वाराणसी: तेजी से बदलते जलवायु परिदृश्य और उससे उत्पन्न कृषि चुनौतियों के बीच सब्जी उत्पादन को टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी में सोमवार को एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। संस्थान परिसर में “बदलते जलवायु परिदृश्य में सब्जियों का संकर बीज उत्पादन” विषय पर आधारित पांच दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस प्रशिक्षण में देश के 12 राज्यों से आए 30 वैज्ञानिक एवं तकनीकी अधिकारी भाग ले रहे हैं, जो सब्जी अनुसंधान और बीज उत्पादन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए आईआईवीआर के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि कृषि की सफलता का आधार गुणवत्तापूर्ण बीज है और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में संकर बीज उत्पादन की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्थिर मौसम, बढ़ता तापमान और अनियमित वर्षा जैसी स्थितियों में केवल वही फसलें टिक पाती हैं, जिनके बीज वैज्ञानिक रूप से उन्नत और जलवायु सहनशील हों। ऐसे में संकर बीज न केवल उत्पादन बढ़ाने का साधन हैं, बल्कि किसानों की आय सुरक्षा का भी मजबूत आधार बनते हैं।
डॉ. कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को टमाटर, भिंडी, खीरा तथा कद्दू वर्गीय सब्जियों के संकर बीज उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें पैरेंटल लाइन का चयन, नियंत्रित परागण, फसल प्रबंधन, बीज शुद्धिकरण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण जैसी प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया जाएगा। साथ ही जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए संकर बीज उत्पादन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और उनके समाधान पर भी विशेष चर्चा होगी।
कार्यक्रम को प्रभावी और उपयोगी बनाने के लिए मॉड्यूलर प्रशिक्षण पद्धति अपनाई गई है, जिसके अंतर्गत कक्षा व्याख्यान के साथ-साथ प्रदर्शनों, प्रायोगिक सत्रों और फील्ड विजिट को शामिल किया गया है। विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा जलवायु प्रतिरोधी संकर किस्मों के विकास, बायोफर्टिलाइजर के एकीकृत उपयोग, समेकित फसल प्रबंधन (आईसीएम) तकनीकों तथा डिजिटल बीज ट्रेसिबिलिटी जैसे आधुनिक विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। प्रतिभागियों को आईआईवीआर की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में संकर बीज उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर मिल रहा है।
निदेशक ने यह भी कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों तक उच्च गुणवत्ता के बीज पहुंचाने के सरकारी संकल्प को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षित वैज्ञानिक और तकनीकी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में इस ज्ञान का प्रसार कर किसानों को जलवायु अनुकूल सब्जी उत्पादन की दिशा में प्रेरित करेंगे। कार्यक्रम का समापन 23 जनवरी को होगा, जिसमें प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. गोविन्द पाल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजीव कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर संस्थान के तीनों विभागाध्यक्ष, परियोजना समन्वयक, वरिष्ठ वैज्ञानिक, अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आईआईवीआर ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कृषि विज्ञान को बदलती जलवायु के अनुरूप सशक्त बनाने का प्रयास जारी रहेगा।
