भदोही एमपी एमएलए कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व विधायक विजय मिश्रा पत्नी और बेटे को 10 10 साल की सजा, बहू को 4 साल कैद
भदोही: उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत से लंबे समय से जुड़े चर्चित नाम पूर्व विधायक विजय मिश्रा को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। भदोही के एमपी एमएलए कोर्ट ने रिश्तेदार के पैतृक आवास पर अवैध कब्जा करने और माइनिंग फर्म को जबरन अपने नियंत्रण में लेने के चर्चित मामले में सपा और निषाद पार्टी से जुड़े पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उनकी पत्नी एवं पूर्व एमएलसी रामलली मिश्रा तथा बेटे विष्णु मिश्रा को 10 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं इस मामले में बहू रूपा मिश्रा को चार वर्ष की सजा दी गई है। अदालत ने सभी दोषियों पर कुल 5 लाख 26 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है।
62 पृष्ठों के फैसले में अदालत ने सुनाया निर्णय
शुक्रवार को एमपी एमएलए कोर्ट की विशेष न्यायाधीश पुष्पा सिंह ने बासठ पृष्ठों के विस्तृत फैसले में यह निर्णय सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उनकी पत्नी और बेटे की भूमिका को अधिक गंभीर माना जबकि बहू रूपा मिश्रा की संलिप्तता को अलग आधार पर देखते हुए अपेक्षाकृत कम सजा सुनाई गई। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि दोषियों ने समाज के विरुद्ध गंभीर अपराध किया है और अपराध से अर्जित संपत्ति का लाभ भी उठाया गया।
यह फैसला लगभग ढाई वर्षों से अधिक समय तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आया। मामले में कुल 895 दिनों तक सुनवाई चली और अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष आठ महत्वपूर्ण गवाह प्रस्तुत किए। साक्ष्यों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने पहले चारों आरोपियों को दोषी करार दिया और इसके बाद सजा का ऐलान किया गया।
2020 में दर्ज हुआ था मामला
पूरा मामला वर्ष 2020 से जुड़ा है। पूर्व विधायक विजय मिश्रा के रिश्तेदार कृष्ण मोहन तिवारी ने 4 अगस्त 2020 को गोपीगंज कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विजय मिश्रा ने वर्ष 2001 से भदोही स्थित पैतृक आवास पर अवैध कब्जा कर रखा था। इसके साथ यह आरोप भी लगाया गया कि एक माइनिंग फर्म पर जबरन नियंत्रण स्थापित कर शिकायतकर्ता को उससे दूर रखा गया।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। लंबी विवेचना और साक्ष्य संकलन के बाद 20 नवंबर 2023 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। चार्जशीट में विजय मिश्रा, उनकी पत्नी रामलली मिश्रा, बेटे विष्णु मिश्रा और बहू रूपा मिश्रा के नाम शामिल किए गए थे।
मध्य प्रदेश से हुई गिरफ्तारी, बढ़ती गईं कानूनी मुश्किलें
मामला दर्ज होने के दस दिन बाद 14 अगस्त 2020 को मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र के आगर जिले से विजय मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से विजय मिश्रा जेल से बाहर नहीं आ सके और वर्तमान में वे आगरा जेल में बंद हैं।
वहीं बेटे विष्णु मिश्रा की गिरफ्तारी जुलाई 2022 में पुणे से हुई थी। उस समय वह फरार चल रहा था और उस पर इनाम भी घोषित किया गया था। उसी वर्ष पूर्व एमएलसी रामलली मिश्रा को भी गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें अदालत से जमानत मिल गई थी लेकिन अब दोषसिद्धि के बाद उन्हें दोबारा जेल भेज दिया गया है।
फिलहाल विष्णु मिश्रा लखीमपुर खीरी जेल में बंद है। दोनों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई जबकि रामलली मिश्रा और रूपा मिश्रा अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं। दोषसिद्धि के बाद दोनों को भदोही जिला कारागार भेज दिया गया।
फैसला सुनते ही कोर्ट परिसर में भावुक हुआ माहौल
अदालत जैसे ही सजा सुनाने लगी कोर्ट परिसर का माहौल भावुक हो उठा। जानकारी के अनुसार रामलली मिश्रा और रूपा मिश्रा फैसले के बाद रोने लगीं। इस दौरान रूपा मिश्रा की लगभग बारह वर्षीय बेटी भी अदालत परिसर में मौजूद थी। अपनी मां और दादी को रोता देख वह भी भावुक होकर रोने लगी। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोग भी कुछ समय के लिए भावुक हो गए।
हालांकि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे न्यायालय परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई थी और पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारी पहले से सतर्क दिखाई दिए।
अदालत ने राहत देने से किया इनकार
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि विजय मिश्रा का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है और ऐसे व्यक्ति को किसी प्रकार की राहत देना न्यायहित में उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी कहा कि विजय मिश्रा, रामलली मिश्रा और विष्णु मिश्रा की भूमिका समाज विरोधी अपराधों की श्रेणी में आती है।
निर्णय में यह भी उल्लेख किया गया कि अपराध से प्राप्त संपत्ति के लाभ का उपयोग रूपा मिश्रा द्वारा भी किया गया। हालांकि उनकी भूमिका को अन्य तीन दोषियों की तुलना में कम गंभीर मानते हुए अदालत ने उन्हें चार वर्ष की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जुर्माने की राशि जमा नहीं की गई तो दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ सकता है।
किस पर कितना लगाया गया आर्थिक दंड
अदालत ने दोषियों पर कुल 5 लाख 26 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है।
✅विजय मिश्रा पर एक लाख 76 हजार रुपये
✅रामलली मिश्रा पर एक लाख 75 हजार रुपये
✅विष्णु मिश्रा पर एक लाख 65 हजार रुपये
✅रूपा मिश्रा पर दस हजार रुपये
विजय मिश्रा की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती रहीं
पूर्व विधायक विजय मिश्रा के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है। हाल के वर्षों में उनके खिलाफ कई मामलों में अदालतें सख्त फैसले सुना चुकी हैं।
15 मई 2026 को संपत्ति हड़पने के मामले में पत्नी और बेटे सहित सजा सुनाई गई।
13 मई 2026 को प्रयागराज एमपी एमएलए कोर्ट ने कचहरी हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास सुनाया।
13 जून 2024 को आचार संहिता उल्लंघन मामले में एक माह की सजा दी गई।
मार्च 2023 में आर्म्स एक्ट के तहत पांच वर्ष की सजा सुनाई गई।
4 नवंबर 2023 को गायिका से दुष्कर्म मामले में पंद्रह वर्ष के कारावास की सजा दी गई थी।
लगातार आ रहे फैसलों से यह स्पष्ट हो रहा है कि पूर्व विधायक की कानूनी चुनौतियां कम होने के बजाय और गंभीर होती जा रही हैं। भदोही एमपी एमएलए कोर्ट का यह फैसला न केवल जिले में बल्कि प्रदेश की राजनीतिक और न्यायिक हलचलों में भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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