काशी/चंदौली:फागुनी बयार में पिछड़ा आयोग सदस्य सत्येंद्र बारी ‘बीनू’भइया का संदेश, होली में उत्साह के साथ मर्यादा भी जरूरी
वाराणसी और चंदौली। फागुन का महीना जैसे ही काशी की गलियों और चंदौली की माटी से होकर गुजरता है, वातावरण में एक अलग ही सोंधी महक घुल जाती है। घाटों से लेकर गांव की चौपाल तक रंग और उमंग की चर्चा शुरू हो जाती है। इसी फागुनी माहौल में पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य सत्येंद्र बारी उर्फ बीनू भइया ने भी अपने ठेठ देसी अंदाज में लोगों को होली की शुभकामनाएं दीं और साथ ही एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया।
होली मेल मिलाप का पर्व, मन के मैल को जलाने का अवसर
बीनू भइया ने कहा कि होली केवल रंग खेलने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह मन के मैल को दूर कर आपसी रिश्तों को मजबूत करने का अवसर है। काशी की पहचान उसकी मस्ती और गंगा जमुनी परंपरा से है, जहां अलग अलग विचार और पृष्ठभूमि के लोग एक साथ त्योहार मनाते हैं। उन्होंने कहा कि होली की असली भावना यही है कि जो मनमुटाव साल भर रहा हो, उसे इस अवसर पर समाप्त कर दिया जाए और नए सिरे से संबंधों की शुरुआत की जाए।
उन्होंने लोगों से अपील की कि रंग जरूर खेलें, लेकिन किसी की भावना और सम्मान को ठेस न पहुंचे इसका विशेष ध्यान रखें। उनका कहना था कि उत्साह और उमंग के बीच मर्यादा की सीमा नहीं टूटनी चाहिए। त्योहार तभी सुंदर बनता है जब उसमें आनंद के साथ संयम भी जुड़ा हो।
युवा पीढ़ी से विशेष अपील
बीनू भइया ने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में उत्साह भरपूर है, लेकिन कई बार आवेश में आकर मर्यादा का ध्यान नहीं रखा जाता। उन्होंने कहा कि होली का रंग किसी के चेहरे पर मुस्कान लाए, न कि असहजता। प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता है, लेकिन समाज की असली ताकत उसके नागरिक होते हैं। यदि हर व्यक्ति खुद को जिम्मेदार माने तो किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की संभावना कम हो जाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि नफरत और भेदभाव की दीवारों को तोड़ने का सबसे अच्छा समय यही है। होलिका दहन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। ऐसे में समाज के भीतर जो भी गलत भावनाएं हों, उन्हें भी इसी अग्नि में समर्पित कर देना चाहिए।
देसी अंदाज में दिया फागुनी संदेश
बीनू भइया ने अपने सहज और देसी अंदाज में कहा कि फागुन आ गया है तो मन को हल्का रखिए। जिनसे साल भर दूरी रही हो, उन्हें भी रंग लगा कर गले मिलिए। लेकिन यह सब प्रेम और सम्मान के साथ हो। उन्होंने हंसी मजाक में कहा कि पुआ खिलाइए, ठंडई पिलाइए, लेकिन किसी पर जबरदस्ती नहीं कीजिए। त्योहार का आनंद तभी है जब सब लोग खुशी से शामिल हों।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती विविधता से भरी है और यहां हर त्योहार सामाजिक एकता का संदेश देता है। होली भी ऐसा ही पर्व है जो जाति और वर्ग के भेद को पीछे छोड़कर सभी को एक साथ लाता है। इसलिए जरूरी है कि हम इस अवसर को केवल रंग तक सीमित न रखें बल्कि इसे सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के माध्यम के रूप में देखें।
काशी और चंदौली की परंपरा का सम्मान
काशी की गलियों की मस्ती और चंदौली की माटी की सादगी दोनों मिलकर होली को खास बनाती हैं। बीनू भइया ने कहा कि यहां की परंपरा में अपनापन है और यही हमारी असली ताकत है। उन्होंने सभी नागरिकों से शांति, सद्भाव और पारस्परिक सम्मान के साथ होली मनाने की अपील की।
अंत में उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीवन में मुस्कान बनी रहे और रंगों की यह खुशी पूरे वर्ष कायम रहे। उनका संदेश स्पष्ट था कि होली में उत्साह जरूर हो, लेकिन मर्यादा और सामाजिक जिम्मेदारी कभी न भूली जाए।
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