वाराणसी में पर्यटन शिक्षा को नई दिशा बीएचयू में पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र के पहले समन्वयक बने प्रोफेसर सायजु पी जे
वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पर्यटन और आतिथ्य शिक्षा को संस्थागत रूप से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय में स्थापित पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र के पहले समन्वयक के रूप में प्रोफेसर सायजु पी जे को नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति दो वर्ष के कार्यकाल के लिए की गई है। पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र से जुड़ी शिक्षा तथा शोध को एक स्वतंत्र अकादमिक मंच उपलब्ध कराने की दिशा में इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कला इतिहास विभाग से अलग स्वतंत्र केंद्र के रूप में हुआ विकास
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पर्यटन का अध्ययन अब तक कला इतिहास विभाग के अंतर्गत संचालित होता रहा है। पर्यटन क्षेत्र में तेजी से बढ़ती संभावनाओं और इस क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता को देखते हुए विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद ने पर्यटन विषय को स्वतंत्र स्वरूप देने की दिशा में कदम उठाया। इसके बाद पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र की स्थापना की गई। केंद्र की स्थापना की प्रक्रिया में प्रोफेसर सायजु पी जे की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उपलब्ध विश्वविद्यालयीय और अकादमिक सूचनाओं के अनुसार केंद्र का उद्देश्य पर्यटन शिक्षा शोध नवाचार परामर्श तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय की ओर से पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र को विकसित करने का फैसला ऐसे समय में हुआ है जब वाराणसी देश और दुनिया के प्रमुख धार्मिक तथा सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। काशी विश्वनाथ मंदिर धाम सारनाथ गंगा के घाट धार्मिक यात्राएं सांस्कृतिक विरासत स्थानीय खानपान हस्तशिल्प और आतिथ्य सेवाएं वाराणसी के पर्यटन परिदृश्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में पर्यटन को केवल यात्रा और भ्रमण तक सीमित न रखकर उसके सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पक्षों का अध्ययन करने की जरूरत भी बढ़ी है।
प्रोफेसर सायजु पी जे का अकादमिक परिचय
प्रोफेसर सायजु पी जे पर्यटन प्रबंधन के क्षेत्र में लंबे समय से अध्यापन और शोध से जुड़े हुए हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थागत शोध प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने वर्ष 2004 में विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में अपनी अकादमिक यात्रा शुरू की। वर्ष 2017 में वे एसोसिएट प्रोफेसर बने और वर्ष 2020 से प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पर्यटन प्रबंधन में पीएचडी की है और उनका अकादमिक कार्य पर्यटन तथा उससे जुड़े विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर केंद्रित रहा है।
प्रोफेसर सायजु पी जे के प्रमुख शोध क्षेत्रों में सतत पर्यटन विकास पर्यटन शिक्षा सांस्कृतिक पर्यटन पर्यटक अनुभव प्रबंधन तथा सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों के व्यवहार का अध्ययन शामिल है। उनके शोध कार्यों में पर्यटन विकास को स्थानीय समाज संस्कृति और पर्यावरण के साथ जोड़कर देखने पर विशेष जोर दिखाई देता है। उनके अकादमिक प्रोफाइल में अनेक शोध प्रकाशन दर्ज हैं और उन्होंने पर्यटन तथा आतिथ्य शिक्षा से जुड़े विषयों पर शोध पत्रों के साथ पुस्तक लेखन में भी योगदान दिया है।
सतत पर्यटन विकास पर विशेष शोध
प्रोफेसर सायजु पी जे के शोध कार्यों में भारत में सतत पर्यटन विकास एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। उन्होंने केरल में पर्यटन विकास को लेकर किए गए अपने शोध को पुस्तक के रूप में भी प्रकाशित किया है। इस अध्ययन में पर्यटन के विकास उसके प्रभाव और स्थानीय समुदाय के साथ उसके संबंधों जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। उनका अकादमिक काम यह संकेत देता है कि पर्यटन विकास को केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के नजरिए से नहीं बल्कि स्थानीय समुदाय पर्यावरण संस्कृति और आर्थिक गतिविधियों के व्यापक संदर्भ में देखने की आवश्यकता है।
उनके शोध का दायरा धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन तक भी फैला हुआ है। उन्होंने सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटक व्यवहार और अनुभव से संबंधित विषयों पर अध्ययन किया है। वाराणसी जैसे शहर के संदर्भ में यह क्षेत्र विशेष महत्व रखता है क्योंकि यहां पर्यटन धार्मिक आस्था सांस्कृतिक विरासत स्थानीय अर्थव्यवस्था और आतिथ्य सेवाओं से सीधे जुड़ा हुआ है।
