देवघर: सारठ के अंबा नचनियां स्कूल में शिक्षा व्यवस्था बदहाल, 136 बच्चों पर सिर्फ 3 शिक्षक
झारखंड के देवघर जिले के सारठ प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय अंबा नचनियां में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। यहां शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। आठवीं कक्षा तक संचालित इस विद्यालय में 136 छात्रों के लिए मात्र तीन शिक्षक तैनात हैं, जिससे पढ़ाई का स्तर बेहद कमजोर हो गया है।
एक साथ चलती हैं कई कक्षाएं
विद्यालय में शिक्षकों की कमी के चलते कई कक्षाओं को एक साथ संचालित किया जाता है। ऐसे में छात्रों को न तो विषयवार उचित समय मिल पाता है और न ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। शिक्षकों पर अत्यधिक कार्यभार होने के कारण वे प्रत्येक छात्र पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, जिससे छात्रों की शैक्षणिक प्रगति प्रभावित हो रही है।
कंप्यूटर शिक्षा का नहीं कोई नामोनिशान
आज के दौर में जहां कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य माना जाता है, वहीं इस विद्यालय में कंप्यूटर शिक्षा पूरी तरह से नदारद है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने कंप्यूटर देखा तक नहीं है, जबकि पाठ्यक्रम में इसकी पढ़ाई शामिल है। इससे डिजिटल शिक्षा की दिशा में सरकार के प्रयासों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधूरा पड़ा है स्कूल भवन
विद्यालय में आधारभूत ढांचे की स्थिति भी चिंताजनक है। वर्ष 2018-19 में दो मंजिला भवन का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। छत की ढलाई तो हो चुकी है, लेकिन ऊपरी मंजिल के दो कमरे आज तक अधूरे पड़े हैं। निर्माण कार्य रुकने से छात्रों को पर्याप्त कक्षाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
शौचालय भी अधूरा, छात्रों को हो रही परेशानी
ईसीएल के सीएसआर फंड से वर्ष 2015-16 में विद्यालय में शौचालय निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन वह भी अधूरा रह गया। इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। छात्र शिवम कुमार, रितिक राउत, लेवल कुमार और आलोक कुमार बताते हैं कि आपात स्थिति में उन्हें शौच के लिए मैदान जाना पड़ता है, जबकि लघुशंका के लिए भी विद्यालय परिसर के बाहर जाना मजबूरी है।
छात्रों ने उठाई शिक्षकों और सुविधाओं की मांग
विद्यालय के छात्र सोहन कुमार, पीयूष कुमार, विवेक कुमार और करण कुमार का कहना है कि यहां शिक्षकों की संख्या बढ़ाना बेहद जरूरी है। साथ ही कंप्यूटर शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वे भी अन्य विद्यालयों के छात्रों की तरह बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें।
प्रशासन को दी गई है जानकारी
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक सह सचिव भीम प्रसाद दास ने बताया कि विद्यालय की समस्याओं से विभाग को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक और शिक्षक की प्रतिनियुक्ति होने की संभावना है। वहीं भवन निर्माण कार्य को लेकर उन्होंने कहा कि कोष के अभाव में काम अधूरा रह गया है।
सवालों के घेरे में शिक्षा व्यवस्था
इस स्थिति ने क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कई योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक बने हुए हैं। यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यहां पढ़ने वाले सैकड़ों बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
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