकती है।
राजभवन जाकर पेश किया जाएगा सरकार बनाने का दावा
विधायक दल के नेता के चयन के बाद नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री अपने समर्थक विधायकों के साथ राजभवन पहुंचेंगे और राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश करेंगे। इसके बाद नई सरकार के गठन की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लंबे समय तक विपक्ष की राजनीति करने के बाद भाजपा अब पश्चिम बंगाल में सत्ता संचालन की भूमिका निभाने की तैयारी कर रही है। इसी वजह से इस राजनीतिक घटनाक्रम को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल विधानसभा में भाजपा की भूमिका अब पूरी तरह बदल जाएगी। पार्टी अब विपक्षी हमलों का जवाब देने के बजाय प्रशासनिक फैसलों और शासन की जिम्मेदारी संभालती नजर आएगी। राज्य में कानून व्यवस्था रोजगार विकास और निवेश जैसे मुद्दे नई सरकार के लिए प्राथमिक चुनौती माने जा रहे हैं।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होगा शपथ ग्रहण समारोह
नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह नौ मई शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। भाजपा इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी में जुटी हुई है। पार्टी की ओर से दावा किया जा रहा है कि इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता रहा है। यहां कई ऐतिहासिक राजनीतिक रैलियां और कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। ऐसे में भाजपा इस स्थान से नई सरकार की शुरुआत कर राज्य की राजनीति में मजबूत संदेश देने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक जानकार इस शपथ ग्रहण समारोह को केवल सत्ता परिवर्तन का कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा की बढ़ती उपस्थिति के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं।
कोलकाता से दिल्ली तक बढ़ी राजनीतिक हलचल
मुख्यमंत्री चयन को लेकर कोलकाता से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता लगातार संगठन के पदाधिकारियों और विधायकों के संपर्क में हैं। पार्टी नेतृत्व इस बात का ध्यान रख रहा है कि मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया में संगठनात्मक संतुलन और राजनीतिक संदेश दोनों स्पष्ट दिखाई दें। इसी कारण अंतिम निर्णय को लेकर लगातार मंथन जारी है।
अब पूरे राज्य की निगाहें बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर पर टिकी हुई हैं जहां कुछ ही घंटों में पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के नाम का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है। इसके साथ ही राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है।
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