मथुरा: वृंदावन की भक्ति में डूबे कैलाश खेर, प्रेमानंद महाराज के सानिध्य में गूंजा बम लहरी, मुस्कुराया पूरा आश्रम
मथुरा: वृंदावन की पावन धरा पर एक ऐसा आध्यात्मिक और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला जिसने वहां उपस्थित हर व्यक्ति के मन को भक्ति और आनंद के अद्भुत भाव से भर दिया। सूफी गायकी की दुनिया का बड़ा नाम और अपनी विशिष्ट आवाज से लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले कैलाश खेर जब रमण रेती स्थित केलीकुंज आश्रम में संत प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे तो आश्रम का वातावरण संगीत, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत संगम में बदल गया। यह मुलाकात केवल एक कलाकार और संत का मिलन नहीं बल्कि भक्ति, भाव और संगीत की उस धारा का अनुभव थी जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावविभोर कर दिया।
आश्रम पहुंचते ही हुआ पारंपरिक स्वागत
सुबह आश्रम पहुंचते ही सेवादारों ने कैलाश खेर का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उन्हें श्रद्धा के प्रतीक के रूप में दुपट्टा पहनाया गया। आश्रम में प्रवेश के दौरान कैलाश खेर के चेहरे पर अलग ही शांति और आत्मिक प्रसन्नता दिखाई दे रही थी। संत प्रेमानंद जी महाराज के समक्ष पहुंचकर उन्होंने अत्यंत विनम्रता के साथ हाथ जोड़कर प्रणाम किया और मोरपंखी हार पहनाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उस पल की आत्मीयता इतनी गहरी थी कि वहां मौजूद श्रद्धालु भी भावुक दिखाई दिए।
एक छोटे संवाद ने बढ़ाई आत्मीयता
मुलाकात के दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने सहज मुस्कान के साथ कैलाश खेर से पूछा कि आप ठीक हैं। इस पर अपनी चिर परिचित शैली में कैलाश खेर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि मस्त हैं। इस छोटे से संवाद ने पूरे वातावरण को आत्मीयता और सहजता से भर दिया।
इसके बाद कैलाश खेर ने माइक संभाला और हाथ जोड़कर संत तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रणाम किया। फिर उन्होंने अपने विशेष अंदाज में बम लहरी भजन की प्रस्तुति शुरू कर दी।
भक्ति में डूबा आश्रम और झूम उठे कैलाश खेर
जैसे ही कैलाश खेर की दमदार आवाज आश्रम परिसर में गूंजने लगी वहां उपस्थित लोगों के चेहरे खिल उठे। भजन के दौरान कैलाश खेर पूरी तरह भक्ति में लीन दिखाई दिए। सुरों के साथ उनका उत्साह भी बढ़ता गया और अचानक वे झूमते हुए नृत्य करने लगे। यह दृश्य इतना सहज और आनंदमय था कि संत प्रेमानंद महाराज भी अपनी मुस्कान नहीं रोक सके। उनका चेहरा खिल उठा और वे खुलकर हंस पड़े।
करीब डेढ़ मिनट तक चले बक्कड़ बम लहरी भजन के समापन पर प्रेमानंद महाराज ने मुस्कुराते हुए कहा कि बहुत सुंदर और बहुत बढ़िया।
मीरा भजन ने बढ़ाया आध्यात्मिक रंग
इस आत्मिक प्रशंसा से अभिभूत कैलाश खेर ने विनम्रता से कहा कि वे एक और भजन प्रस्तुत करना चाहते हैं। संत ने सहज भाव से इसकी अनुमति दी। इसके बाद कैलाश खेर ने अपने विशिष्ट स्वर में पांच वर्ष की मीरा लाडली हो सखियां में खेला जाए री सुन राणा बाई री भजन प्रस्तुत किया। जैसे जैसे भजन आगे बढ़ता गया वैसे वैसे पूरा वातावरण भक्ति के रंग में डूबता चला गया। आश्रम में मौजूद लोग उस क्षण को अपनी स्मृतियों में संजो लेने की कोशिश करते दिखाई दिए।
भजन समाप्त होने पर प्रेमानंद महाराज ने उनकी आवाज की सराहना करते हुए कहा कि बहुत अच्छी आवाज है। इसके बाद कैलाश खेर ने संत का आशीर्वाद लिया और वहां से विदा हो गए।
एक दिन पहले पहुंचे थे वृंदावन
इस आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत एक दिन पहले ही हो चुकी थी। गुरुवार देर शाम कैलाश खेर वृंदावन पहुंचे थे और शहर के एक होटल में ठहरने के बाद सीधे ठाकुर बांके बिहारी मंदिर पहुंचे। फूल बंगला में विराजमान भगवान बांके बिहारी की मनमोहक छवि के दर्शन करते ही वे भावविभोर दिखाई दिए। मंदिर परिसर में लगभग तीस मिनट तक वे एकटक प्रभु की छवि को निहारते रहे।
मंदिर में उन्होंने परंपरा के अनुसार देहरी पर इत्र अर्पित किया और पूजा अर्चना की। इस दौरान सेवायत मोहित गोस्वामी ने उन्हें भगवान का प्रसादी, अंगवस्त्र और प्रसाद भेंट कर सम्मानित किया। श्रद्धा और भक्ति से भरे इन पलों ने कैलाश खेर की वृंदावन यात्रा को और अधिक विशेष बना दिया।
भक्ति और संगीत का दुर्लभ संगम
वृंदावन की इस यात्रा ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि जब संगीत श्रद्धा से जुड़ता है तब वह केवल सुरों का मेल नहीं रहता बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाला अनुभव बन जाता है। कैलाश खेर और संत प्रेमानंद महाराज की यह मुलाकात केवल एक घटना नहीं बल्कि उन दुर्लभ पलों में शामिल हो गई जिन्हें देखने वाले लंबे समय तक याद रखेंगे। भक्ति, संगीत और संतों की मुस्कान से सजा यह दृश्य वृंदावन की स्मृतियों में लंबे समय तक जीवंत रहने वाला है।
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