पर्यटन और आतिथ्य शिक्षा में शोध योगदान
प्रोफेसर सायजु पी जे ने पर्यटन और आतिथ्य प्रबंधन की शिक्षा से जुड़े शोध में भी योगदान दिया है। उनके सह लेखकों के साथ प्रकाशित एक अध्ययन में कोरोना काल के दौरान पर्यटन और आतिथ्य प्रबंधन के विद्यार्थियों की ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े अनुभव और संतुष्टि का अध्ययन किया गया। उनके अन्य शोध में कोरोना महामारी के बाद भारत में घरेलू पर्यटन की वृद्धि को टूर ऑपरेटरों के नजरिए से समझने का प्रयास किया गया। इस अध्ययन में पर्यटकों के व्यवहार उनकी प्राथमिकताओं और घरेलू पर्यटन के बदलते स्वरूप का विश्लेषण किया गया।
वर्ष 2026 में प्रकाशित एक शोध अध्ययन में भी प्रोफेसर सायजु पी जे को पर्यटन प्रबंधन के प्रोफेसर के रूप में दर्ज किया गया है। इस अध्ययन में स्मार्ट पर्यटन स्थलों सतत विकास और सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े शोध की समीक्षा की गई है। इसमें प्रोफेसर सायजु पी जे के शोध क्षेत्रों में सतत पर्यटन विकास पर्यटन शिक्षा सामाजिक परिवर्तन और सांस्कृतिक तथा धार्मिक स्थलों पर पर्यटक व्यवहार का उल्लेख किया गया है। उन्होंने पर्यटन और आतिथ्य प्रबंधन में शोध पद्धति से जुड़ा ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम भी तैयार किया है।
नए केंद्र से विद्यार्थियों को मिलेंगे अवसर
पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र के स्वतंत्र रूप से विकसित होने से इस क्षेत्र में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को व्यापक अकादमिक अवसर मिलने की उम्मीद है। केंद्र के माध्यम से पर्यटन प्रबंधन आतिथ्य पर्यटन नीति सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन सतत पर्यटन तथा पर्यटन से जुड़े अन्य विषयों में अध्ययन और शोध को एक मंच मिल सकता है। विश्वविद्यालय में पर्यटन से संबंधित स्नातक स्नातकोत्तर शोध डिप्लोमा और प्रमाणपत्र स्तर के शैक्षणिक कार्यक्रमों को विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
केंद्र की स्थापना को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार काशी को पर्यटन और तीर्थ पर्यटन के अध्ययन की प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। वाराणसी के मंदिर घाट सारनाथ संग्रहालय धार्मिक स्थल सांस्कृतिक परंपराएं स्थानीय बाजार और आतिथ्य क्षेत्र विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक अध्ययन का आधार बन सकते हैं। इससे कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक पर्यटन स्थलों और स्थानीय परिस्थितियों के साथ जोड़ने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा शोध और पर्यटन उद्योग के बीच बनेगा सेतु
पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र की स्थापना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य शिक्षा और पर्यटन उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग लगातार बढ़ रही है। होटल उद्योग ट्रैवल एजेंसियां टूर ऑपरेटर गाइडिंग सेवाएं इवेंट मैनेजमेंट धार्मिक पर्यटन क्रूज पर्यटन डिजिटल पर्यटन और विरासत संरक्षण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर मौजूद हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय स्तर पर व्यावहारिक और शोध आधारित पर्यटन शिक्षा विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
प्रोफेसर सायजु पी जे की नियुक्ति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र के पहले समन्वयक के रूप में प्रोफेसर सायजु पी जे के सामने केंद्र की अकादमिक दिशा तय करने और पर्यटन शिक्षा को व्यवस्थित रूप से विकसित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। पर्यटन प्रबंधन के क्षेत्र में उनका दो दशक से अधिक का अध्यापन और प्रशासनिक अनुभव इस जिम्मेदारी के लिए उपयोगी माना जा सकता है। उनके शोध कार्यों में सतत पर्यटन सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन पर्यटक व्यवहार तथा पर्यटन शिक्षा जैसे विषय शामिल रहे हैं जो वाराणसी के पर्यटन परिवेश से भी सीधे जुड़ते हैं।
प्रोफेसर सायजु पी जे की नियुक्ति पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने बधाई दी है। पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र के स्वतंत्र अकादमिक स्वरूप में आने के साथ अब नजर इस बात पर होगी कि केंद्र किस प्रकार नए पाठ्यक्रम शोध परियोजनाओं व्यावहारिक प्रशिक्षण और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को आगे बढ़ाता है। वाराणसी जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन और तीर्थ स्थल में स्थापित यह केंद्र आने वाले समय में पर्यटन शिक्षा और शोध के लिए एक महत्वपूर्ण अकादमिक मंच के रूप में विकसित हो सकता है।
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